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कृषि मंत्री के जिले में ही नहरें सूखीं
Updated Sat, 02 Jun 2018 11:48 PM IST
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सफाई न होने से गौर रजवाहा में अभी भी झाड़ियां बनी हुई हैं।
- फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। जिन नहरों में इस वक्त पानी होना चाहिए, उनमें घास-फूस और झाड़ियां उगी हैं। धान की नर्सरी डालने का समय आ चुका है, मगर नहरें सूखी हैं और खेत पानी के लिए तरस रहे हैं। किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है, जबकि विभाग बेफिक्र बना है। यह हाल तब है जबकि प्रदेश के कृषि मंत्री इसी जिले के रहने वाले हैं।
धान की नर्सरी डालने के लिए 15 मई से 10 जून तक का समय उपयुक्त होता है। इसके बाद मानसून की आवक के साथ रोपाई शुरू हो जाती है। गेहूं की कटाई के बाद खाली खेतों में नर्सरी डालने के लिए पानी की जरूरत है, मगर नहरें ही प्यासी हैं। बदहाली का आलम यह है कि नहरों की साफ-सफाई अब तक शुरू नहीं हो पाई है। हाटा, गौर रजवाहा और उदयपुरा माइनर में धूल उड़ रही है। हाटा रजवाहा में कई वर्षों से पानी नहीं आने से किसानों को पंपिंगसेट से सिंचाई करनी पड़ती है। नहरें बेमतलब साबित हो रही हैं। नहरों को देख ऐसा लगता है कि इनमें सालों से पानी आया ही नहीं।
हाटा रजवाहा से बरियारपुर, खजूरिया जेठवसी, बेलवनिया, आमघाट, बेलवा, बैकुंठपुर आदि गांवों की सिंचाई होती है। वर्षाें से टेल के इन गांवों तक पानी नहीं पहुंच पाता। गौर रजवाहा से पकड़ी, भैसा डाबर, पिपरा, चकिया, गौरकोठी, मुंडेरा, पचरुखिया, बघडा, लाला मुजहना, भुजौली, रामपुर अवस्थी, रामनगर, गुद्दीजोर, लगड़ा आदि गांवों के किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें गहराती जा रही हैं। कमोवेश ऐसा ही हाल उदयपुरा माइनर का भी है। इस नहर के किनारे स्थित चमनपुरा, उदयपुरा, दलान, रमनछपरा, नोतन, सिसवा बरेठा, सरोरा, धूमनगर आदि गांवों के किसानों को नहरें निराश कर रही हैं।
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नहरों की सफाई और मरम्मत के लिए प्रस्ताव भेजा गया था मगर शासन स्तर से उसे खारिज कर दिया गया। यहां की नहरों में नेपाल से बिहार होते हुए पानी आता है। नहर में पानी छोड़ने के लिए पिछले एक माह से मांग की जा रही है, मगर बिहार में मरम्मत कार्य के चलते विलंब हो रहा है। पांच जून तक पानी आने की संभावना है।
-पंकज सिंह, एक्सईएन, सिंचाई खंड द्वितीय।
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धान की नर्सरी डालने के लिए 15 मई से 10 जून तक का समय उपयुक्त होता है। इसके बाद मानसून की आवक के साथ रोपाई शुरू हो जाती है। गेहूं की कटाई के बाद खाली खेतों में नर्सरी डालने के लिए पानी की जरूरत है, मगर नहरें ही प्यासी हैं। बदहाली का आलम यह है कि नहरों की साफ-सफाई अब तक शुरू नहीं हो पाई है। हाटा, गौर रजवाहा और उदयपुरा माइनर में धूल उड़ रही है। हाटा रजवाहा में कई वर्षों से पानी नहीं आने से किसानों को पंपिंगसेट से सिंचाई करनी पड़ती है। नहरें बेमतलब साबित हो रही हैं। नहरों को देख ऐसा लगता है कि इनमें सालों से पानी आया ही नहीं।
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हाटा रजवाहा से बरियारपुर, खजूरिया जेठवसी, बेलवनिया, आमघाट, बेलवा, बैकुंठपुर आदि गांवों की सिंचाई होती है। वर्षाें से टेल के इन गांवों तक पानी नहीं पहुंच पाता। गौर रजवाहा से पकड़ी, भैसा डाबर, पिपरा, चकिया, गौरकोठी, मुंडेरा, पचरुखिया, बघडा, लाला मुजहना, भुजौली, रामपुर अवस्थी, रामनगर, गुद्दीजोर, लगड़ा आदि गांवों के किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें गहराती जा रही हैं। कमोवेश ऐसा ही हाल उदयपुरा माइनर का भी है। इस नहर के किनारे स्थित चमनपुरा, उदयपुरा, दलान, रमनछपरा, नोतन, सिसवा बरेठा, सरोरा, धूमनगर आदि गांवों के किसानों को नहरें निराश कर रही हैं।
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नहरों की सफाई और मरम्मत के लिए प्रस्ताव भेजा गया था मगर शासन स्तर से उसे खारिज कर दिया गया। यहां की नहरों में नेपाल से बिहार होते हुए पानी आता है। नहर में पानी छोड़ने के लिए पिछले एक माह से मांग की जा रही है, मगर बिहार में मरम्मत कार्य के चलते विलंब हो रहा है। पांच जून तक पानी आने की संभावना है।
-पंकज सिंह, एक्सईएन, सिंचाई खंड द्वितीय।