{"_id":"5ba3d1e3867a5537ba405d95","slug":"61537462755-deoria-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोर्ट ने खारिज की गिरिजा-कंचन की जमानत अर्जी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोर्ट ने खारिज की गिरिजा-कंचन की जमानत अर्जी
Updated Thu, 20 Sep 2018 10:29 PM IST
विज्ञापन
Deoria Shelter Home
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देवरिया। बालिका गृह कांड में मुख्य आरोपी गिरिजा व अधीक्षिका कंचनलता त्रिपाठी की जमानत गुरुवार को खारिज हो गई। सुनवाई के बाद देर शाम सीजेएम कोर्ट ने यह फैसला सुनाया। पिछले 15 दिनों से लंबित जमानत अर्जी पर सुनवाई को लेकर कोर्ट में दिनभर गहमागहमी की स्थिति रही। एसआईटी के सदस्य घंटों कोर्ट में जमे रहे। मोहन त्रिपाठी की जमानत अर्जी पर सुनवाई 21 को होगी।
गिरिजा त्रिपाठी, पति मोहन त्रिपाठी और बेटी कंचनलता पिछले डेढ़ माह से जिला जेल में बंद हैं। बीते चार सितंबर को उन्होंने जमानत के लिए कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था, जहां से मोहन की अपील को पाक्सो कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया। सीजेएम कोर्ट में गिरिजा व कंचनलता की अपील पर सुनवाई होनी थी। अधिवक्ताओं की हड़ताल से जमानत पर सुनवाई लगातार टलती जा रही थी। गुरुवार को सुनवाई के दौरान एसआईटी की ओर से जमानत खारिज करने के लिए कई तथ्य रखे गए। उनके अधिवक्ता ने कहा कि गिरिजा और कंचनलता का अपराध सामान्य नहीं है। दोनों ने शासन के निर्देशों की अवहेलना कर संस्था का संचालन जारी रखा। उच्चाधिकारियों केे आदेश पर संस्था बंद कराने पहुंचे अफसरों से अभद्रता करते हुए धमकी भी दी थी। वह प्रभावशाली महिलाएं हैं, उनके जेल से बाहर आने पर गवाहों-साक्ष्यों के प्रभावित होने का अंदेशा है। एसआईटी ने उनके विपक्ष में ठोस साक्ष्य होने की भी दलील दी। सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया। शाम पांच बजे के बाद जमानत अर्जी खारिज होने का आदेश दिया। इस दौरान पूरे दिन एसआईटी सदस्य कोर्ट परिसर में जमे रहे। मोहन त्रिपाठी की जमानत अर्जी पर सुनवाई के लिए पूर्व से ही 21 सितंबर की तिथि निर्धारित की गई है।
महिला सिपाहियों से एसआईटी ने की पूछताछ
एसआईटी के सवालों पर पसीना-पसीना हुईं महिला सिपाही
कुछ अन्य लोगों को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया था
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। एसआईटी ने बृहस्पतिवार को बाल गृह बालिका में छापेमारी करने वाली महिला सिपाहियों से पूछताछ की। एसआईटी के सवालों पर महिला सिपाही पसीना-पसीना हो गईं। बाहर निकलने के बाद वे कहने लगीं कि इनसे भगवान बचाएं। वहीं, इस संस्था में कार्य कर चुके तीन और लोगों से एसआईटी ने पूछताछ की है।
विज्ञापन
पांच अगस्त की रात को स्टेशन रोड स्थित बाल गृह बालिका में पुलिस ने छापेमारी की। वहां से 23 बच्चों को मुक्त कराया गया था। मां विंध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं सेवा संस्थान की अध्यक्ष और बालगृह बालिका की संचालिका गिरिजा त्रिपाठी, उनके पति मोहन त्रिपाठी को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने पति-पत्नी और बालगृह बालिका की संचालिका कंचनलता त्रिपाठी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया। तीनों जिला जेल में बंद हैं। मामले की जांच करने 10 अगस्त को एसआईटी आई। तभी से एसआईटी इस मामले की जांच में लगी है। बृहस्पतिवार को एसआईटी ने बालिका गृह पर छापेमारी करने गई महिला सिपाहियों को पूछताछ के लिए बुलाया था। एसआईटी के सवालों पर महिला कर्मचारी उलझ गईं थीं। उनको पसीना आ गया। एक घंटा से अधिक समय तक वे एसआईटी के सवालों पर जूझती रहीं। जैसे ही वे बाहर निकलीं, पसीना पोछते हुए बोलीं कि भगवान इन लोगों से बचाए। उच्चाधिकारियों के आदेश पर छापेमारी करने गए थे, हम लोगों की इसमें कोई गलती नहीं है। इसके अलावा एसआईटी ने गिरिजा त्रिपाठी की संस्था में काम करने वाले दो लिपिकों से भी पूछताछ की। सलेमपुर इलाके की रहने वाली एक महिला कर्मचारी से भी पूछताछ कर जानकारी ली गई। इन सभी से संस्था में होने वाले क्रियाकलापों की जानकारी ली गई है।
