फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Farrukhabad News ›   शादी उत्सवाें में मेरा भी आता था बुलावा

शादी उत्सवाें में मेरा भी आता था बुलावा

Fri, 20 Dec 2013 05:45 AM IST
Farrukhabad
Farrukhabad Updated Fri, 20 Dec 2013 05:45 AM IST
विज्ञापन
फर्रुखाबाद। मैं फर्रुखाबाद हूं। अब तक हुआ हर परिवर्तन मेरी आंखों के सामने से गुजरा है। जितनी शिद्दत से सत्ता और ताकत बदलती देखी है उतना ही सतर्क होकर रस्माें और रिवाजों में बदलाव का भी मैं गवाह हूं। इस बदलाव में कई कुछ रस्में अतीत बन गईं तो कई सिर्फ परंपरा निभाने भर को बची हैं। इन परंपराआें की आत्मा गुम है। परंपराआें में सामाजिक जीवन के गहरे रहस्य छिपे थे। यह रिवाज प्रकृति व आम जीवन के बीच की यह मजबूत कड़ी थे। सामाजिक संरचना में सामंजस्य की भूमिका का भी अच्छी तरह से निर्वहन होता था। शादी ब्याह की रस्में भी कुछ ऐसी ही थीं। विवाह उत्सवाें में मेरी भी शिरकत रहती है। मुझे बाकायदा बुलाया भी जाता था। अब यह बुलावा कम होता जा रहा है, लेकिन यह शिकायत नहीं है। यह मेरा अपना दर्द है। ऐसे दर्दों को सहेजते हुए ही चल रहा हूं, अपनी रफ्तार से ही।
विज्ञापन




सिमट रहे रिवाज
1960 के करीब शादी विवाह में सुखपाल का चलन था। इसी में दुल्हन की विदाई होती थी। इसमें दोनों तरफ के दरवाजाें में परदे पड़े होते थे। इसके हत्थे टेढ़े होते थे। चार लोग इसे लेकर चलते थे। इसके बाद पालकी चलन में आ गई। 1980 तक दुल्हनें पालकी में ही विदा होती थीं। शादी के दौरान की कुआंवारा की रस्म खतरे में है। गौना, रौना और ऐपनवारी की रस्म भी सिमटने लगी है। ताई की रस्म में नगर व ग्राम देवी देवताओं को भी आमंत्रित किया जाता था।
विज्ञापन




हमारी विरासत
राजकीय इंटर कॉलेज फर्रुखाबाद की स्थापना 1858 में की गई थी। ब्रिटिश हुकूमत में यहां चर्च बनवाने की तैयारी थी। प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान जनाक्रोश के बाद यहां जिला स्कूल शुरू कर दिया गया। 1968 में इंटरमीडिएट की मान्यता मिलने के बाद यह राजकीय इंटर कॉलेज हो गया। 1862 में इसी कॉलेज में नवाब इकबाल अहमद खां को पीपल के पेड़ पर फांसी दी गई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


क्रांति के कोहिनूर
पंडित रामनरायन आजाद
पंडित रामनरायन आजाद प्रमुख क्रांतिकारी थे। 1921 में मैनपुरी में देश भक्ति की कविता पढ़ने पर इन्हें 6 माह की सजा दी गई थी। 1925 में यह कानपुर में अंग्रेज अधिकारी पर हमले के उद्देश्य से उसके बंगले पर गए। अधिकारी के न मिलने पर वह उसका पालतू कुत्ता उठा लाए। जुलाई 1926 में खुफि या पुलिस के छापा में कुत्ता इनके यहां मिल गया। इसमें इन्हें एक साल की सजा सुनाई गई। 1932 में नमक आंदोलन में ढाई साल की सजा दी गई थी। 1942 में यह तीन साल जेल में रहे। इनकी अनुवाई में शहर में क्रांतिकारियाें के लिए बम बनने लगे थे। गैर जिलाें से शस्त्राें का जखीरा जमा किया जाता था। चंद्रशेखर आजाद को रामनरायन आजाद ने तीस बोर की पिस्तौल और कारतूस दिए थे। इन्हें रामनरायन आजाद ने ग्वालियर से मंगवाया था।

फर्रुखाबाद और मैं

फर्रुखाबाद स्थापना के 300 साल पूरे हो रहे हैं। 66 साल लोकतंत्र की स्थापना के हो रहे हैं। केंद्र व प्रदेश सरकार में जिले के जनप्रतिनिधि शामिल रहे हैं। इसके बाद भी विकास नहीं हो पाया। छपाई उद्योग, जरदोजी,पीतल उद्योग ठंडे होते जा रहे हैं। आलू के लिए उद्योग नहीं लगा। शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर नहीं हैं। धरोहरें खत्म होती जा रही हैं। जनता खुद पर भरोसा करना शुरू कर दे, तभी तरक्की हो सकेगी।

फोटो- 12 (जैसा सर्वोदयी नेता लक्ष्मण सिंह ने बताया )

ऐसा हो अपना फर्रुखाबाद

आलू किसानाें को फसल का बाजिव मूल्य नहीं मिल रहा है। इसके लिए जिले में आलू उद्योग लगाया जाए।
-

जिले के सड़क चौराहों पर हाई मास्क लगें। यह इंतजाम देहाताें में भी लागू किया जाए।

शहर में नई कालोनियाें का सुनियोजित विकास किया जाए। इसके लिए बेहतर प्लान बनाया जाना चाहिए।
-

शहर में पार्कों की हालत खराब है। इनक ा सौंदर्यीकरण करवाया जाए।

आपको कुछ कहना है
स्थापना से लेकर 300 साल के सफर में फर्रुखाबाद ने तमाम उतार चढ़ाव देखे हैं। श्रृंखला पर हमें पाठकोंके विचाराें और प्रतिक्रिया का इंतजार रहेगा।हमारा पता है: अमर उजाला कार्यालय, बढ़पुर, फर्रुखाबाद। मोबाइल: 8859108092 ।
मेल - farrukhabadbureau@knp.amarujala.com
.........................
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed