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नो-केन में चल रही प्रतापपुर चीनी मिल
Updated Fri, 22 Dec 2017 11:00 PM IST
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प्रतापपुर चीनी मिल
- फोटो : अमर उजाला
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प्रतापपुर। जिले की इकलौती चीनी मिल गन्ने के अभाव में सुचारु रूप से नहीं चल पा रही है। इसकी वजह अफसर गन्ना का क्षेत्रफल घटना और अधिक दूरी पर गन्ना क्रय केंद्र होना बता रहे हैं।
प्रतापपुर में बजाज हिंदुस्थान की चीनी मिल है। 12 दिसंबर से गन्ने की पेराई शुरू हुआ है। एक दिन में 60 हजार क्विंटल गन्ना पेराई की क्षमता है। लेकिन इसके अनुसार मिल पर गन्ना नहीं पहुंच पा रहा है। दस दिनों में चीनी मिल दो लाख क्विंटल गन्ने की पेराई कदर 9200 क्विंटल चीनी का उत्पादन किया है। चीनी मिल अफसरों की माने तो जिले में गन्ना का क्षेत्रफल इस साल कम है। गौरीबाजार, पथरदेवा, गौरीबाजार इलाके में गन्ने की खेती हुई है और उधर ही गन्ना क्रय केंद्र खोला गया है। दूरी अधिक होने के कारण देर से गन्ना आ रहा है। इसलिए चीनी मिल नो-केन में चल रही है। इसके चलते दिक्कतें बढ़ रही है और मिल घंटों बंद रह रही है। इस बाबत जिला गन्ना अधिकारी खुशीराम ने बताया कि ट्रकों की कमी और गन्ना क्रय केंद्रों की दूरी अधिक होने के कारण यह परेशानी बढ़ी है। जहां पर चीनी मिल है। उस क्षेत्र में गन्ने की खेती कम हुई है।
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प्रतापपुर में बजाज हिंदुस्थान की चीनी मिल है। 12 दिसंबर से गन्ने की पेराई शुरू हुआ है। एक दिन में 60 हजार क्विंटल गन्ना पेराई की क्षमता है। लेकिन इसके अनुसार मिल पर गन्ना नहीं पहुंच पा रहा है। दस दिनों में चीनी मिल दो लाख क्विंटल गन्ने की पेराई कदर 9200 क्विंटल चीनी का उत्पादन किया है। चीनी मिल अफसरों की माने तो जिले में गन्ना का क्षेत्रफल इस साल कम है। गौरीबाजार, पथरदेवा, गौरीबाजार इलाके में गन्ने की खेती हुई है और उधर ही गन्ना क्रय केंद्र खोला गया है। दूरी अधिक होने के कारण देर से गन्ना आ रहा है। इसलिए चीनी मिल नो-केन में चल रही है। इसके चलते दिक्कतें बढ़ रही है और मिल घंटों बंद रह रही है। इस बाबत जिला गन्ना अधिकारी खुशीराम ने बताया कि ट्रकों की कमी और गन्ना क्रय केंद्रों की दूरी अधिक होने के कारण यह परेशानी बढ़ी है। जहां पर चीनी मिल है। उस क्षेत्र में गन्ने की खेती कम हुई है।
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