{"_id":"679a672ce411cb43d8000e9c","slug":"17-goats-died-due-to-fever-and-infection-gonda-news-c-100-1-gon1001-131695-2025-01-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gonda News: बुखार व संक्रमण से 17 बकरियों की मौत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gonda News: बुखार व संक्रमण से 17 बकरियों की मौत
Wed, 29 Jan 2025 11:06 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Wed, 29 Jan 2025 11:06 PM IST
विज्ञापन
दुर्जनपुर घाट (गोंडा)। तरबगंज क्षेत्र में बुखार व संक्रमण के कारण बीते पांच दिनों में विभिन्न गांवों में 17 बकरियों की मौत हो गई। बुधवार को राजकीय पशु चिकित्सालय में सूचना भेजने के बाद स्वास्थ्य टीम ने पहुंचकर लोगों को जागरूक किया।
विकासखंड तरबगंज के धौरहराघाट, सीरपुरवा, पड़ताइनपुरवा, बैरागीपुरवा में पांच दिनों से बकरियों में जकड़न, बुखार व मुंह में संक्रमण की समस्या हो रही है। पशुपालक शमशेर अली की सात, पीरअली व शब्बीर की तीन, छोटकू की दो, व मालिकदीन की पांच बकरियों की मौत हो चुकी है।
सूचना मिलने पर पशु चिकित्साधिकारी तरबगंज डॉ. पूजा आर्या की टीम ने पहुंचकर जांच किया। उन्होंने बकरियों में पीपीआर (पेस्ट डेस पेटिट्स रूमिनेंट्स) के लक्षण बताए। दवाएं दीं। पशुपालकों ने बताया कि पिछले कई वर्षों से बकरियों का टीकाकरण नहीं किया गया है।
विज्ञापन
पीपीआर है एक वायरल बीमारी:
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आरके तिवारी ने बताया कि पीपीआर (पेस्ट डेस पेटिट्स रूमिनेंट्स) एक वायरल बीमारी है। यह भेड़ और बकरियों को प्रभावित करती है। इसे बकरी प्लेग या स्यूडो-रिंडरपेस्ट भी कहा जाता है। यह एक संक्रामक बीमारी है, जिससे जानवरों की मौत हो सकती है।
पीपीआर के लक्षण:
तेज बुखार, अवसाद, आंख और नाक से स्राव, मुंह में दर्दनाक घाव, निमोनिया व दस्त
पीपीआर के बारे महत्वपूर्ण जानकारी-
-पीपीआर वायरस से इंसानों को कोई खतरा नहीं होता, पीपीआर की रोकथाम के लिए टीका लगवाया जाता है।
-पीपीआर से बचने के लिए, दूषित भोजन, पानी, बिस्तर, और अन्य उपकरणों से बचना चाहिए।, पीपीआर से बचने के लिए, भेड़ और बकरियों को कृमिनाशक दवा देनी चाहिए।
विज्ञापन
विकासखंड तरबगंज के धौरहराघाट, सीरपुरवा, पड़ताइनपुरवा, बैरागीपुरवा में पांच दिनों से बकरियों में जकड़न, बुखार व मुंह में संक्रमण की समस्या हो रही है। पशुपालक शमशेर अली की सात, पीरअली व शब्बीर की तीन, छोटकू की दो, व मालिकदीन की पांच बकरियों की मौत हो चुकी है।
विज्ञापन
सूचना मिलने पर पशु चिकित्साधिकारी तरबगंज डॉ. पूजा आर्या की टीम ने पहुंचकर जांच किया। उन्होंने बकरियों में पीपीआर (पेस्ट डेस पेटिट्स रूमिनेंट्स) के लक्षण बताए। दवाएं दीं। पशुपालकों ने बताया कि पिछले कई वर्षों से बकरियों का टीकाकरण नहीं किया गया है।
विज्ञापन
पीपीआर है एक वायरल बीमारी:
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आरके तिवारी ने बताया कि पीपीआर (पेस्ट डेस पेटिट्स रूमिनेंट्स) एक वायरल बीमारी है। यह भेड़ और बकरियों को प्रभावित करती है। इसे बकरी प्लेग या स्यूडो-रिंडरपेस्ट भी कहा जाता है। यह एक संक्रामक बीमारी है, जिससे जानवरों की मौत हो सकती है।
पीपीआर के लक्षण:
तेज बुखार, अवसाद, आंख और नाक से स्राव, मुंह में दर्दनाक घाव, निमोनिया व दस्त
पीपीआर के बारे महत्वपूर्ण जानकारी-
-पीपीआर वायरस से इंसानों को कोई खतरा नहीं होता, पीपीआर की रोकथाम के लिए टीका लगवाया जाता है।
-पीपीआर से बचने के लिए, दूषित भोजन, पानी, बिस्तर, और अन्य उपकरणों से बचना चाहिए।, पीपीआर से बचने के लिए, भेड़ और बकरियों को कृमिनाशक दवा देनी चाहिए।