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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ghazipur News ›   Sawan Special Ghazipur Mahahar Dham is associated with Maharaj Dashrath and Shravan Kumar

Sawan Special: महाराज दशरथ और श्रवण कुमार से जुड़ा है गाजीपुर का महाहर धाम, दर्शन पूजन से पूरी होती है हर कामना

Sat, 08 Jul 2023 05:52 PM IST
उत्पल कांत अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर
अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर Published by: उत्पल कांत Updated Sat, 08 Jul 2023 05:52 PM IST
सार

Sawan Special: यूपी के गाजीपुर जिले में स्थितमहाहर धाम पूर्वांचल समेत देश के लाखों शिव भक्तों की आस्था का केंद्र है। यहां दुर्लभ तेरह मुखी शिवलिंग है। ऐसी मान्यता है कि इस धाम का निर्माण राजा दशरथ ने कराया था। सावन में यहां शिवभक्तों का रेला उमड़ता है। 

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Sawan Special Ghazipur Mahahar Dham is associated with Maharaj Dashrath and Shravan Kumar
गाजीपुर का महाहर धाम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर का मरदह क्षेत्र खुद में पौराणिक और सांस्कृतिक धरोहर समेटे है। गाजीपुर के मरदह स्थित महाहर धाम में प्राचीन तेरह मुखी शिवलिंग स्थापित है। जहां महाशिवरात्रि पर भक्तों का रेला उमड़ता है तो वहीं पूरे सावन माह मंदिर परिसर घंटों की आवाज से गुंजायमान रहता है। ऐतिहासिक-पौराणिक महत्व के कारण यह धाम आस्था और विश्वास का केंद्र है।

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पूरे पूर्वांचल सहित पड़ोसी राज्य के भी श्रद्धालु इस धाम पर पहुंचकर दुर्लभ शिवलिंग का दर्शन पूजन कर बाबा से मनचाही मुराद मांगते हैं। महाराजा दशरथ एवं माता-पिता भक्त श्रवण कुमार से जुड़ा होने सेा इस स्थल का ऐतिहासिक महत्व है। गाजीपुर जिला मुख्यालय से एनएच-29 जो गोरखपुर होते हुए नेपाल को जाता है।
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राजा दशरथ ने कराया था महाहर धाम का निर्माण

इसी सड़क पर पूर्व दिशा में तकरीबन 35 किलोमीटर दूर यही वो स्थान है जो मरदह के नाम से जाना जाता है। यहां सावन में बाबा भक्तों का रेला उमड़ता है। ऐसी मान्यता है कि महाहर धाम का निर्माण राजा दशरथ ने कराया था। ऐसा माना जाता है कि अयोध्या के महाराजा दशरथ शिकार खेलने के क्रम में में महाहर धाम के पास जंगल में पहुंचे थे।

उसी समय श्रवण कुमार अपने दृष्टिहीन माता-पिता को कांवर पर बैठाकर तीर्थयात्रा कराने के लिए उसी जंगल से गुजर रहे थे। माता-पिता को प्यास लगने पर श्रवण कुमार उन्हें जंगल में एक स्थान पर बैठाकर पानी की तलाश में चले गए। वह सरोवर में पानी ले रहे थे तभी महाराजा दशरथ का शब्द भेदी बाण उन्हें लगा था। महाहर धाम परिसर में स्थित पोखरे के बारे में मान्यता है कि यह वही पोखरा है जहां श्रवण कुमार जल लेने गए थे। तब श्रवण के माता-पिता ने दशरथ को श्राप दिया था।

Sawan Special Ghazipur Mahahar Dham is associated with Maharaj Dashrath and Shravan Kumar
महाहर धाम में स्थापित शिवलिंग - फोटो : अमर उजाला

इसके बाद ब्रह्मा के आर्शीवाद से राजा दशरथ ने श्राप मुक्ति और पुत्रप्राप्ति के लिए शिवलिंग की स्थापना कर पूजन किया। यह महल दशरथ की गढ़ी के नाम से विख्यात है। धाम के दक्षिण तरफ श्रवणडीह नाम का गांव है। जहां पहले से बनाया गया श्रवण कुमार का मंदिर जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच चुका है। मंदिर के अध्यक्ष जितेंद्र नाथ पांडेय ने बताया कि धाम परिसर में शिव मंदिर के अलावा भगवान हनुमान, भैरव बाबा, संत रविदास, भगवान ब्रम्हा की चार मुखी प्रतिमा, मां दुर्गा, राधा-कृष्ण, राम-लक्ष्मण-जानकी सहित कई देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं।

तेरहमुखी है शिवलिंग

मंदिर के सचिव धीरेंद्र सिंह के मुताबिक धाम में तेरहमुखी शिवलिंग के साथ ही शिव-पार्वती की युगल मूर्ति भी अद्भुत एवं पूजनीय हैं। कहा जाता है कि मंदिर के सामने उत्तर से दक्षिण तरफ दिशा में एक किलोमीटर तक लंबा सरोवर है, जहां हजारों वर्ष पहले इस स्थान पर मां गंगा का प्रवाह था। सावन के प्रत्येक सोमवार को जलाभिषेक के लिए यहां कांवरियों का रेला उमड़ता है। महाशिवरात्रि के अवसर पर चार दिन चलने वाले मेले में दर्शनार्थियों सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचते हैं।

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