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Deoria News: दोस्त की मौत के 24 घंटे बाद सहपाठी की भी मौत, सदमे की आशंका
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बुधवार रात कक्षा पांच में पढ़ने वाला जयपाल पेशाब करने के लिए उठा और अचानक गिर गया, फिर नहीं उठा
एक दिन पहले ही जल निगम के खोदे गए गड्ढे में डूबने से हो गई थी कक्षा चार में पढ़ने वाले करन पाल की मौत
5 जुलाई का पीडीएफ लगाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
मईल/देवरिया। नरियाव गांव में जल निगम के खोदे गए गड्ढे में डूबने से बच्चे की मौत के 24 घंटे बाद बुधवार रात उसके दोस्त की भी मौत हो गई। बच्चाअचानक गिरा और फिर नहीं उठा। परिजनों का कहना है कि दोनों एक ही स्कूल में पढ़ते थे और जिगरी दोस्त थे। अपने दोस्त की मौत से वह सदमे में आ गया था।
वहीं, डॉक्टर का कहना है कि अगर कोई बच्चा सदमा और तनाव में आ जाता है, तो कभी-कभी उसका हृदय काम करना बंद कर देता है और मौत हो जाती है। मां-बाप के इकलौते दो बच्चों की मौत के बाद से गांव में शोक की लहर है।
बता दें कि भागलपुर ब्लॉक के नरियांव गांव के पाल टोला निवासी 12 वर्षीय करन पाल की मंगलवार की शाम को जल निगम के खोदे गड्ढे में डूबने से मौत हो गई थी। परिजनों के अनुसार उसके साथ खेलने गए उसका साथी जय नारायण उर्फ रकटु पाल 12 उसी समय से सदमे में आ गया था। बुधवार की रात जय पेशाब करने के लिए उठा और अचानक गिर गया, जिससे उसकी मौत हो गई। परिजन उसे इलाज के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भागलपुर ले गए, जहां डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया।
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रकटु पाल भी अपने मां बाप का इकलौता चिराग था। गांव के प्राथमिक विद्यालय में कक्षा पांच में पढ़ता था। जबकि गड्ढे में डूबने से मरा करन इसी स्कूल के कक्षा चार का छात्र था। दो बच्चों की मौत से पूरे पाल टोला में मातम छा गया है। रकटु की मां जलेबी देवी व बहन संध्या का रो-रो कर बुरा हाल है। पिता गोधन पाल बाहर रहकर मजदूरी करते हैं।
पीएचसी प्रभारी डॉ. रंजीत कुशवाहा ने बताया कि बालक मृत अवस्था में लाया गया था। परिजन सदमे की बात बता रहे थे। हमने पोस्टमार्टम के लिए कहा, लेकिन वह तैयार नहीं हुए। बालक की मौत सदमे से होने की आशंका जताई जा रही है।
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बालक को भी सदमा लग सकता है। अगर कोई डांट दे या कोई अन्य बात हो जाए तो वह सदमे में आ जाता है। इस कारण अचानक हृदय काम करना बंद कर देता है। तनाव से ब्रेन की नसें भी फट सकती हैं। कुछ साल पहले की बात है, एक डॉक्टर थे उनका बेटा पढ़कर घर आया। अचानक गिरा और मौत हो गई। एमआरआई में पता चला कि ब्रेन की नसें फट गईं थीं, जिससे उसकी मौत हो गई थी। नरियांव में भी जिस बच्चे की मौत हुई है, हो सकता है कि वह सदमे में आ गया हो।
-डॉ. एचके मिश्रा सीएमएस
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बाल्यावस्था में सदमा लग सकता है। बच्चे मासूम होते हैं। इस कारण जैविक प्रक्रिया भी अंदर से प्रभावित होती है। अगर किसी बालक का दोस्त मरा है, तो उसे सदमा लग सकता है। इस तरह के मामलों में अभिभावक को ध्यान देना चाहिए। उनको अपने पास रखना चाहिए और बात करनी चाहिए ताकि उनके दिमाग से तनाव निकल जाए। तनाव होने से अनहोनी घटना हो सकती है।
- प्रो. नाजिश बानो, विभागाध्यक्ष मनोविज्ञान
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साथी की असमय मौत से दूसरा बालक अचानक डिप्रेशन की स्थिति में आ गया होगा। ऐसे में उसे यह घटना बार-बार याद आ रही होगी। यह उसके लिए तनावपूर्ण स्थिति रही होगी। शायद वह अपने दोस्त की मौत को दिल और दिमाग से स्वीकार नहीं कर पा रहा होगा। यही वजह है कि वह तनाव में आ गया होगा। अधिक संवेदनशील लोगों में इस तरह की परेशानी हो जाती है। बच्चा अपने दोस्त को लेकर बेहद संवेदनशील रहा होगा। उसकी मौत के बाद वह निराश हो गया होगा।
