बालिका गृह में एसआईटी ने सात घंटे तक रिकार्ड खंगाले   

deoria Updated Sun, 25 Nov 2018 11:43 PM IST
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बालिका गृह पहुंची एसआईटी।
बालिका गृह पहुंची एसआईटी। - फोटो : amar ujala

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देवरिया। बाल गृह बालिका कांड की जांच कर रही एसआईटी रविवार को फिर स्टेशन रोड स्थित बालिका गृह पहुंची। मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में उसकी सील तोड़कर सात घंटे तक रिकार्ड खंगाले। इस दौरान टीम ने सामूहिक विवाह से जुड़े कई दस्तावेजों को कब्जे में लिया। विवाह समारोह के लिए खरीदे गए बर्तनों में से पांच कुकर व अन्य सामान भी टीम अपने साथ ले गई। देर शाम छह बजे बालिका गृह को फिर सील कर दिया गया। 
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समाज कल्याण विभाग की ओर से सामूहिक विवाह योजना के तहत 200 से अधिक जोड़ों की शादी कराई गई थी। जेल में बंद गिरिजा त्रिपाठी की संस्था का इसमें विशेष योगदान रहा। इसमें वसूली कर बेमेल विवाह कराने के तथ्य मिले हैं, जिसकी एसआईटी जांच कर रही है। शनिवार को रजला स्थित वृद्धा आश्रम की जांच की गई थी और रविवार को मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में बाल गृह बालिका गृह की सील तोड़कर अभिलेखों की जांच बारीकी से की गई। दोपहर में एसआईटी की एसपी भारती सिंह भी पहुंच र्गइं। टीम जरूरी अभिलेख और सामूहिक विवाह योजना में खरीदे गए बर्तन साथ ले गई। हर गतिविधि की वीडियोग्राफी भी कराई गई। 
जांच के दौरान गिरिजा त्रिपाठी की करीबी और संस्था में कार्य करने वाली प्रमिला ने कार्यालय में रखे अभिलेख के बारे में एसआईटी को जानकारी दी। एसआईटी को बेमेल शादी कराने और बर्तन आदि की खरीदारी में गोलमाल भी मिला है। बालिका गृह से दो बच्चों की मौत से जुड़ी पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी मिली है। इसे विवेचना की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। इस दौरान मजिस्ट्रेट के रूप में एसडीएम सदर रामकेश यादव, समाज कल्याण अधिकारी दीनानाथ शुक्ल, एसआईटी के विवेचक बृजेश सिंह, सरिता नागवंशी, किरण मिश्रा, आशुतोष सिंह, अजय सिंह मौजूद रहे। 
दुकानदार ने बर्तनों को पहचाना 
देवरिया। सामूहिक विवाह योजना में गिरिजा त्रिपाठी ने अंसारी रोड स्थित आशीष की दुुकान से बर्तन खरीदे थे। एसआईटी ने उसे भी पूरे दिन साथ रखा और बालिका गृह से मिले बर्तन की पहचान कराई। इसके अलावा एक दर्जन से अधिक मुहर भी एसआईटी ने कब्जे में ली हैं। इसमें कई दुकानदार और विभागों की मुहर शामिल है, जो जांच का अहम हिस्सा बनेंगे।

नहीं मिल रहा यौन उत्पीड़न के साक्ष्य 
देवरिया। यौन उत्पीड़न और पाक्सो एक्ट के तहत दर्ज मुकदमे को साबित करने के लिए एसआईटी साक्ष्य की तलाश कर रही है, लेकिन अभी कोई अहम साक्ष्य टीम के हाथ नहीं लगा है। 
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