फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Chandauli News ›   Dr. Shivprasad Singh gave a new perspective to human relationships.

Chandauli News: डॉ. शिवप्रसाद सिंह ने मानवीय रिश्तों को नई दृष्टि दी

Mon, 28 Sep 2026 02:21 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 28 Sep 2026 02:21 AM IST
विज्ञापन
Dr. Shivprasad Singh gave a new perspective to human relationships.
साहित्यकार डॉ. शिवप्रसाद सिंह, फाइलफोटो - फोटो : Archive
कंदवा। नरवन की माटी में जन्मे और हिंदी साहित्य के फलक पर चमके डॉ. शिव प्रसाद सिंह का क्षेत्र से गहरा लगाव रहा। सदर तहसील के जलालपुर गांव में 19 अगस्त 1929 को पैदा हुए डॉ. शिव प्रसाद सिंह की यादें लाेगों के दिलाें में आज भी जिंदा हैं। सोमवार को उनकी पुण्यतिथि है।
विज्ञापन

महाराणा प्रताप महाविद्यालय मोहनिया, बिहार के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. खड्ग बहादुर सिंह ने कहा कि डॉ. शिवप्रसाद सिंह ने अपने लेखन के माध्यम से भारतीय समाज, संस्कृति और मानवीय रिश्तों को नई दृष्टि दी। 28 सितंबर 1998 को सुबह चार बजे वाराणसी में उनका निधन हो गया था।
विज्ञापन

मां मंशा देवी पीजी कॉलेज बरहनी के प्राचार्य डॉ. समर बहादुर सिंह का कहना है कि नरवन के लाल डॉ. शिवप्रसाद हिन्दी साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर हैं। उन्होंने एमए में कीर्तिलता और अवहट्ठ भाषा पर जो लघु शोध प्रबंध प्रस्तुत किया, उसकी प्रशंसा राहुल सांकृत्यायन और डॉ. हजारी प्रसाद द्विवेदी ने की थी। नूरी निवासी अरविंद सिंह ने कहा कि डॉ. शिवप्रसाद उन बिरले लेखकों में थे, जो किसी विषय पर पूरी तैयारी करके ही लिखना प्रारंभ करते थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

नीला चांद, कोहरे में युद्ध, दिल्ली दूर है या शैलूष इसके जीवंत उदाहरण हैं। सर्वोदय इंटर कॉलेज अरंगी के प्राचार्य डॉ कृष्णकांत तिवारी ने कहा कि डॉ. शिव प्रसाद सिंह का गांव की मिट्टी से था गहरा लगाव रहा। उन्होंने अपने उपन्यास अलग-अलग वैतरणी में जलालपुर, ककरैत, नई बाजार और जमानिया आदि का कई बार उल्लेख किया है।


इनसेट-
डॉ. शिव प्रसाद की प्रमुख रचनाएं
डॉ. शिव प्रसाद सिंह की प्रमुख रचनाओं में दादी मां, कर्मनाशा की हार, धतूरे का फूल, नन्हों, एक यात्रा सतह के नीचे, राग गूजरी, मुरदा सराय आदि कहानियों शामिल हैं। इनके अलावा अलग-अलग वैतरिणी और गली आगे मुड़ती है, औरत, कुहरे में युद्ध आदि रचनाएं काफी मशहूर हुईं। वर्ष 1996 में प्रकाशित वैश्वानर उनका अंतिम उपन्यास था। उनकी रचना मंजूश्रिमा हिंदी की पहली शोक कथा थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed