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मनोरंजन की सांस्कृतिक विधाओं को जीवंत किए है रामलीला महोत्सव
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दतावली गांव के युवा रामलीला में वर्ष 1965 से नाटक का मंचन कर रहे हैं। (फाइल फोटो)
- फोटो : FIROZABAD
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फिरोजाबाद। सुहागनगरी का रामलीला महोत्सव मनोरंजन की पुरातन विधाओं को जीवंत किए हुए है। रामलीला मेला महोत्सव में ख्याल, रसिया, कवि सम्मेलन और नौटंकी जैसे आयोजन आज भी होते हैं। इनमें देश के कई प्रांतों से कलाकार आते हैं और भारतीय संस्कृति की विविधताओं को एक मंच पर प्रस्तुत करते हैं। शाम को लीला के मंचन के बाद हर रोज सांस्कृतिक कार्यक्रम देखने लोग एकत्रित होते हैं।
डेढ़ सौ वर्ष पुराने रामलीला मेला महोत्सव से भारतीय संस्कृति की परंपराएं जुड़ी हैं।
बदलते परिवेश में नई पीढ़ी के लिए ख्याल, रसिया और नौटंकी जैसे आयोजन हाशिए पर हैं फिर भी इस तरह के आयोजनों में रुचि रखने वालों को रामलीला मेला का इंतजार रहता है। मेले के मंच पर ख्याल दो दिन होते हैं। ख्याल सुनने के लिए लोग गांवों से शहर आते हैं और रात भर ख्याल का आनंद लेते हैं। रसिया मंडली भी अपने अंदाज में मनोरंजन करती है। ख्याल के मंचन के लिए बरेली, झांसी, बांदा, लखनऊ, अलीगढ़ की टीमें आती रही हैं। अलीगढ़ और हाथरस की रसिया टीम भरपूर मनोरंजन करती है। रामलीला के मंच पर देवी जागरण और भजन संध्या के कार्यक्रम भी होने लगे हैं। इस बार शालिनी शर्मा की भजन संध्या भी रखी गई है।
दतावली का संगीत ड्रामा क्लब 1965 से दे रहा है प्रस्तुति
गांव दतावली का शिव संगीत ड्रामा क्लब रामलीला में 1965 से प्रस्तुति दे रहा है। इस क्लब से जुडे़ गांव के युवा और कलाकार प्रस्तुति देते हैं। इन दिनों भी रिहर्सल चल रहा है। दशहरा से पहले दो दिन इनकी प्रस्तुति रामलीला के मंच पर होती है। वीर अभिमन्यु, सत्यवादी हरिशचंद्र, सीता त्याग, सती सावित्री, श्रवण कुमार आदि शिक्षाप्रद विषय पर प्रस्तुति दी जाती है।
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डेढ़ सौ वर्ष पुराने रामलीला मेला महोत्सव से भारतीय संस्कृति की परंपराएं जुड़ी हैं।
बदलते परिवेश में नई पीढ़ी के लिए ख्याल, रसिया और नौटंकी जैसे आयोजन हाशिए पर हैं फिर भी इस तरह के आयोजनों में रुचि रखने वालों को रामलीला मेला का इंतजार रहता है। मेले के मंच पर ख्याल दो दिन होते हैं। ख्याल सुनने के लिए लोग गांवों से शहर आते हैं और रात भर ख्याल का आनंद लेते हैं। रसिया मंडली भी अपने अंदाज में मनोरंजन करती है। ख्याल के मंचन के लिए बरेली, झांसी, बांदा, लखनऊ, अलीगढ़ की टीमें आती रही हैं। अलीगढ़ और हाथरस की रसिया टीम भरपूर मनोरंजन करती है। रामलीला के मंच पर देवी जागरण और भजन संध्या के कार्यक्रम भी होने लगे हैं। इस बार शालिनी शर्मा की भजन संध्या भी रखी गई है।
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दतावली का संगीत ड्रामा क्लब 1965 से दे रहा है प्रस्तुति
गांव दतावली का शिव संगीत ड्रामा क्लब रामलीला में 1965 से प्रस्तुति दे रहा है। इस क्लब से जुडे़ गांव के युवा और कलाकार प्रस्तुति देते हैं। इन दिनों भी रिहर्सल चल रहा है। दशहरा से पहले दो दिन इनकी प्रस्तुति रामलीला के मंच पर होती है। वीर अभिमन्यु, सत्यवादी हरिशचंद्र, सीता त्याग, सती सावित्री, श्रवण कुमार आदि शिक्षाप्रद विषय पर प्रस्तुति दी जाती है।
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