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बहादुरी का ढोल पीटती नाकाम पुलिस
चित्रकूट
Updated Sun, 18 Jun 2017 11:00 PM IST
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सुधीर अग्रवाल,
चित्रकूट। भले ही पुलिस व सफेदपोश डाकुओं के खिलाफ अभियान जोर शोर से चलवाने का दावा करते हों लेकिन जिले में एक माह के अंदर कड़वी सच्चाई सामने आई है कि डाकू बेखौफ दहशत फैला रहे हैं। पुलिस व डकैतों के बीच आंख मिचौली का खेल चल रहा है। और इसका लाभ सफेदपोश उठा रहे हैं। हकीकत यही है कि अभी तक इस खेल में तो डाकू गैंग पूरी तरह से आधुनिक अस्त्र शस्त्र से लैस पुलिस बल पर भारी पड़ता नजर आया है। डकैतों को संरक्षण देने वालों में पुलिस का तो खौफ है लेकिन बदस्तूर यह क्रम जारी है। सही मायने में नाकाम पुलिस बहादुरी का ढोल पीट रही है।
गौरतलब है कि डाकू बबुली कोल सहित गोप्पा व गौरी गैंग के खात्मे के लिए लगी पुलिस फोर्स की कई बार मुठभेड़ हुई है लेकिन हर बार डाकुआेें के आगे मुंह की खानी पड़ रही है। डाकू पुलिस पर भारी पड़ रहे हैं। पुलिस की सात टीमें कुख्यात व इनामी डाकुओं को पकड़ने के लिए बनाई गई है। इसके बावजूद गैंग के सक्रिय सदस्यों को पड़ने में कामयाबी नहीं मिल रही है। खासकर पांच लाख तीस हजार के इनामी डाकू बबुली कोल गैंग के खिलाफ जिस अंदाज में पुलिस ने एक्शन लिया है उससे डाकू गैंग बैकफुट में हैं। पुलिस की उपलब्धि यही है कि डकैत गैंग के कुछ सदस्यों व उनके परिचितों को जरूर पकड़कर जेल भेजा है। भरतकूप के पास राजा ठाकुर नामक डाकू ही मारा गया उसमें भी स्थानीय लोगों की जागरूकता थी। उसमें पुलिस का योगदान नहीं रहा। कई बार मुठभेड़ जरूर हो रहीं हैं लेकिन खोखे व कुछ खाद्य सामग्री के अलावा कुछ हासिल नहीं हो रहा।
23 मई के बाद से 17 जून के बीच पुलिस ने बबुली गैंग से तीन बार मुठभेड़ की लेकिन बड़ी सफलता का इंतजार लंबा ही होता जा रहा है। यह जरूर है कि इसका प्रभाव रसद व मदद पहुंचाने वालों पर पड़ा है। सफेदपोश से लेकर गांव के मददगारों पर पुलिस की निगाह तेज हुई है। गैंग के कुछ सदस्यों व खाद्य सामग्री पहुंचाने वालों को पुलिस जेल भेज कर दावा किया है कि डकैतों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसके बावजूद सफेदपोशों व डाकुओं को रसद-मदद पहुंचाने वालों का अपना काम भी चोरी छिपे जारी है। इसी का नतीजा है कि सशस्त्र पुलिस बल डाकुओं के बेहद करीब पहुंचने के बाद भी नाकाम होकर लौट आता है।
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परेशानी करती है पुलिस
चित्रकूट। पुलिस के कई दावे कागजी भी हैं और कई लोगों ने पुलिस पर ही डकैत बनाने का आरोप लगाया है। नागर गांव की प्रधान चुन्नीदेवी का कहना है कि उसका लड़का विनोद जिले के बाहर रहकर कमाता है। बार बार उसे जेल भेजा जाएगा तो एक दिन वह भी बागी हो जाएगा। कई अन्य लोगाें ने भी ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस कार्यवाही को मनमाना और एकतरफा बताया है।
सारे दावे खोखले-
चित्रकूट। इन सभी कामों से आम जनता संतुष्ट नजर नहीं आ रही है। जनता चाहती है कि डाकुओं का जिले में जल्द से जल्द सफाया होना चाहिए। पुलिस अधीक्षक प्रताप गोपेंद्र सिंह ने बताया कि चाहे जितनी रसूख वाला मददगार होगा उसे छोड़ा नहीं जाएगा। पुलिस टीम पूरी तरह से डाकुओं को मदद पहुंचाने वालों पर ही नजर रख रही है। बचे डाकुओं को समाप्त करने के लिए अभियान जारी रहेगा। पुलिस किसी भी निर्दोष को परेशान नहीं करेगी। बिना सबूत किसी को जेल नहीं भेजा जाएगा।
