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सरकारी सेवक भी करते थे अतीक की ‘चाकरी’
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माफिया अतीक अहमद
- फोटो : amar ujala
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देवरिया। माफिया अतीक अहमद पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद देवरिया जेल प्रशासन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सीबीआई जांच में जिला जेल के कई अफसरों की गर्दन फंसनी तय है। सरकारी सेवक होने के बाद भी अफसर अतीक की चाकरी करते थे। उसकी हनक के आगे नतमस्तक यह अफसर हर सुविधा का ख्याल रखते थे। इनके प्रश्रय के कारण ही जेल की सलाखों के पीछे होते हुए भी अतीक बाहर अपना साम्राज्य चलाने में कामयाब रहा। सीबीआई जांच की खबर के बाद इनकी सांसें टंग गई हैं।
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अतीक अहमद को नैनी सेंट्रल जेल से ट्रांसफर कर तीन अप्रैल 2017 को देवरिया जेल लाया गया था। वह यहां 31 दिसंबर 2018 तक रहा। करीब 21 महीने के दौरान उसने जेल में खुलकर मनमानी की। खानपान से लेकर रोजमर्रा के जरूरत की हर व्यवस्था उसके मनमाफिक होती थी। जेल की बैरकों की तलाशी में कई बार काजू-बादाम, मोबाइल फोन, पेन ड्राइव जैसे आपत्तिजनक सामान बरामद होते रहे। अतीक से मिलने वालों पर भी कोई पाबंदी रही।
जेल गेट पर बस अतीक का नाम बताते ही न तो रजिस्टर पर इंट्री की जरूरत होती थी और न ही किसी तलाशी की। जेल मैनुअल के विपरीत मुलाकाती घंटों तक अतीक की बैरकों में बैठे रहते थे। अफसर यह जानने की जहमत नहीं उठाते थे कि इतनी देर तक बैरक में वह क्यों और कैसे हैं। जेल प्रशासन पूरी तरह मूकदर्शक था। उनकी अनदेखी का ही असर था कि सलाखों के पीछे रहते हुए भी अतीक अक्सर रंगदारी के लिए लोगों को धमकाता था। उसके कई ऑडियो भी वायरल हुए, मगर जेल प्रशासन ने जांच की बात कह आवाज दबा दिया। 26 दिसंबर को लखनऊ के रीयल एस्टेट कारोबारी मोहित जायसवाल को अपहरण कर जेल के अंदर लाने और करोड़ों की संपत्ति जबरन अपने नाम कराने के मामले में भी ऐसे ही उदासीनता बरती गई।
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अतीक के सरपरस्त बने अफसर खुद तो चुप्पी साधे रहे ही, उच्चाधिकारियों को सूचित करने की भी जहमत नहीं उठाई। तीन दिन बाद जब खुद मोहित ने केस दर्ज कराया तब वह हरकत में आए। आनन-फानन में सीसीटीवी कैमरे की फुटेज समेत अन्य साक्ष्य मिटाने की कोशिश हुई। अब सीबीआई जांच में जेल में हुई मनमानी के सारे किस्सों से पर्दा हटेगा। वह चेहरे भी बेनकाब होंगे, जो अतीक का हित पूरा करने के लिए नतमस्तक रहते थे।
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