आ रहा देश का सबसे बड़ा आईपीओ: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज को मिली सेबी की हरी झंडी, जानें कितने शेयरों की होगी बिक्री
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) को बाजार नियामक सेबी से आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) लाने की मंजूरी मिल गई है। यह भारतीय पूंजी बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
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नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) को अपने बहुप्रतीक्षित आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) के लिए बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) की मंजूरी मिल गई है। यह आईपीओ करीब 30,000 करोड़ रुपये का होने का अनुमान है। इस मंजूरी से भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में सबसे बड़े सार्वजनिक निर्गमों में से एक का रास्ता साफ हो गया है। सेबी ने 4 सितंबर को एनएसई को आईपीओ के लिए मंजूरी दी है।
क्या देश का सबसे बड़ा आईपीओ बनने जा रहा है एनएसई?
हां, करीब ₹30,000 करोड़ के अनुमानित आकार के साथ यह भारत का सबसे बड़ा आईपीओ बनने की राह पर अग्रसर है। यह हुंडई मोटर इंडिया के साल 2024 के ₹27,858.75 करोड़ के आईपीओ और एलआईसी के साल 2022 के ₹20,557.23 करोड़ के आईपीओ को भी पीछे छोड़ देगा। हालांकि, भविष्य में जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड का अनुमानित ₹37,700 करोड़ का आईपीओ इसे टक्कर दे सकता है, लेकिन उसकी समय-सीमा अभी तय नहीं है। इस लिस्टिंग के बाद एनएसई देश की शीर्ष 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल हो जाएगा, जिसका अनुमानित बाजार पूंजीकरण पांच लाख करोड़ रुपये से अधिक आंका गया है।
एनएसई ने जून में प्रस्तावित सार्वजनिक निर्गम के लिए अपने मसौदा दस्तावेज नियामक के पास दाखिल किए थे। सेबी से मंजूरी प्राप्त करना आईपीओ प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके बाद कंपनी लागू नियामक आवश्यकताओं के अधीन सार्वजनिक निर्गम के लिए आगे की तैयारी कर सकती है। यह मंजूरी एनएसई के लिए एक बड़ा कदम है।
एनएसई की लिस्टिंग योजनाएं लगभग एक दशक से नियामकीय बाधाओं के कारण रुकी हुई थीं। इन बाधाओं में को-लोकेशन विवाद भी शामिल था। एनएसई का प्रस्तावित सार्वजनिक निर्गम पूरी तरह से बिक्री प्रस्ताव (ओएफएस) होगा। इसमें 14.89 करोड़ शेयरों की पेशकश की जाएगी। ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) के अनुसार, मौजूदा शेयरधारक एक्सचेंज की लगभग छह फीसदी हिस्सेदारी बेचेंगे।
इस आईपीओ में कौन से बड़े शेयरधारक अपना हिस्सा बेच रहे हैं?
यह आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) के रूप में आ रहा है, जिसके तहत कुल 14.89 करोड़ शेयर बेचे जाएंगे। चूंकि यह पूरी तरह ओएफएस है, इसलिए आईपीओ से मिलने वाली पूरी राशि बेचने वाले मौजूदा शेयरधारकों को मिलेगी, न कि एक्सचेंज को। ड्राफ्ट पेपर्स (DRHP) के अनुसार, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) अपनी 3.23% हिस्सेदारी में से 2.48 करोड़ शेयर बेचेगा, जबकि एमएस स्ट्रेटेजिक (मॉरीशस) लिमिटेड 1.60 करोड़ शेयरों की बिकवाली करेगी। दिलचस्प बात यह है कि एलआईसी, जो एनएसई की सबसे बड़ी शेयरधारक (10.72% हिस्सेदारी) है, इस आईपीओ में अपना एक भी शेयर नहीं बेच रही है।
एनएसई की वित्तीय सेहत और वर्तमान स्थिति क्या कहती है?
