{"_id":"6a9acf92e86bdbe79e081f35","slug":"nepal-flood-death-toll-1295-tunnel-rescue-after-9-days-updates-2026-09-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"मौतों का आंकड़ा 1,295 पहुंचा: बाढ़ के बाद सैकड़ों बच्चे लापता, अब कैसा है नेपाल का हाल?","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
मौतों का आंकड़ा 1,295 पहुंचा: बाढ़ के बाद सैकड़ों बच्चे लापता, अब कैसा है नेपाल का हाल?
Fri, 04 Sep 2026 07:32 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, काठमांडो।
पीटीआई, काठमांडो।
Published by: राकेश कुमार
Updated Fri, 04 Sep 2026 07:32 PM IST
सार
नेपाल में बाढ़ से मौतों का आंकड़ा 1,295 पहुंच गया है और करीब 5,000 लोग लापता हैं। इसी बीच त्रिशूली-3ए परियोजना की सुरंग से नौ दिन बाद दो मजदूर जिंदा बचाए गए। रसुवा और नुवाकोट में करीब 600 बच्चों का भी अब तक पता नहीं चला है। भारत ने राहत सामग्री भेजी है, जबकि नेपाल सरकार ने प्रभावित कारोबारों के लिए राहत पैकेज घोषित किया है।
विज्ञापन
लापता लोगों की तलाश में जुटी सेना
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
नेपाल में 26 अगस्त को आई अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के खिसकने से यह बाढ़ आई थी। उत्तरी और मध्य नेपाल के कई गांव और कस्बे इसकी चपेट में आए। शुक्रवार तक मौतों का आंकड़ा 1,295 पहुंच गया। करीब 5,000 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
नौ दिन बाद सुरंग से कौन जिंदा निकला?
बाढ़ में कितने बच्चों और शिक्षकों का पता नहीं?
भारत ने नेपाल के राहत अभियान में क्या मदद दी?
भारत से राहत सामग्री लेकर छठी और सातवीं उड़ान गुरुवार रात काठमांडो पहुंची। दोनों C-130J विमानों से कुल 21.5 टन राहत सामग्री भेजी गई। इसमें फॉरेंसिक किट और चिकित्सा सामग्री भी शामिल थी।
प्रभावित कारोबार और उजड़े इलाकों के लिए क्या राहत मिलेगी?
नेपाल सरकार ने बाढ़ प्रभावित कारोबारों के लिए विशेष राहत पैकेज घोषित किया है। इसमें करों में रियायत, कर्ज के पुनर्गठन और सस्ता कर्ज उपलब्ध कराने जैसे कदम शामिल हैं। नष्ट हुए कारोबारों के लिए कुछ सामान बिना सीमा शुल्क के आयात करने की अनुमति होगी।
बीमा प्राधिकरण से दावों का निपटारा तेज करने को कहा गया है। शुरुआती आकलन के आधार पर बीमा कंपनियां अनुमानित नुकसान की 50 फीसदी तक अग्रिम राशि दे सकेंगी। सरकार उन बस्तियों को दूसरी जगह बसाने की भी तैयारी कर रही है, जिनके घर और पूरे इलाके बाढ़ में बह गए।
विज्ञापन
- नेपाल पुलिस के मुताबिक ,आठ जिलों से अब तक 1,293 शव बरामद किए गए हैं। चितवन में 359, नवलपरासी ईस्ट में 221 और नवलपरासी वेस्ट में 212 शव मिले हैं।
- नुवाकोट में 186, रसुवा में 140, गोरखा में 72, धादिंग में 65 और तनाहुन में 38 शव बरामद हुए हैं। शुक्रवार को काठमांडू के दो अस्पतालों में दो और लोगों की मौत हुई।
विज्ञापन
विज्ञापन
नौ दिन बाद सुरंग से कौन जिंदा निकला?
- त्रिशूली-3ए जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे दो मजदूरों को नौ दिन बाद जिंदा बाहर निकाला गया। उनकी पहचान 45 वर्षीय मैकेनिकल सुपरवाइजर कबीर महारजन और 30 वर्षीय फोरमैन संजय साह के रूप में हुई है।
- कबीर महारजन को नेपाल आर्मी अस्पताल, छाउनी, काठमांडो ले जाया गया। उनकी हालत गंभीर बताई गई है। संजय साह का इलाज नुवाकोट के त्रिशूली अस्पताल में चल रहा है।
बाढ़ में कितने बच्चों और शिक्षकों का पता नहीं?
- रसुवा और नुवाकोट जिलों में करीब 600 बच्चे अब भी लापता हैं। रसुवा में करीब 280 और नुवाकोट में 300 से 350 बच्चों का पता नहीं चल पाया है। स्थानीय शिक्षा अधिकारियों के मुताबिक,आंकड़े जुटाने और उनकी पुष्टि का काम जारी है।
- अकेले नुवाकोट की बिदुर नगरपालिका में करीब 250 बच्चे लापता हैं। यहां 170 शिक्षण संस्थान हैं, जिनमें 142 सामुदायिक और 28 निजी स्कूल हैं।
- दोनों जिलों में 22 शिक्षक और स्कूल कर्मचारी भी लापता हैं। रसुवा में 16 और नुवाकोट में छह शिक्षक लापता बताए गए हैं। बाढ़ से 22 स्कूल प्रभावित हुए हैं, जबकि 12 पूरी तरह नष्ट हो गए।
भारत ने नेपाल के राहत अभियान में क्या मदद दी?
भारत से राहत सामग्री लेकर छठी और सातवीं उड़ान गुरुवार रात काठमांडो पहुंची। दोनों C-130J विमानों से कुल 21.5 टन राहत सामग्री भेजी गई। इसमें फॉरेंसिक किट और चिकित्सा सामग्री भी शामिल थी।
प्रभावित कारोबार और उजड़े इलाकों के लिए क्या राहत मिलेगी?
नेपाल सरकार ने बाढ़ प्रभावित कारोबारों के लिए विशेष राहत पैकेज घोषित किया है। इसमें करों में रियायत, कर्ज के पुनर्गठन और सस्ता कर्ज उपलब्ध कराने जैसे कदम शामिल हैं। नष्ट हुए कारोबारों के लिए कुछ सामान बिना सीमा शुल्क के आयात करने की अनुमति होगी।
बीमा प्राधिकरण से दावों का निपटारा तेज करने को कहा गया है। शुरुआती आकलन के आधार पर बीमा कंपनियां अनुमानित नुकसान की 50 फीसदी तक अग्रिम राशि दे सकेंगी। सरकार उन बस्तियों को दूसरी जगह बसाने की भी तैयारी कर रही है, जिनके घर और पूरे इलाके बाढ़ में बह गए।