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गर्दन की हड्डी टूटने से हुई थी रंजीत की मौत

Sun, 09 Jun 2019 11:57 PM IST
deoria Published by: राकेश पांडेय Updated Sun, 09 Jun 2019 11:57 PM IST
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ranjeet died by neck bone break
रोती-बिलखती रंजीत की मां। - फोटो : amar ujala
देवरिया। रंजीत के आगे की सीट पर बैठने की खीझ आरोपियों में इस कदर थी कि उन्होंने बेरहमी की सारी हदें पार कर दीं। पहले पिटाई कर उसे अधमरा कर दिया। इसके बाद भी मन नहीं भरा तो उसके गर्दन व सीने पर बाइक चढ़ा दी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बाइक चढ़ाने के कारण गर्दन की हड्डी टूटने से ही मौत की पुष्टि हुई है। उसके सिर और शरीर के कई हिस्सों में भी चोट के निशान मिले हैं।
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बंजरिया शुक्ल निवासी 12वीं के छात्र रंजीत सिंह को शनिवार की सुबह कोचिंग में साथ पढ़ने वाले अहिल्यापुर गांव के कुछ लड़कों ने घेर लिया था। सरेआम उसकी जमकर पिटाई की। इसके बाद रास्ते पर लेटाकर उसकी गर्दन और सीने पर बाइक चढ़ा दी। रंजीत के दोस्तों और आसपास के लोगों के पहुंचने के बाद आरोपी फरार हो गए। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने रंजीत को मृत घोषित कर दिया। डॉ. राजबहादुर तिवारी, डॉ. मुरारी राय व फार्मासिस्ट शैलेष तिवारी के पैनल ने रंजीत के शव का पोस्टमार्टम किया। रविवार को आई रिपोर्ट में मौत का कारण बाइक चढ़ाने से गर्दन की हड्डी टूटना दर्शाया गया है। रंजीत के सिर में भी गंभीर चोट आई है। हाथ व पैर की हड्डी भी फ्रैक्चर मिली, मगर मौत की मुख्य कारण गर्दन की हड्डी का टूटना ही रहा।
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आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने दी दबिश
पूछताछ के लिए परिजनों को हिरासत में लिया
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। रंजीत की हत्या के मामले में पुलिस टीम ने शनिवार की रात अहिल्यापुर गांव में दबिश दी। कोई भी आरोपी पुलिस के हाथ नहीं लगा। पुलिस टीम ने आरोपियों के परिवार के छह सदस्यों को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया है। उनसे मिली जानकारी के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश में जुटी है। रंजीत की पिटाई कर मौत के घाट उतारने वाले एक आरोपी को लोगों ने घटनास्थल से ही पकड़ लिया था। जमकर पिटाई के बाद उसे पुलिस के सुपुर्द कर दिया। पुलिस ने उससे घटना के बारे में पूछताछ की। कोचिंग व स्कूल में पूर्व में हुए विवादों के बारे में जानकारी ली। इसके बाद रात में शेष चार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए अहिल्यापुर गांव में दबिश दी। आरोपी तो नहीं पकड़े गए, लेकिन उनके परिवार के छह सदस्यों को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया गया है। उनसे आरोपियों के छिपे होने के स्थान और अन्य जानकारी जुटाई जा रही है। सदर कोतवाल यादवेंद्र बहादुर पाल ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है। जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
