{"_id":"fd940a6d762490f615e7188252a9f0fb","slug":"rural-opposed-the-well-destroy-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कुआं पाटने के विरोध में प्रदर्शन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कुआं पाटने के विरोध में प्रदर्शन
ब्यूरो/अमर उजाला, चंदौली
Updated Fri, 14 Aug 2015 01:54 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
डेढ़ावल चौकी स्थित ऐतिहासिक कुएं को पीडब्लूडी द्वारा पाटे जाने के विरोध
विज्ञापन
में गुरुवार को समाजसेवी अंजनी सिंह के नेतृत्व में ग्रामीणों ने कुंए के
समीप खड़े होकर पीडब्लूडी विभाग के खिलाफ प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों की स्मृति संजोए कुएं को पाटकर विभाग द्वारा क्षेत्रीय जनता की भावनाओं से खिलवाड़ किया जा रहा है।
ग्रामीणों ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेजी द्वारा आंदोलनकारियों को फांसी देने के बाद इसी कुएं में डाल दिया जाता था। देश पर बलिदान होने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की यादें इस कुएं से जुड़ी हैं। पीडब्लूडी विभाग कुएं को पाटकर क्षेत्रीय लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रहा है।
कहा कि कुएं को पाटकर पीडब्लूडी विभाग का भवन बनाया जा रहा है। क्षेत्र की जनता इसे कभी बर्दाश्त नहीं करेगी।
वर्ष 1942 में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व करते हुए बाबू प्रसिद्ध नारायण सिंह व कामता प्रसाद विद्यार्थी सहित सैकड़ों देशभक्तों ने धानापुर थाना व सरकारी इमारतों पर तिरंगा झंड़ा फहराने की कसमें खाईं थीं।
इस दौरान अंग्रेजों की गोलियों से शहीद हुए अंदोलकारियों के शवों कुएं में डाल दिया गया था।
प्रदर्शनकारियों ने कुएं की पुन: खुदाई कराकर अमर शहीदों की यादों को जीवित करने की मांग की।
कहा कि स्मृति है। प्रदर्शन करने वालों में धर्मेश यादव, विजय बहादुर तिवारी, कन्हैया, संजय, प्यारेलाल, मनोज, रामअधार सिंह, गुड्डू साव, प्रभु यादव, वंशनारायण, नित्यानंद, दीनानाथ श्रीवास्तव आदि शामिल रहे।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों की स्मृति संजोए कुएं को पाटकर विभाग द्वारा क्षेत्रीय जनता की भावनाओं से खिलवाड़ किया जा रहा है।
ग्रामीणों ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेजी द्वारा आंदोलनकारियों को फांसी देने के बाद इसी कुएं में डाल दिया जाता था। देश पर बलिदान होने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की यादें इस कुएं से जुड़ी हैं। पीडब्लूडी विभाग कुएं को पाटकर क्षेत्रीय लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रहा है।
कहा कि कुएं को पाटकर पीडब्लूडी विभाग का भवन बनाया जा रहा है। क्षेत्र की जनता इसे कभी बर्दाश्त नहीं करेगी।
वर्ष 1942 में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व करते हुए बाबू प्रसिद्ध नारायण सिंह व कामता प्रसाद विद्यार्थी सहित सैकड़ों देशभक्तों ने धानापुर थाना व सरकारी इमारतों पर तिरंगा झंड़ा फहराने की कसमें खाईं थीं।
इस दौरान अंग्रेजों की गोलियों से शहीद हुए अंदोलकारियों के शवों कुएं में डाल दिया गया था।
प्रदर्शनकारियों ने कुएं की पुन: खुदाई कराकर अमर शहीदों की यादों को जीवित करने की मांग की।
कहा कि स्मृति है। प्रदर्शन करने वालों में धर्मेश यादव, विजय बहादुर तिवारी, कन्हैया, संजय, प्यारेलाल, मनोज, रामअधार सिंह, गुड्डू साव, प्रभु यादव, वंशनारायण, नित्यानंद, दीनानाथ श्रीवास्तव आदि शामिल रहे।