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यूपी के सभी जिले घोषित हों सूखा ग्रस्त
Updated Wed, 04 Oct 2017 10:27 PM IST
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देवरिया। किसान मुक्ति यात्रा रात्रि विश्राम के बाद बुधवार की सुबह अगले पड़ाव के लिए रवाना हो गई। नेतृत्व स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव कर रहे थे। योगेंद्र ने कहा कि यूपी के सभी जिलों में औसत से कम बारिश हुई है। इसलिए यहां के सभी जिलों को सूखा ग्रस्त घोषित कर देना चाहिए। बिहार के चंपारन से तीसरे दौर की शुरू हुई किसान मुक्ति यात्रा यहां मंगलवार की रात पहुंची। बलिया के बेल्थरा रोड से यह यात्रा दो हिस्सों में बंट गई। एक का नेतृत्व योगेंद्र कर रहे थे तो दूसरे का किसान नेता बीएम सिंह। बीएम सिंह की टोली बेल्थरा रोड होते हुए गाजीपुर रवाना हो गई। जबकि योगेंद्र वाली टीम बुधवार की सुबह आठ बजे गोरखपुर रवाना हुई। इससे पहले योगेंद्र ने बातचीत में मोदी सरकार पर तंज कसे। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी सूखा के मुद्दे को जोरशोर से उठा रहे थे, लेकिन सत्ता में आते ही चुनावी वादा भूल गए। उन्होंने कहा कि देश के किसान तीन संकट से जूझ रहे हैं। आपदा से किसान बर्बाद हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों रुद्रपुर तहसील में बाढ़ ने काफी तबाही मचाई। किसान कर्ज में डूब रहे हैं। किसान मुक्ति यात्रा में जय किसान आंदोलन के राष्ट्रीय संयोजक अविक साहा, डॉ. सोमनाथ त्रिपाठी, अर्चना श्रीवास्तव, बीआर शास्त्री आदि शामिल थे।
ऐसे तो पूरा नहीं हो पाएगा हरित क्रांति का सपना
किसान मुक्ति यात्रा में शामिल डॉ. सोमनाथ त्रिपाठी ने कहा कि देश में हरित क्रांति का सपना देखा जाता है, लेकिन केंद्र और प्रदेश सरकार की नीतियां इसे पूरा नहीं होने दे रही हैं। उन्होंने कहा कि तीसरे चरण की यात्रा 11 अक्टूबर को गजरौला में समाप्त होगी। 20 नवंबर को दिल्ली में पूरे देश के किसान आएंगे। किसान मुक्ति संसद का आयोजन किया जाएगा। उसी दिन से संसद का शीतकालीन सत्र भी शुरू होगा। किसान अब चुप बैठने वाले नहीं हैं। अपना हक लेकर रहेंगे।
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ऐसे तो पूरा नहीं हो पाएगा हरित क्रांति का सपना
किसान मुक्ति यात्रा में शामिल डॉ. सोमनाथ त्रिपाठी ने कहा कि देश में हरित क्रांति का सपना देखा जाता है, लेकिन केंद्र और प्रदेश सरकार की नीतियां इसे पूरा नहीं होने दे रही हैं। उन्होंने कहा कि तीसरे चरण की यात्रा 11 अक्टूबर को गजरौला में समाप्त होगी। 20 नवंबर को दिल्ली में पूरे देश के किसान आएंगे। किसान मुक्ति संसद का आयोजन किया जाएगा। उसी दिन से संसद का शीतकालीन सत्र भी शुरू होगा। किसान अब चुप बैठने वाले नहीं हैं। अपना हक लेकर रहेंगे।
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