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रंजीत से सवाल पूछती थीं लड़कियां, इसलिए जलते थे 
बैच में 65-70 बच्चों में 25 की संख्या में लड़कियां भी शामिल
मेधावी होने के कारण रंजीत से ही पूछती थी सवालों के हल
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। छात्र रंजीत का पढ़ाई में मेधावी होना ही उसके लिए काल बन गया। आरोपी उसकी प्रतिभा से जलते थे और इसी कारण अक्सर उस पर कटाक्ष करते हुए गाली-गलौज करते थे। कोचिंग में पढ़ने वाली लड़कियों का बार-बार रंजीत से ही सवाल पूछना भी ईर्ष्या की मुख्य वजह थी।
आरोपियों को लगता था कि रंजीत की जगह पर वे बैठेंगे तो लड़कियां उनसे भी बात करेंगी। लिहाजा, उन्होंने रंजीत को ही अपने रास्ते से हटा दिया। मालीबारी में कोचिंग चलाने वाला प्रमेंद्र यादव बैकुंठपुर शत्रुधन शाही इंटर कॉलेज में शिक्षक भी था। स्कूल में पढ़ने वाले ज्यादातर बच्चे उसी से फिजिक्स और मैथ की कोचिंग लेते थे। कोचिंग क्लास में 70-75 बच्चे पढ़ते हैं, जिसमें 25 की संख्या में लड़कियां आती हैं। कोचिंग में रंजीत के साथ पढ़ने वाले बच्चों ने बताया कि सबसे आगे लड़कियां बैठती हैं। उनके पीछे लड़कों के बैठने की व्यवस्था थी। रंजीत लड़कियों के ठीक पीछे वाली बेंच पर बैठता था। पढ़ाई में मेधावी होने के कारण कुछ भी न समझ में आने पर लड़कियां उसी से सवाल पूछती थीं। अहिल्यापुर गांव निवासी आरोपियों को यह नागवार लगता था। वह कई बार कोचिंग में लड़कियों के पीछे वाली बेंच पर बैठने को लेकर रंजीत से एतराज जता चुके थे। गाली-गलौज तक की थी, मगर रंजीत उनकी हरकतों को अनदेखा कर पढ़ाई में मन लगाए रहा। कई बार शिक्षक से भी शिकायत की, लेकिन सबने डांट-डपटकर मामले को शांत करा दिया। किसी को भी यह अंदाजा नहीं था कि यह छोटी सी बात इतनी बड़ी घटना का रूप ले लेगी।

पुलिस को सूचना देने की बजाय भागा संचालक
देवरिया। कोचिंग के पास आरोपियों ने जब रंजीत की पिटाई कर अधमरा कर दिया था तो आसपास के लोग घटनास्थल की ओर दौड़े। कुछ लोगों ने कोचिंग पर पहुंचकर कर शिक्षक प्रमेेंद्र को जानकारी देते हुए पुलिस को सूचना देने की बात कही। चौराहे के दुकानदारों की मानें तो पुलिस को सूचना देने की बजाए प्रमेंद्र बाइक पर बैठकर मौके से फरार हो गया। लोगों ने कोचिंग के दूसरे शिक्षक प्रमोद चौहान के कार्य व्यवहार के प्रति भी असंतोष जताया। मालीबारी चौराहे के दुकानदारों का कहना था कि प्रमोद ने बच्चों का मन बढ़ा रखा था। कई बार लोगों ने इस बारे में उसे टोका, मगर वह अनदेखा करता रहा। घटना के बाद से दोनों ही शिक्षक घर छोड़कर फरार हैं।
फोटो समाचार...
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हमके मझधरवा में छोड़के काहे गइला ए सुगवा...