विज्ञापन
गिरिजा त्रिपाठी, पति मोहन त्रिपाठी और बेटी कंचनलता पिछले डेढ़ माह से जिला जेल में बंद हैं। बीते चार सितंबर को उन्होंने जमानत के लिए कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था, जहां से मोहन की अपील को पाक्सो कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया। सीजेएम कोर्ट में गिरिजा व कंचनलता की अपील पर सुनवाई होनी थी। अधिवक्ताओं की हड़ताल से जमानत पर सुनवाई लगातार टलती जा रही थी। गुरुवार को सुनवाई के दौरान एसआईटी की ओर से जमानत खारिज करने के लिए कई तथ्य रखे गए। उनके अधिवक्ता ने कहा कि गिरिजा और कंचनलता का अपराध सामान्य नहीं है। दोनों ने शासन के निर्देशों की अवहेलना कर संस्था का संचालन जारी रखा। उच्चाधिकारियों केे आदेश पर संस्था बंद कराने पहुंचे अफसरों से अभद्रता करते हुए धमकी भी दी थी। वह प्रभावशाली महिलाएं हैं, उनके जेल से बाहर आने पर गवाहों-साक्ष्यों के प्रभावित होने का अंदेशा है। एसआईटी ने उनके विपक्ष में ठोस साक्ष्य होने की भी दलील दी। सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया। शाम पांच बजे के बाद जमानत अर्जी खारिज होने का आदेश दिया। इस दौरान पूरे दिन एसआईटी सदस्य कोर्ट परिसर में जमे रहे। मोहन त्रिपाठी की जमानत अर्जी पर सुनवाई के लिए पूर्व से ही 21 सितंबर की तिथि निर्धारित की गई है।
विज्ञापन
महिला सिपाहियों से एसआईटी ने की पूछताछ
एसआईटी के सवालों पर पसीना-पसीना हुईं महिला सिपाही
कुछ अन्य लोगों को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया था
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। एसआईटी ने बृहस्पतिवार को बाल गृह बालिका में छापेमारी करने वाली महिला सिपाहियों से पूछताछ की। एसआईटी के सवालों पर महिला सिपाही पसीना-पसीना हो गईं। बाहर निकलने के बाद वे कहने लगीं कि इनसे भगवान बचाएं। वहीं, इस संस्था में कार्य कर चुके तीन और लोगों से एसआईटी ने पूछताछ की है।
विज्ञापन
पांच अगस्त की रात को स्टेशन रोड स्थित बाल गृह बालिका में पुलिस ने छापेमारी की। वहां से 23 बच्चों को मुक्त कराया गया था। मां विंध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं सेवा संस्थान की अध्यक्ष और बालगृह बालिका की संचालिका गिरिजा त्रिपाठी, उनके पति मोहन त्रिपाठी को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने पति-पत्नी और बालगृह बालिका की संचालिका कंचनलता त्रिपाठी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया। तीनों जिला जेल में बंद हैं। मामले की जांच करने 10 अगस्त को एसआईटी आई। तभी से एसआईटी इस मामले की जांच में लगी है। बृहस्पतिवार को एसआईटी ने बालिका गृह पर छापेमारी करने गई महिला सिपाहियों को पूछताछ के लिए बुलाया था। एसआईटी के सवालों पर महिला कर्मचारी उलझ गईं थीं। उनको पसीना आ गया। एक घंटा से अधिक समय तक वे एसआईटी के सवालों पर जूझती रहीं। जैसे ही वे बाहर निकलीं, पसीना पोछते हुए बोलीं कि भगवान इन लोगों से बचाए। उच्चाधिकारियों के आदेश पर छापेमारी करने गए थे, हम लोगों की इसमें कोई गलती नहीं है। इसके अलावा एसआईटी ने गिरिजा त्रिपाठी की संस्था में काम करने वाले दो लिपिकों से भी पूछताछ की। सलेमपुर इलाके की रहने वाली एक महिला कर्मचारी से भी पूछताछ कर जानकारी ली गई। इन सभी से संस्था में होने वाले क्रियाकलापों की जानकारी ली गई है।