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कोरोना और मौसम ने फीका किया होली का कारोबार
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फतेहपुर। रंगोत्सव की खुशियों पर जानलेवा कोरोना वायरस और बेजा मानसून का दखल इस बार भारी पड़ा। दो दिन मनाए जाने वाले इस त्योहार को पहले दिन से ही मौसम नजर लग गई। बाकी का काम कोरोना के खतरे ने पूरा कर दिया। सड़कें पर पूर्व के वर्षों की तरह होरियारों की रंगत फीकी रही।
होली और दीपावली जैसे त्योहारों में फुटपाथ पर दुकान सजाने वाले व्यापारी इस बार कोरोना और मौसम के फेर मेें परेशान हो गए। यह हाल शहर से लेकर गांव के बाजार हॉट में भी देखने को मिला। दस से 20 हजार रुपये की पिचकारी संग रंग, अबीर और गुलाल लाकर बिक्री करने वाले छोटे दुकानदार, माल खरीदने में लगाई गई लागत भी नहीं निकाल पाए। हाल यह बन पड़े कि माल न निकलता देखकर इन दुकानदारों को खरीदारों के मनमाफिक दाम
पर पिचकारी बेची। शहर के शादीपुर चौराहा में पिचकारी की दुकान लगाने वाले छल्ला गुप्ता ने बताया कि वह 13 हजार रुपये का माल कानपुर से लेकर आए थे। उम्मीद थी कि पूरा बिक जाएगा, लेकिन आधा से ज्यादा बच गया। बिके माल में हजार रुपया ही बचत का निकल सका है जबकि आधा से ज्यादा माल डंप हो गया है। रकम फंस गई
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है। हर साल मुनाफा निकलता था। चौक इलाके में पिचकारी की दुकान लगाने वाले राजू ने बताया कि पिछली साल की अपेक्षा इस मर्तबा 20 फीसदी स्प्रे व रंग-बिरंगे गीले रंग की बिक्री नहीं हो सकी। कई साल से दुकान लगाने का यह पहला अनुभव है, जब मुनाफा तो दूर पास की रकम तक नहीं निकल पाई। इस बार अबीर-गुलाल ही ठीक से बिक सका।
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होली और दीपावली जैसे त्योहारों में फुटपाथ पर दुकान सजाने वाले व्यापारी इस बार कोरोना और मौसम के फेर मेें परेशान हो गए। यह हाल शहर से लेकर गांव के बाजार हॉट में भी देखने को मिला। दस से 20 हजार रुपये की पिचकारी संग रंग, अबीर और गुलाल लाकर बिक्री करने वाले छोटे दुकानदार, माल खरीदने में लगाई गई लागत भी नहीं निकाल पाए। हाल यह बन पड़े कि माल न निकलता देखकर इन दुकानदारों को खरीदारों के मनमाफिक दाम
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पर पिचकारी बेची। शहर के शादीपुर चौराहा में पिचकारी की दुकान लगाने वाले छल्ला गुप्ता ने बताया कि वह 13 हजार रुपये का माल कानपुर से लेकर आए थे। उम्मीद थी कि पूरा बिक जाएगा, लेकिन आधा से ज्यादा बच गया। बिके माल में हजार रुपया ही बचत का निकल सका है जबकि आधा से ज्यादा माल डंप हो गया है। रकम फंस गई
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है। हर साल मुनाफा निकलता था। चौक इलाके में पिचकारी की दुकान लगाने वाले राजू ने बताया कि पिछली साल की अपेक्षा इस मर्तबा 20 फीसदी स्प्रे व रंग-बिरंगे गीले रंग की बिक्री नहीं हो सकी। कई साल से दुकान लगाने का यह पहला अनुभव है, जब मुनाफा तो दूर पास की रकम तक नहीं निकल पाई। इस बार अबीर-गुलाल ही ठीक से बिक सका।