छात्र को पीटकर मार डालने का मामला, दिल्ली से घर लौटे मां-पिता दरवाजे पर बेटे का शव देखते ही बेसुध
मां शव से लिपट कर बार-बार हो जा रही थी बेहोश
विनय कुमार राय
खुखुंदू। माता-पिता ने जिस बेटे को अफसर बनाने का सपना देखा था, उसे दरवाजे पर चिरनिद्रा में लीन देख उनके होश उड़ गए। मां गश खाकर खिर पड़ी तो पिता सिर पकड़कर बैठ गए। छाती पीटते वह उस घड़ी को कोस रहे थे, जब उन्होंने इलाज के लिए दिल्ली जाने का फैसला लिया था। उनका कहना था कि अगर वह घर पर होते तो लाडले पर ऐसी विपदा कभी नहीं आने देते। मां के मुख से बार-बार एक ही चीख निकल रही थी कि बीच मझधरवा में हमके छोड़के काहे गइला ए सुगवा...। करुण क्रंदन देख सबकी आंखें छलक आईं।
कोचिंग सेंटर पर सीट पर बैठने के विवाद को लेकर छात्र रंजीत कुमार सिंह की हत्या के बाद पोस्टमार्टम कराकर शनिवार की शाम को ही शव गांव बंजरिया शुक्ल पहुंच गया था। लोगों को इंतजार था कि माता-पिता दिल्ली से लौटें तो बेटे के अंतिम दर्शन कर अंतिम संस्कार की रस्म पूरी करें। अलसुबह ही दोनों गांव पहुंच गए। बीमार मां गीता देवी बेटे मौत से पूरी तरह बेखबर थीं। दरवाजे पर जब उनकी नजर लाडले के शव पर पड़ी तो सुधबुध ही खो बैठीं। वहीं, गश खाकर गिर पड़ीं। कुछ देर बाद होश संभाला तो आंसू और चीख रुकने का नाम नहीं ले रही थी। बेटे के शव को सीने से लगाकर वह विलाप करती रहीं। बेटियां जूली सिंह, काजल, खुशी, गुलशन रो रही थीं, जबकि छोटा भाई सूरज एकटक सबका मुंह ताक रहा था। पिता विजय प्रताप सिंह का भी हाल बुरा था। गांव के लोग उन्हें ढांढस बंधाने में जुटे थे। पिता का कहना था कि रंजीत से उन्हें बहुत आस थी, मगर एक पल में ही सब कुछ छिन गया। गुमसुम पिता को समझ नहीं आ रहा था कि वह खुद को कैसे संभालें और बीमार पत्नी और बच्चों को कैसे ढांढस बंधाएं। शव का अंतिम संस्कार बैकुंठपुर छोटी गंडक नदी किनारे हुआ। पिता ने मुखाग्नि दी। पिता विजय प्रताप और गांववालों का कहना है कि घटना के लिए कोचिंग संचालक भी कम जिम्मेदार नहीं है। उन्होंने दोषियों को सख्त से सख्त सजा दिलाने की मांग की है, ताकि फिर से भविष्य में इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति न हो।

इनसेट
रात भर भाई के शव के पास बिलखती रहीं बहनें
खुखुंदू। निर्ममतापूर्वक पिटाई और बाइक चढ़ाने से हुई रंजीत की मौत की खबर लगते ही गांव में सन्नाटा पसर गया। शनिवार की देर शाम पोस्टमार्टम के बाद शव गांव पहुंचा तो लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। घर पर मौजूद चारों बहनों और वृद्ध दादा जगदीश सिंह की आंख के आंसू रुकने के नाम ही नहीं ले रहे थे। उधर, अपने लाडले की मौत की खबर से अनजान मां-बाप दिल्ली में थे। उन्हें दादी की बीमारी की बात कहकर तत्काल बुलाया गया। राहुल की सबसे बड़ी बहन जूली सिंह अन्य बहनों और दादा को ढांढस बंधाती रही। चलने-फिरने में असमर्थ बुजुर्ग दादी शिवदुलारी देवी चारपाई पर लेटी थीं वह भी काफी देर तक घटना से अनभिज्ञ रहीं। पूरी रात बहनें माता-पिता के आने के इंतजार में दरवाजे पर रखे भाई के शव को देख-देखकर बिलखती रहीं। एक-एक पल का समय उनके लिए भारी पड़ रहा था। 

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इनसेट
दूसरे दिन भी गांव में पसरा रहा सन्नाटा
खुखुंदू। घटना को लेकर बंजरिया गांव में हर कोई दुखी है। सबके जुबान पर बस यही सवाल है कि हत्यारे पकड़े गए कि नहीं। गांव में रविवार को भी सन्नाटा पसरा रहा। गांव में रंजीत की मौत को लेकर हर परिवार दुखी नजर आया। गांव में अधिकतर लोग घर में ही गमगीन मुद्रा में बैठे रहे। गांव वाले एक तरफ रंजीत की हत्या से जहां दुखी हैं, वहीं, हत्यारों के प्रति आक्रोश भी है। हत्यारों के गिरफ्तारी की खबर जानने के लिए गांववाले बेताब दिखे।
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