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चित्रकूट। भले ही पुलिस व सफेदपोश डाकुओं के खिलाफ अभियान जोर शोर से चलवाने का दावा करते हों लेकिन जिले में एक माह के अंदर कड़वी सच्चाई सामने आई है कि डाकू बेखौफ दहशत फैला रहे हैं। पुलिस व डकैतों के बीच आंख मिचौली का खेल चल रहा है। और इसका लाभ सफेदपोश उठा रहे हैं। हकीकत यही है कि अभी तक इस खेल में तो डाकू गैंग पूरी तरह से आधुनिक अस्त्र शस्त्र से लैस पुलिस बल पर भारी पड़ता नजर आया है। डकैतों को संरक्षण देने वालों में पुलिस का तो खौफ है लेकिन बदस्तूर यह क्रम जारी है। सही मायने में नाकाम पुलिस बहादुरी का ढोल पीट रही है।
गौरतलब है कि डाकू बबुली कोल सहित गोप्पा व गौरी गैंग के खात्मे के लिए लगी पुलिस फोर्स की कई बार मुठभेड़ हुई है लेकिन हर बार डाकुआेें के आगे मुंह की खानी पड़ रही है। डाकू पुलिस पर भारी पड़ रहे हैं। पुलिस की सात टीमें कुख्यात व इनामी डाकुओं को पकड़ने के लिए बनाई गई है। इसके बावजूद गैंग के सक्रिय सदस्यों को पड़ने में कामयाबी नहीं मिल रही है। खासकर पांच लाख तीस हजार के इनामी डाकू बबुली कोल गैंग के खिलाफ जिस अंदाज में पुलिस ने एक्शन लिया है उससे डाकू गैंग बैकफुट में हैं। पुलिस की उपलब्धि यही है कि डकैत गैंग के कुछ सदस्यों व उनके परिचितों को जरूर पकड़कर जेल भेजा है। भरतकूप के पास राजा ठाकुर नामक डाकू ही मारा गया उसमें भी स्थानीय लोगों की जागरूकता थी। उसमें पुलिस का योगदान नहीं रहा। कई बार मुठभेड़ जरूर हो रहीं हैं लेकिन खोखे व कुछ खाद्य सामग्री के अलावा कुछ हासिल नहीं हो रहा।
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23 मई के बाद से 17 जून के बीच पुलिस ने बबुली गैंग से तीन बार मुठभेड़ की लेकिन बड़ी सफलता का इंतजार लंबा ही होता जा रहा है। यह जरूर है कि इसका प्रभाव रसद व मदद पहुंचाने वालों पर पड़ा है। सफेदपोश से लेकर गांव के मददगारों पर पुलिस की निगाह तेज हुई है। गैंग के कुछ सदस्यों व खाद्य सामग्री पहुंचाने वालों को पुलिस जेल भेज कर दावा किया है कि डकैतों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसके बावजूद सफेदपोशों व डाकुओं को रसद-मदद पहुंचाने वालों का अपना काम भी चोरी छिपे जारी है। इसी का नतीजा है कि सशस्त्र पुलिस बल डाकुओं के बेहद करीब पहुंचने के बाद भी नाकाम होकर लौट आता है।
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परेशानी करती है पुलिस
चित्रकूट। पुलिस के कई दावे कागजी भी हैं और कई लोगों ने पुलिस पर ही डकैत बनाने का आरोप लगाया है। नागर गांव की प्रधान चुन्नीदेवी का कहना है कि उसका लड़का विनोद जिले के बाहर रहकर कमाता है। बार बार उसे जेल भेजा जाएगा तो एक दिन वह भी बागी हो जाएगा। कई अन्य लोगाें ने भी ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस कार्यवाही को मनमाना और एकतरफा बताया है।
सारे दावे खोखले-
चित्रकूट। इन सभी कामों से आम जनता संतुष्ट नजर नहीं आ रही है। जनता चाहती है कि डाकुओं का जिले में जल्द से जल्द सफाया होना चाहिए। पुलिस अधीक्षक प्रताप गोपेंद्र सिंह ने बताया कि चाहे जितनी रसूख वाला मददगार होगा उसे छोड़ा नहीं जाएगा। पुलिस टीम पूरी तरह से डाकुओं को मदद पहुंचाने वालों पर ही नजर रख रही है। बचे डाकुओं को समाप्त करने के लिए अभियान जारी रहेगा। पुलिस किसी भी निर्दोष को परेशान नहीं करेगी। बिना सबूत किसी को जेल नहीं भेजा जाएगा।