- डॉ. विवेक मिश्र, समाजशास्त्री
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एक दिन पहले ही जल निगम के खोदे गए गड्ढे में डूबने से हो गई थी कक्षा चार में पढ़ने वाले करन पाल की मौत
5 जुलाई का पीडीएफ लगाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
मईल/देवरिया। नरियाव गांव में जल निगम के खोदे गए गड्ढे में डूबने से बच्चे की मौत के 24 घंटे बाद बुधवार रात उसके दोस्त की भी मौत हो गई। बच्चाअचानक गिरा और फिर नहीं उठा। परिजनों का कहना है कि दोनों एक ही स्कूल में पढ़ते थे और जिगरी दोस्त थे। अपने दोस्त की मौत से वह सदमे में आ गया था।
वहीं, डॉक्टर का कहना है कि अगर कोई बच्चा सदमा और तनाव में आ जाता है, तो कभी-कभी उसका हृदय काम करना बंद कर देता है और मौत हो जाती है। मां-बाप के इकलौते दो बच्चों की मौत के बाद से गांव में शोक की लहर है।
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बता दें कि भागलपुर ब्लॉक के नरियांव गांव के पाल टोला निवासी 12 वर्षीय करन पाल की मंगलवार की शाम को जल निगम के खोदे गड्ढे में डूबने से मौत हो गई थी। परिजनों के अनुसार उसके साथ खेलने गए उसका साथी जय नारायण उर्फ रकटु पाल 12 उसी समय से सदमे में आ गया था। बुधवार की रात जय पेशाब करने के लिए उठा और अचानक गिर गया, जिससे उसकी मौत हो गई। परिजन उसे इलाज के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भागलपुर ले गए, जहां डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया।
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रकटु पाल भी अपने मां बाप का इकलौता चिराग था। गांव के प्राथमिक विद्यालय में कक्षा पांच में पढ़ता था। जबकि गड्ढे में डूबने से मरा करन इसी स्कूल के कक्षा चार का छात्र था। दो बच्चों की मौत से पूरे पाल टोला में मातम छा गया है। रकटु की मां जलेबी देवी व बहन संध्या का रो-रो कर बुरा हाल है। पिता गोधन पाल बाहर रहकर मजदूरी करते हैं।
पीएचसी प्रभारी डॉ. रंजीत कुशवाहा ने बताया कि बालक मृत अवस्था में लाया गया था। परिजन सदमे की बात बता रहे थे। हमने पोस्टमार्टम के लिए कहा, लेकिन वह तैयार नहीं हुए। बालक की मौत सदमे से होने की आशंका जताई जा रही है।
बालक को भी सदमा लग सकता है। अगर कोई डांट दे या कोई अन्य बात हो जाए तो वह सदमे में आ जाता है। इस कारण अचानक हृदय काम करना बंद कर देता है। तनाव से ब्रेन की नसें भी फट सकती हैं। कुछ साल पहले की बात है, एक डॉक्टर थे उनका बेटा पढ़कर घर आया। अचानक गिरा और मौत हो गई। एमआरआई में पता चला कि ब्रेन की नसें फट गईं थीं, जिससे उसकी मौत हो गई थी। नरियांव में भी जिस बच्चे की मौत हुई है, हो सकता है कि वह सदमे में आ गया हो।
-डॉ. एचके मिश्रा सीएमएस
बाल्यावस्था में सदमा लग सकता है। बच्चे मासूम होते हैं। इस कारण जैविक प्रक्रिया भी अंदर से प्रभावित होती है। अगर किसी बालक का दोस्त मरा है, तो उसे सदमा लग सकता है। इस तरह के मामलों में अभिभावक को ध्यान देना चाहिए। उनको अपने पास रखना चाहिए और बात करनी चाहिए ताकि उनके दिमाग से तनाव निकल जाए। तनाव होने से अनहोनी घटना हो सकती है।
- प्रो. नाजिश बानो, विभागाध्यक्ष मनोविज्ञान
साथी की असमय मौत से दूसरा बालक अचानक डिप्रेशन की स्थिति में आ गया होगा। ऐसे में उसे यह घटना बार-बार याद आ रही होगी। यह उसके लिए तनावपूर्ण स्थिति रही होगी। शायद वह अपने दोस्त की मौत को दिल और दिमाग से स्वीकार नहीं कर पा रहा होगा। यही वजह है कि वह तनाव में आ गया होगा। अधिक संवेदनशील लोगों में इस तरह की परेशानी हो जाती है। बच्चा अपने दोस्त को लेकर बेहद संवेदनशील रहा होगा। उसकी मौत के बाद वह निराश हो गया होगा।
- डॉ. विवेक मिश्र, समाजशास्त्री