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ये खंडहर नहीं, रेलवे क्वार्टर हैं

Mon, 26 Jun 2017 11:33 PM IST
बदायूं।
बदायूं। Updated Mon, 26 Jun 2017 11:33 PM IST
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These are not ruins, railway quarters
समस्या - फोटो : अमर उजाला
-स्टेशन की रेलवे कॉलोनी में कर्मचारियों का रहना मुश्किल
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रे
लवे कर्मचारियों के सरकारी आवासों की स्थिति बदहाल बनी हुई है। कालोनी में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हुए है, नालियां सालों से चोक पड़ी हुई हैं, गंदा पानी घरों में घुस रहा है। सालों से सफाई नहीं हुई है। रेलवे कर्मचारी बताते हैं कि जर्जर पड़े आवासों में न तो दरवाजे ठीक हैं, न खिड़कियां, बरसात होने पर घरों में पानी टपकता है, यहां रहना उनकी मजबूरी है। शिकायत के बाद भी रेलवे प्रशासन कोई कदम नहीं उठाता है।  लगभग दो साल पहले बदायूं स्टेशन की तस्वीर बदल दी गई थी, लेकिन जर्जर पड़े सरकारी आवासों की और ध्यान नहीं दिया गया, जिससे स्थिति आज भी जस की तस है। सोमवार को स्टेशन स्थित बने सरकारी आवासों का जायजा लिया गया तो बदइंतजामी की जो तस्वीरें देखने को मिली उसे देखकर सहज अंदाजा लगाया जा सकता था कि इस स्टेशन के आवासों में कर्मचारी मजबूरी में रहने को विवश हैं।
रेलवे कर्मचारी रामपाल ने बताया कि लगभग 15 साल से वह सरकारी आवास में परिवार के साथ रहा रहा है। आवासों में सुविधा के नाम पर कुछ नहीं है, बच्चों के खेलने और घूमने के लिए बना पार्क गंदगी से पटा हुआ है। नहाने के लिए बाथरूम की कोई व्यवस्था नहीं है। बारिश होने पर छतों से पानी टपकता रहता है,  बच्चों की किताबें और कपड़े सब भीग जाते हैं। कई बार रेलवे के आई डब्ल्यू डिपार्टमेंट में शिकायत भी की फिर भी कॉलोनी के हालात नहीं सुधरे। मजबूरी में जुगाड़-तुगाड़ कर कर्मचारियों को खुद ही सारी व्यवस्था करनी पड़ती है। गंदगी और जर्जर पड़े इन आवासों में रहना खतरे से कम नहीं है अधिक तर लोग डर की वजह से आवास खाली कर चुके हैं तो कई ने घरों में ताले डाल दिए हैं और निजी मकानों में किराए पर रह रहे हैं।                   
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आवास में रहने वाले बोले
रेलवे क्वार्टर में रहने वाले अमित ने बताया कि जर्जर पड़ी रसोई में खाना नहीं बना सकते। कई बार रसोई की मरम्मत करा चुके  हैं, फिर भी बरसात में पानी नहीं रुकता है। नहाने का बाथरुम सिर्फ नाम का है, इसमें न तो कोई दरवाजा है, न ही पानी की उचित व्यवस्था। कई बार रेलवे अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया है फिर भी अधिकतर क्वाटर्स की स्थिति जस की तस बनी हुई है।                   
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संगीता वर्मा ने बताया कि घरों में नहाने की कोई व्यवस्था नहीं है। टॉयलेट जर्जर है। बरसात में घर पानी में तब्दील हो जाते हैं। कई बार रेलवे अधिकारियों को लिखा गया लेकिन आज तक कोई हल नहीं निकला है। मानसून करीब है नालियां चोक होने की वजह से बरसात में कॉलोनी के अधिकतर घरों में गंदा पानी भर जाता है।

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-वर्जन             
जिन आवासों की स्थिति बदहाल बनी हुई है, उनको ठीक कराने का जिम्मा सीनियर सेक्शन इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के पास होता है। रेलवे कर्मचारियों की शिकायत के बाद भी स्थिति ठीक नहीं हो सकी है, मरम्मत कार्य के लिए अधिकारियों से बात की जाएगी।             
-ओपी मीना, स्टेशन अधीक्षक
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