एनएसई भारत के इक्विटी डेरिवेटिव बाजार पर एकछत्र राज करता है और दुनिया का सबसे सक्रिय एक्सचेंज है। वित्तीय मोर्चे पर, एक्सचेंज का शुद्ध लाभ (PAT) वित्त वर्ष 2025-26 में 15% गिरकर ₹10,302 करोड़ रहा। हालांकि, चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में शानदार वापसी करते हुए एनएसई का शुद्ध लाभ 7% बढ़कर ₹3,120 करोड़ और कुल आय 9% बढ़कर ₹5,252 करोड़ रुपये दर्ज की गई है। लगभग 1.8 लाख शेयरधारकों वाले इस एक्सचेंज के आईपीओ का बाजार को बेसब्री से इंतजार है।
कितना बड़ा होगा यह आईपीओ?
मामले से परिचित लोगों के अनुसार, इस आईपीओ का आकार करीब 30,000 करोड़ रुपये हो सकता है। यह अनुमानित आकार एनएसई के बाजार पूंजीकरण को 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक दर्शाता है। यह लंबे समय से प्रतीक्षित सार्वजनिक पेशकश एक नया रिकॉर्ड बनाएगी। यह अक्तूबर 2024 में लॉन्च हुए हुंडई मोटर्स इंडिया के पिछले रिकॉर्ड को पार कर जाएगी। हुंडई मोटर इंडिया का निर्गम 27,870 करोड़ रुपये का था।
आईपीओ की संभावित तारीखें और प्राइस बैंड क्या होंगे?
सूत्रों के अनुसार, यह महा-आईपीओ 15 सितंबर को लॉन्च हो सकता है, जबकि एक्सचेंज पर इसकी लिस्टिंग 24-25 सितंबर को लक्षित की गई है। कंपनी की योजना पितृपक्ष (जो 26 सितंबर से शुरू हो रहा है) से पहले लिस्टिंग प्रक्रिया को पूरा करने की है। आईपीओ का प्राइस बैंड आगामी 11 सितंबर के आसपास घोषित होने की उम्मीद है। बाजार के बैंकरों का अनुमान है कि शेयरों की कीमत ₹2,000 प्रति शेयर के आसपास रखी जा सकती है, जो अनलिस्टेड ग्रे मार्केट में चल रहे मौजूदा भाव के अनुरूप है। इस आईपीओ का प्रबंधन करने के लिए कुल 20 मर्चेंट बैंकरों की नियुक्ति की गई है।
लगभग 10 साल तक क्यों अटका रहा एनएसई का लिस्टिंग प्लान?
एनएसई का लिस्टिंग का सपना साल 2016 से अटका हुआ था। इसका मुख्य कारण कुख्यात 'को-लोकेशन विवाद' और 'डार्क-फाइबर' मामला था, जिसमें कुछ चुनिंदा ब्रोकरों को एक्सचेंज के सिस्टम तक तेज और तरजीही पहुंच देने के आरोप लगे थे। इस हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने सेबी द्वारा दायर की गई अपीलों को खारिज कर दिया, जिससे एनएसई की राह पूरी तरह साफ हो गई। इससे पहले जुलाई में, एनएसई ने सेबी के साथ इस विवाद को सुलझाने के लिए ₹1,491.21 करोड़ की संचयी समझौता राशि का भुगतान पूरा किया था, जिसमें 714.74 करोड़ रुपये का अंतिम भुगतान शामिल था।
एनएसई के लिए यह मंजूरी क्यों महत्वपूर्ण है?
एनएसई के लिए यह मंजूरी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। एक्सचेंज की लिस्टिंग योजनाएं लगभग दस साल से अटकी थीं। को-लोकेशन विवाद जैसी नियामक चुनौतियां इसकी एक बड़ी वजह थीं। सेबी की हरी झंडी मिलने से अब एनएसई को बाजार में सूचीबद्ध होने का मौका मिलेगा। यह भारतीय पूंजी बाजार के लिए भी एक सकारात्मक संकेत है। यह पारदर्शिता और निवेशकों के विश्वास को बढ़ाएगा।
