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विधायक तो रोए, जनता कहां जाए
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विधायक तो सदन में रोए, पर जनता कहां जाए
यहां भी आसानी से मुकदमा दर्ज नहीं करती पुलिस, पीड़ित काटते हैं चक्कर
थानों पर सुनवाई न होने से एसपी ऑफिस पर बढ़ी रही शिकायतों की संख्या
सुनील कुमार सिंह
देवरिया। पुलिस भला कहां सुधरने वाली है। थाने में एफआईआर दर्ज कराने के लिए जब विधायक को सदन में रोना पड़ रहा है तो फिर आम जनता की क्या बिसात। देवरिया पुलिस का हाल भी आजमगढ़ पुलिस से अलग नहीं है। यहां भी रोजाना थानों से दर्जनों पीड़ित मायूस लौट रहे हैं। कोई मारपीट की शिकायत लेकर पहुंचता है तो कोई चोरी, कब्जा, गबन जैसे मामलों में केस दर्ज कराने के लिए थाने के चक्कर लगा रहा हैं। थाने पर पुलिस सुनती ही नहीं। विवश होकर उन्हें पुलिस ऑफिस आना पड़ता है। एसपी ऑफिस में रोजाना लगने वाली भीड़ में शामिल हर फरियादी थानों पर पुलिस के बर्ताव की गवाही दे रहा है। हालांकि अफसर यह मानने को तैयार नहीं। उनकी नजर में सब कुछ बेहतर है। गुरुवार को एसपी ऑफिस पहुंचे मामलों की पड़ताल की गई तो कई ऐसे ही मामले सामने आए। फरियादियों का कहना था कि वह थाने पर हाथ जोड़ते हैं, गिड़गिड़ाते हैं, लेकिन साहब सुनते ही नहीं। आजमगढ़ के विधायक सदन में रो दिए तो सबने देख लिया, मगर हम अपनी पीड़ा किसे और कैसे सुनाएं।
केस एक:
रुद्रपुर कोतवाली इलाके के अकटहिया उर्फ मटियरी गांव निवासी मुसाफिर चौहान (62) को बच्चों के विवाद में गांव के कुछ लोगों ने पीटकर घायल कर दिया। दाहिने हाथ की हड्डी टूट गई है। 15 दिन में पुलिस से कई बार शिकायत की गई, लेकिन केस दर्ज नहीं हुआ। गुरुवार को उसने एएसपी से गुहार लगाई।
केस दो:
गौरीबाजार इलाके के खैरटिया गांव की कमलेश नंदिनी का कहना है कि छह फरवरी की सुबह पति और नंदोई ने मिलकर ससुर और उसकी पिटाई कर दी। गौरीबाजार पुलिस को तहरीर दी गई, लेकिन पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। गुरुवार को वह अपने अधिवक्ता के साथ जिला मुख्यालय पहुंचकर एएसपी से मिली।
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केस तीन:
खुखुंदू के मझवलिया नंबर-एक गांव निवासी रामदुलारे कुशवाहा का कहना है कि 16 फरवरी को चौराहे के एक चिकित्सक की गलती से उसके चार माह के बेटे की मौत हो गई। इस मामले में खुखुंदू पुलिस को कई बार तहरीर दी, लेकिन पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। उसने एएसपी से मिलकर कार्रवाई की मांग की।
यहां आने वाले हर फरियादी को संतुष्ट किया जाता है। सभी थानेदारों और पुलिस कर्मियों को भी जनता की समस्या की गंभीरता से सुनवाई करने का आदेश दिया गया है। इसके बाद भी सुनवाई नहीं होना गंभीर बात है। ऐसे कई लोगों पर कार्रवाई की जा चुकी है, आगे भी होगी। जनता की फरियाद नहीं सुनने वालों की खैर नहीं है।
- एन.कोलांचि, एसपी
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यहां भी आसानी से मुकदमा दर्ज नहीं करती पुलिस, पीड़ित काटते हैं चक्कर
थानों पर सुनवाई न होने से एसपी ऑफिस पर बढ़ी रही शिकायतों की संख्या
सुनील कुमार सिंह
देवरिया। पुलिस भला कहां सुधरने वाली है। थाने में एफआईआर दर्ज कराने के लिए जब विधायक को सदन में रोना पड़ रहा है तो फिर आम जनता की क्या बिसात। देवरिया पुलिस का हाल भी आजमगढ़ पुलिस से अलग नहीं है। यहां भी रोजाना थानों से दर्जनों पीड़ित मायूस लौट रहे हैं। कोई मारपीट की शिकायत लेकर पहुंचता है तो कोई चोरी, कब्जा, गबन जैसे मामलों में केस दर्ज कराने के लिए थाने के चक्कर लगा रहा हैं। थाने पर पुलिस सुनती ही नहीं। विवश होकर उन्हें पुलिस ऑफिस आना पड़ता है। एसपी ऑफिस में रोजाना लगने वाली भीड़ में शामिल हर फरियादी थानों पर पुलिस के बर्ताव की गवाही दे रहा है। हालांकि अफसर यह मानने को तैयार नहीं। उनकी नजर में सब कुछ बेहतर है। गुरुवार को एसपी ऑफिस पहुंचे मामलों की पड़ताल की गई तो कई ऐसे ही मामले सामने आए। फरियादियों का कहना था कि वह थाने पर हाथ जोड़ते हैं, गिड़गिड़ाते हैं, लेकिन साहब सुनते ही नहीं। आजमगढ़ के विधायक सदन में रो दिए तो सबने देख लिया, मगर हम अपनी पीड़ा किसे और कैसे सुनाएं।
केस एक:
रुद्रपुर कोतवाली इलाके के अकटहिया उर्फ मटियरी गांव निवासी मुसाफिर चौहान (62) को बच्चों के विवाद में गांव के कुछ लोगों ने पीटकर घायल कर दिया। दाहिने हाथ की हड्डी टूट गई है। 15 दिन में पुलिस से कई बार शिकायत की गई, लेकिन केस दर्ज नहीं हुआ। गुरुवार को उसने एएसपी से गुहार लगाई।
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केस दो:
गौरीबाजार इलाके के खैरटिया गांव की कमलेश नंदिनी का कहना है कि छह फरवरी की सुबह पति और नंदोई ने मिलकर ससुर और उसकी पिटाई कर दी। गौरीबाजार पुलिस को तहरीर दी गई, लेकिन पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। गुरुवार को वह अपने अधिवक्ता के साथ जिला मुख्यालय पहुंचकर एएसपी से मिली।
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केस तीन:
खुखुंदू के मझवलिया नंबर-एक गांव निवासी रामदुलारे कुशवाहा का कहना है कि 16 फरवरी को चौराहे के एक चिकित्सक की गलती से उसके चार माह के बेटे की मौत हो गई। इस मामले में खुखुंदू पुलिस को कई बार तहरीर दी, लेकिन पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। उसने एएसपी से मिलकर कार्रवाई की मांग की।
यहां आने वाले हर फरियादी को संतुष्ट किया जाता है। सभी थानेदारों और पुलिस कर्मियों को भी जनता की समस्या की गंभीरता से सुनवाई करने का आदेश दिया गया है। इसके बाद भी सुनवाई नहीं होना गंभीर बात है। ऐसे कई लोगों पर कार्रवाई की जा चुकी है, आगे भी होगी। जनता की फरियाद नहीं सुनने वालों की खैर नहीं है।
- एन.कोलांचि, एसपी