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भतीजी की डोली उठने के साथ ही चाचा की उटी अर्थी
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पीडीडीयू नगर। अनहोनी को कौन टाल सकता है, शिवकुमार और उसके परिवार वालों को क्या पता था कि एक झटके में उसका पूरा कुनबा बिखर जाएगा। एक ओर भतीजी की डोली उठी तो उसी दिन शिवकुमार और उसकी पत्नी माया एवं मासूम भतीजे दीपक उर्फ सूरज की अर्थी उठी। सड़क हादसे में हुई इस हृदय विदाकर घटना ने उसके गांव बगही और सकलडीहा की अंबेडकर बस्ती को झकझोर कर रख दिया। घटना की जानकारी के बाद पूरे गांव में मातम छा गया। सोमवार की शाम बस्ती में चूल्हे नहीं जले। घटना के बाद बस्ती के लोग पोस्टमार्टम हाउस पहुंच गए। वहां चारो ओर चीख-पुखार सुनकर और घटना की जानकारी होने पर वहां मौजूद हर किसी की आंखे नम हो गई।
सड़क हादसे में मां माया, पिता शिवकुमार और चचेरे मुंहबोले भाई दीपक उर्फ सूरज की मौत के बाद शिवकुमार की बेटी यहीं कहकर फूटफूटकर रो रही थी कि अब किसे भैया कहेंगे, किसकी कलाई पर राखी बांधेंगे। हमके छोड़ के कहां चल गइला पापा, मम्मी और दीपक। बेटी की करुण व्यथा सुनकर हर कोई गमगीन हो गया। घटना की जानकारी होने पर बस्ती के साथ ही रिश्तेदार पहुंच गए। सभी एक दूसरे को ढांढस बंधा रहे थे लेकिन किसी के आंखों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहा था। शिवकुमार के तीनों भाईयों का रोकर बुरा हाल था।
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शिवकुमार मूलत: चहनिया ब्लाक के बगहीं गांव का रहने वाला है। चार भाईयों राजकुमार, मनोज और सनोज में शिवकुमार सबसे बड़ा था। वह बचपन से ही वह सकलडीहा के अंबेडकर बस्ती में अपने नाना झिनकुन के यहां रहता था। शादी के बाद भी पत्नी और अपनी बेटी गुड़िया के साथ यहीं रहता था। रविवार को वह अपने गांव बगहीं में चेचेरे भाई की बेटी और भतीजी खुशबू की शादी में पत्नी और भाई सनोज के बेटे सहित शामिल होने गया था। दरअसल शिवकुमार को एक बेटी गुड़िया थी जो दसवीं कक्षा में सकलडीहा स्थित मां दुर्गा बालिका इंटर कालेज में पढ़ती है। शिवकुमार को कोई बेटा नहीं था। वह अपनी बेटी के साथ भाई के बेटे को भी अपने यहां रखकर पढ़ाई कराता था। वह तीनों के साथ भतीजी की शादी में शरीक होकर सोवमार को घर लौट रहा था। उसे क्या पता था कि भतीजी की डोली के साथ ही उसकी भी अर्थी उठ जाएगी।
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