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पहले कर दी प्लॉट की बिक्री बाद में ले लिया पीएमएवाई का लाभ
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फिरोजाबाद। जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) में कई लोगों ने फर्जी दस्तावेजों (बैनामा) के आधार पर योजना का लाभ ले लिया। वहीं कुछ ने तथ्यों को छिपा कर बेची गई भूमि का पुराना बैनामा लगाकर एवं आस-पड़ोस में निर्माणाधीन भवन की जीओ टैगिंग करा आवास निर्माण की किस्तें हड़प लीं।
दिगेंद्र प्रताप सिंह पुत्र सोनपाल एवं नीलम पत्नी दिगेंद्र प्रताप सिंह निवासी मोहल्ला नारायन नगर सैलई ने 20 जून 2016 में पड़ोस में रहने वाले सत्यपाल से एक प्लॉट का बैनामा कराया। दिगेंद्र प्रताप का आरोप है कि बैनामा करने के बावजूद सत्यपाल ने तथ्यों को छिपाकर पुराने बैनामा को दर्शाकर उसी प्लॉट पर योजना का लाभ प्राप्त कर लिया। सत्यपाल ने विभागीय और कार्यदायी संस्था के कर्मचारियों से सांठगांठ के सहारे एक अन्य पड़ोसी के निर्माणाधीन मकान की जीओ टैगिंग करा आवास योजना की प्रथम व दूसरी किश्तें भी प्राप्त कर लीं। दिगेंद्र प्रताप की शिकायत पर शुरू में तो गौर नहीं किया गया। शिकायत जब उच्चाधिकारियों तक पहुंची तो डूडा विभाग एवं कार्यदायी संस्था के जिम्मेदार लोग सक्रिय हुए। मामले की जांच करने पर सच्चाई सामने आई।
गहनता से हो रही जांच
प्लॉट की बिक्री करने के बाद भी पीएमएवाई का लाभ लेने के करीब आठ-दस मामले सामने आए हैं। ऐसे सभी मामलों की गहनता से जांच की जा रही है। छह मामलों में फर्जी दस्तावेजों के आधार लाभ लेने की पुष्टि हुई है। संबंधितों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। - नीरज राजपूत, जिला समन्वयक (कार्यदायी संस्था एसबीएनजी)
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जमकर हुई मनमानी
शहरी बेघरों के लिए केंद्र सरकार द्वारा संचालित योजना में जमकर मनमानी की गई। कई मामलों में लोगों ने दूसरे व्यक्ति के निर्माणाधीन भवन की टैगिंग करा योजना के तहत भवन निर्माण को मिलने वाली धनराशि हड़प ली अथवा सगे संबंधियों का बैनामा दिखाकर आवास योजना का लाभ ले लिया।
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दिगेंद्र प्रताप सिंह पुत्र सोनपाल एवं नीलम पत्नी दिगेंद्र प्रताप सिंह निवासी मोहल्ला नारायन नगर सैलई ने 20 जून 2016 में पड़ोस में रहने वाले सत्यपाल से एक प्लॉट का बैनामा कराया। दिगेंद्र प्रताप का आरोप है कि बैनामा करने के बावजूद सत्यपाल ने तथ्यों को छिपाकर पुराने बैनामा को दर्शाकर उसी प्लॉट पर योजना का लाभ प्राप्त कर लिया। सत्यपाल ने विभागीय और कार्यदायी संस्था के कर्मचारियों से सांठगांठ के सहारे एक अन्य पड़ोसी के निर्माणाधीन मकान की जीओ टैगिंग करा आवास योजना की प्रथम व दूसरी किश्तें भी प्राप्त कर लीं। दिगेंद्र प्रताप की शिकायत पर शुरू में तो गौर नहीं किया गया। शिकायत जब उच्चाधिकारियों तक पहुंची तो डूडा विभाग एवं कार्यदायी संस्था के जिम्मेदार लोग सक्रिय हुए। मामले की जांच करने पर सच्चाई सामने आई।
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गहनता से हो रही जांच
प्लॉट की बिक्री करने के बाद भी पीएमएवाई का लाभ लेने के करीब आठ-दस मामले सामने आए हैं। ऐसे सभी मामलों की गहनता से जांच की जा रही है। छह मामलों में फर्जी दस्तावेजों के आधार लाभ लेने की पुष्टि हुई है। संबंधितों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। - नीरज राजपूत, जिला समन्वयक (कार्यदायी संस्था एसबीएनजी)
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जमकर हुई मनमानी
शहरी बेघरों के लिए केंद्र सरकार द्वारा संचालित योजना में जमकर मनमानी की गई। कई मामलों में लोगों ने दूसरे व्यक्ति के निर्माणाधीन भवन की टैगिंग करा योजना के तहत भवन निर्माण को मिलने वाली धनराशि हड़प ली अथवा सगे संबंधियों का बैनामा दिखाकर आवास योजना का लाभ ले लिया।