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Gonda News: परसपुर रियासत की 90 बीघा भूमि अब सरकारी
Sat, 27 May 2023 11:11 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Sat, 27 May 2023 11:11 PM IST
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परसपुर रियासत का राजमहल। -संवाद
गोंडा। परसपुर रियासत की जमीन को लेकर एसडीएम न्यायालय करनैलगंज से बड़ा फैसला हुआ है। रिसायत के परिवार की ओर से मामले में वाद चल रहा था। एसडीएम ने स्पष्ट किया कि अब यह जमीन नगर पंचायत परसपुर की संपत्ति होगी। उन्होंने जमीन को राजस्व अभिलेखों में दर्ज करने का आदेश दिया है। इससे परसपुर रियासत की 90 बीघे (18 एकड़) जमीन अब नगर पंचायत परसपुर के संरक्षण में होगी।
मामले में कुंवर विश्वनाथ सिंह ने 14 सितंबर 1994 को वाद दायर किया था। जिसमें ग्रामसभा परसपुर को पक्षकार के रूप में योजित किया गया था। परसपुर ग्राम पंचायत अब नगर पंचायत में परिवर्तित हो चुकी है।
कुंवर विश्वनाथ सिंह ने वाद में दावा किया था कि जमीन उनके पूर्वजों का बाग है। राजस्व अभिलेखों में यह बाग उनके बाबा राजा महादेव बख्श सिंह के पहले से ही दर्ज चली आ रही है। वादी के पूर्वज रियासत के राजा थे और वर्ष 1951 में जमींदारी खत्म होने के बाद रियासत समाप्त हो गई थी। जमींदारी विनाश अधिनियम के पहले ही वादी के पिता राजा भगौती प्रसाद सिंह का देहांत हो चुका था। उस समय वादी तथा प्रतिवादीगण नाबालिग थे। वाद में जमीन का हिस्सा अलग करने की बात भी कही गई थी।
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दरअसल परसपुर की रियासत के राजा भगवती प्रसाद सिंह के बाद रघुनाथ सिंह राजा हुए। परसपुर ग्राम की भूमि राजा रघुनाथ सिंह को मिली थी। जबकि उनके भाइयों को मधईपुरकुर्मी, मधईपुर खांडेराय तथा डेहरास की भूमि की जमींदारी क्रमश: कुंवर विश्वनाथ सिंह, कुंवर रामनाथ सिंह व कुंवर यदुनाथ सिंह को प्राप्त हुई थी। जमींदारी खत्म होने के बाद भी ये सभी अपनी-अपनी प्राप्त जमींदारी की भूमि पर काबिज हैं।
मामले में लंबी सुनवाई हुई और कई स्तर पर राज परिवार के सदस्यों की ओर से अपने तर्क रखे गए। जिसमें यह बात सामने आई कि राजा भगवती प्रसाद सिंह की संपत्ति में समान अंशधारी के रूप में डिक्री प्रदान की थी तथा राजा रघुनाथ का राजा भगवती प्रसाद सिंह की संपत्ति के एकल स्वामी होने का दावा खारिज कर दिया गया था। अन्य मामलों का निस्तारण करते हुए रानी जानकी कुंवर द्वारा धृत संपत्ति को ट्रस्ट के अभाव में ग्रामसभा परसपुर की संपत्ति घोषित कर दी गई। अब वर्तमान में ग्रामसभा परसपुर नगर पंचायत परसपुर में है। ऐसे में अब ये संपत्ति नगर पंचायत परसपुर के नाम दर्ज करने का आदेश हुआ है।
-- -- -- -वर्जन-- -- -- --
परसपुर की 90 बीघे भूमि के मामले का निस्तारण कर दिया गया है। फैसला तथ्यों के आधार पर किया गया है। पूर्व में ग्रामसभा को भूमि मिली थी, उसे अब नगर पंचायत के जिम्मे करने का फैसला हुआ है।
-- हीरालाल, एसडीएम करनैलगंज
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मामले में कुंवर विश्वनाथ सिंह ने 14 सितंबर 1994 को वाद दायर किया था। जिसमें ग्रामसभा परसपुर को पक्षकार के रूप में योजित किया गया था। परसपुर ग्राम पंचायत अब नगर पंचायत में परिवर्तित हो चुकी है।
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कुंवर विश्वनाथ सिंह ने वाद में दावा किया था कि जमीन उनके पूर्वजों का बाग है। राजस्व अभिलेखों में यह बाग उनके बाबा राजा महादेव बख्श सिंह के पहले से ही दर्ज चली आ रही है। वादी के पूर्वज रियासत के राजा थे और वर्ष 1951 में जमींदारी खत्म होने के बाद रियासत समाप्त हो गई थी। जमींदारी विनाश अधिनियम के पहले ही वादी के पिता राजा भगौती प्रसाद सिंह का देहांत हो चुका था। उस समय वादी तथा प्रतिवादीगण नाबालिग थे। वाद में जमीन का हिस्सा अलग करने की बात भी कही गई थी।
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दरअसल परसपुर की रियासत के राजा भगवती प्रसाद सिंह के बाद रघुनाथ सिंह राजा हुए। परसपुर ग्राम की भूमि राजा रघुनाथ सिंह को मिली थी। जबकि उनके भाइयों को मधईपुरकुर्मी, मधईपुर खांडेराय तथा डेहरास की भूमि की जमींदारी क्रमश: कुंवर विश्वनाथ सिंह, कुंवर रामनाथ सिंह व कुंवर यदुनाथ सिंह को प्राप्त हुई थी। जमींदारी खत्म होने के बाद भी ये सभी अपनी-अपनी प्राप्त जमींदारी की भूमि पर काबिज हैं।
मामले में लंबी सुनवाई हुई और कई स्तर पर राज परिवार के सदस्यों की ओर से अपने तर्क रखे गए। जिसमें यह बात सामने आई कि राजा भगवती प्रसाद सिंह की संपत्ति में समान अंशधारी के रूप में डिक्री प्रदान की थी तथा राजा रघुनाथ का राजा भगवती प्रसाद सिंह की संपत्ति के एकल स्वामी होने का दावा खारिज कर दिया गया था। अन्य मामलों का निस्तारण करते हुए रानी जानकी कुंवर द्वारा धृत संपत्ति को ट्रस्ट के अभाव में ग्रामसभा परसपुर की संपत्ति घोषित कर दी गई। अब वर्तमान में ग्रामसभा परसपुर नगर पंचायत परसपुर में है। ऐसे में अब ये संपत्ति नगर पंचायत परसपुर के नाम दर्ज करने का आदेश हुआ है।
परसपुर की 90 बीघे भूमि के मामले का निस्तारण कर दिया गया है। फैसला तथ्यों के आधार पर किया गया है। पूर्व में ग्रामसभा को भूमि मिली थी, उसे अब नगर पंचायत के जिम्मे करने का फैसला हुआ है।