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Budaun News: बाढ़ के बाद अब गांवों में परेशानी का अंबार
Sat, 13 Sep 2025 01:21 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Updated Sat, 13 Sep 2025 01:21 AM IST
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उसहैत। जिले में उसहैत क्षेत्र इस समय बाढ़ के बाद उत्पन्न विकट परिस्थितियों से गुजर रहा है। गंगा का जलस्तर भले ही अब खतरे के निशान से नीचे आ चुका है लेकिन जलप्रलय से प्रभावित ग्रामीणों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। लगभग 18 गांवों के लोग आज भी भय, असुरक्षा और कठिनाइयों में जी रहे हैं।
गंगा का पानी उतरने के साथ ही कटान की रफ्तार तेज हो गई है। अहमद नगर बचौरा गांव में अब तक करीब 25 मकान नदी की धारा में समा चुके हैं। इसी तरह अटैना पुल के नीचे कटान लगातार जारी है। जटा गांव के पास भी कई भूखंड गंगा में विलीन हो गए हैं। जिन परिवारों के घर बह गए, वे अब सड़कों के किनारे अस्थायी टेंट डालकर जीवन यापन करने के लिए मजबूर हैं। बरसात और उमस के बीच परिवारों का खुले आसमान तले रहना बड़ी चुनौती बन गया है।
बीमारियों का खतरा मंडराया
स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित इलाकों में लगातार कैंप लगाकर जांच और दवा वितरण कर रही हैं। इसके बावजूद बुखार और त्वचा संबंधी बीमारियों से लोग पीड़ित हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कीटनाशक छिड़काव और मच्छरों से बचाव की कोई ठोस व्यवस्था ग्राम पंचायतों की ओर से नहीं की गई है। स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल टीमें सक्रिय कर दी हैं। कटान प्रभावितों के पुनर्वास और वैकल्पिक ठहराव को लेकर प्रस्ताव शासन को भेजा है। अधिकारी दावा कर रहे हैं कि जल्द छिड़काव अभियान चलाया जाएगा।
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गंगा का पानी उतरने के साथ ही कटान की रफ्तार तेज हो गई है। अहमद नगर बचौरा गांव में अब तक करीब 25 मकान नदी की धारा में समा चुके हैं। इसी तरह अटैना पुल के नीचे कटान लगातार जारी है। जटा गांव के पास भी कई भूखंड गंगा में विलीन हो गए हैं। जिन परिवारों के घर बह गए, वे अब सड़कों के किनारे अस्थायी टेंट डालकर जीवन यापन करने के लिए मजबूर हैं। बरसात और उमस के बीच परिवारों का खुले आसमान तले रहना बड़ी चुनौती बन गया है।
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बीमारियों का खतरा मंडराया
स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित इलाकों में लगातार कैंप लगाकर जांच और दवा वितरण कर रही हैं। इसके बावजूद बुखार और त्वचा संबंधी बीमारियों से लोग पीड़ित हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कीटनाशक छिड़काव और मच्छरों से बचाव की कोई ठोस व्यवस्था ग्राम पंचायतों की ओर से नहीं की गई है। स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल टीमें सक्रिय कर दी हैं। कटान प्रभावितों के पुनर्वास और वैकल्पिक ठहराव को लेकर प्रस्ताव शासन को भेजा है। अधिकारी दावा कर रहे हैं कि जल्द छिड़काव अभियान चलाया जाएगा।
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