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यूपी: जयंत बोले- हमें राजनीति चौधरी साहब ने सिखाई, आपने नहीं; अखिलेश का नाम लिए बिना किया तीखा हमला

Sun, 30 Aug 2026 08:41 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Sun, 30 Aug 2026 08:41 PM IST
सार

Jayant vs Akhilesh: अखिलेश यादव के ‘चवन्नी’ वाले बयान पर जयंत ने कहा कि वह अपना सम्मान अपने साथ लेकर चलते हैं, इसलिए कोई उनका अपमान नहीं कर सकता। 

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Jayant Chaudhary said: Chaudhary sahab taught us politics, without taking Akhilesh's name, he said - now it is
जयंत चौधरी आज लखनऊ में थे। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और राष्ट्रीय लोक दल अध्यक्ष जयंत चौधरी के बीच शुरू हुई ‘चवन्नी’ की सियासी तकरार अब राजनीति की ‘एबीसीडी’ तक पहुंच गई है। सपा प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल के बयान पर रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी ने रविवार को लखनऊ में अखिलेश यादव का नाम लिए बिना ऐसा पलटवार किया कि गठबंधन की पुरानी तल्खी फिर सतह पर आ गई।

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रविवार को खचाखच भरे इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के सभागार में सम्मेलन के आयोजक और पार्टी में शामिल स्नातक और शिक्षक राजनीति के नेता बी के शुक्ला का स्वागत करते हुए जयंत ने अखिलेश का नाम लिए बिना कहा कि आप कहते हैं कि हमने सिखाया है। हमें चौधरी साहब ने सिखाया है। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि अब शांत रहने का वक्त नहीं है। कुछ बातें बर्दाश्त के बाहर होती हैं। चुनाव में चौधरी चरण सिंह का समाज ही इसका जवाब देगा। इसके लिए अकेले जयंत चौधरी को जवाब देने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
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जयंत ने कहा कि उनके बारे में राजनीति की एबीसीडी नहीं जानने जैसी बातें कही जा रही हैं। लेकिन उन्हें एबीसीडी का मतलब अहंकार, भ्रष्टाचार, चोरी और धोखाधड़ी नहीं, बल्कि सम्मान, संघर्ष और समाज को साथ लेकर चलना चौधरी चरण सिंह ने सिखाया है।
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अखिलेश यादव के ‘चवन्नी’ वाले बयान पर जयंत ने कहा कि वह अपना सम्मान अपने साथ लेकर चलते हैं, इसलिए कोई उनका अपमान नहीं कर सकता। लेकिन इस प्रकरण में सबसे गलत बात यह हुई कि बात उनके तक सीमित नहीं रही, बल्कि उनकी जाति तक ले जाई गई।

जयंत ने कहा कि जब उनका नाम लेकर बात नहीं की गई थी तो उन्होंने भी नाम लेकर जवाब नहीं दिया। लेकिन सपा के जिम्मेदार लोगों की ओर से दिए जा रहे बयानों से यह जरूर सामने आ रहा है कि उन्हें बगल में रखकर उनके बारे में कितने तुच्छ विचार रखे जाते थे।

पहले से जुड़े लोगों को कितना सम्मान दिया, जनता देखेगी

पूर्वांचल को लेकर अखिलेश यादव के दोहे पर भी जयंत ने निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अपने परंपरागत वोट बैंक के अलावा नए मतदाताओं को जोड़ने के लिए ऐसे राजनीतिक संदेश दिए जा रहे हैं। लेकिन इससे पहले यह भी देखना चाहिए कि जो लोग पहले से साथ जुड़े हुए थे, उन्हें कितना सम्मान दिया गया और उन्हें कितना अपने साथ रखा जा सका। यह भी तो जनता देखेगी। उन्होंने कहा कि ऐसी हल्की बातें कहकर सपा के जिम्मेदार लोग यह बता रहे हैं कि जिस सहयोगी को साथ रखा गया, उसके बारे में उनके मन में क्या विचार थे।

पीडीए नहीं, पीड़ा और बौखलाहट
जयंत ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश में हर घटना को जाति के चश्मे से देखने की कोशिश हो रही है। यह कोई पीडीए नहीं है, यह पीड़ा और बौखलाहट है। उन्होंने कहा कि चौधरी चरण सिंह जातीय ध्रुवीकरण के धुर विरोधी थे। उन्होंने कहा कि आज चौधरी चरण सिंह के नाम पर कई लोगों ने दल बनाए, झंडे का रंग बदला और चुनाव आते ही उनका नाम याद किया। चुनाव के बाद उन्हें भूल गए। वह इसे गलत नहीं मानते, लेकिन चौधरी साहब की तस्वीर लगाना आसान है और उनके कदमों पर चलना बेहद कठिन।
 

स्कूलों के बहाने सपा पर निशाना

शिक्षा के मुद्दे पर भी जयंत ने सपा पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आज जो लोग स्कूल खुलवाने की बात कर रहे हैं, उनके कार्यकाल में स्कूलों में खुलेआम नकल होती थी। वर्ष 2016 में प्राथमिक विद्यालयों का बजट बेहद कम था और कई स्कूलों के बंद होने की स्थिति थी। उन्होंने कहा कि जिन स्कूलों को दोबारा खोलने का काम किया गया, अब उसी पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

जयंत ने कहा कि शिक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। समाज, अभिभावक और शिक्षक सभी को मिलकर अगली पीढ़ी की चिंता करनी होगी। जयंत ने डिफेंस कॉरिडोर को रोजगार से जोड़ते हुए कहा कि लखनऊ, कानपुर, आगरा, अलीगढ़, झांसी और चित्रकूट में काम हो रहा है। इससे आने वाले समय में लाखों लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि आईटीआई, पॉलीटेक्निक और इंजीनियरिंग संस्थानों से निकलने वाले युवाओं का कौशल उद्योगों की जरूरत के अनुरूप होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि तीन साल में 300 ब्रह्मोस मिसाइलों के निर्माण की दिशा में काम होगा। डिफेंस क्षेत्र में रोजगार के लिए कौशल विकास पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ बैठक में चर्चा होगी। आईटीआई के नवीनीकरण की दिशा में पहली बार बड़े स्तर पर काम होने की बात भी उन्होंने कही।

अब शांत रहने का वक्त नहीं
सम्मेलन के अंत में जयंत का संदेश साफ था कि रालोद अब सपा की ओर से होने वाले राजनीतिक हमलों को चुपचाप सहने के मूड में नहीं है। उन्होंने कहा कि सामने वाला हर हथकंडा अपना रहा है, छोटी-छोटी बातों को जातीय चश्मे से देखा जा रहा है और कुछ लोग अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं। रालोद की राजनीति सबको साथ लेकर चलने की है। सम्मेलन में कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार, राष्ट्रीय महासचिव ध्रुव त्यागी, अनिल दुबे, उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष ऐश्वर्या राज सिंह और अनुपम मिश्रा और संयोजक मयंक त्रिवेदी सहित तमाम बड़े नेता थे।

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