{"_id":"5e3dc33a8ebc3ee5e924f7d6","slug":"gas-refilling-badaun-news-bly3950170124","type":"story","status":"publish","title_hn":"पानी को गैस बनाकर बेच रहा था माफिया, एक से बनाए जा रहे थे दो सिलिंडर, आधा भरते थे पानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पानी को गैस बनाकर बेच रहा था माफिया, एक से बनाए जा रहे थे दो सिलिंडर, आधा भरते थे पानी
विज्ञापन
बदायूं। दातागंज रेलवे क्रासिंग के नजदीक जिस गोदामनुमा घर में एसडीएम सदर पारसनाथ मौर्य और जिला पूर्ति अधिकारी रामेंद्र प्रताप सिंह ने छापा मारा था, वो घरेलू सिलिंडरों में पानी भरने का एक अड्डा भी था। जहां पानी को गैस बनाकर एक सिलिंडर के दो बना दिए जाते थे। प्रत्येक सिलिंडर में आधा पानी भरा जाता था और उसके बाद सिलिंडर को सील कर दिया जाता था। फिर वही सिलिंडर हॉकर उपभोक्ताओं के घर पहुंचा देते थे। ऐसा करने पर हॉकरों को प्रति सिलिंडर मोटी कमीशन मिलती थी, जबकि उपभोक्ताओं को जमकर चूना लग रहा था।
पांच फरवरी को एसडीएम सदर पारसनाथ मौर्य और जिला पूर्ति अधिकारी रामेंद्र प्रताप सिंह ने दातागंज रेलवे क्रासिंग के नजदीक लाइन किनारे एक गोदामनुमा घर में छापा मारा था, जहां से 161 रसोई गैस सिलिंडर बरामद हुए थे। यहां से गैस रिफिलिंग का सामान और सिलिंडर सील करने के उपकरण मिले थे। उनमें भारत, इंडियन और एचपी कंपनी के होलोग्राम भी शामिल थे, जिनसे सिलिंडर सील किए जाते थे। इससे माना जा रहा है कि गैस माफिया कैलाश उर्फ बंटू अपने घर में ही एक सिलिंडर के दो बना रहा था। उसकी गैस एजेंसियों के हॉकरों से अच्छी सांठगांठ थी। इससे हॉकर उपभोक्ताओं को सिलिंडर पहुंचाने से पहले बंटू के यहां ले जाते थे। फिर उन सिलिंडरों से गैस निकाली जाती थी। सिलिंडरों से जितनी गैस निकाली जाती थी, तोल कर उतना ही पानी भर दिया जाता था। फिर उन्हीं सिलिंडरों को सील करके उपभोक्ताओं के घर पहुंचा दिया जाता था। एक तरीका ये भी था कि हॉकर एजेंसी से सिलिंडर निकालकर माफिया के गोदाम में पहुंचा देता था। वहां रीफिलिंग किए हुए दूसरे सिलिंडर तैयार मिलते थे। ये गोरखधंधा बंद फाटक के अंदर या रात के अंधेरे में चलता था।
कंपनी के पैक सिलिंडरों से जो गैस निकाली जाती थी उसको दूसरे सिलिंडरों में भरकर या तो ऑटो या अन्य वाहनों में रीफिलिंग कर दी जाती थी। या फिर उन सिलिंडरों को ही सप्लाई कर दिया जाता था। इस तरह माफिया को एक सिलिंडर पर मोटी कमाई हो रही थी। वह पानी को भी गैस के दाम में बेच रहा था। माफिया ने इस गोरखधंधे को अपना व्यवसाय बना लिया था। अब उसकी पोल खुल चुकी है। पुलिस उसे तलाश कर रही है।
विज्ञापन
कई घरों में आई थीं सिलिंडर में पानी भरा होने की शिकायतें
कैलाश और लौड़ा बहेड़ी वाले गैस माफिया की कारगुजारी का ही नतीजा था कि उपभोक्ताओं को सिलिंडरों में पानी भरा होने की शिकायतें आती थी। ऐसे में सिलिंडरों में वजन तो रहता था लेकिन पानी भरा होने के कारण जलता नहीं था। एजेंसी पर शिायत लेकर जाने वाले उपभोक्ताओं की कोई सुनवाई नहीं होती थी, क्योंकि एजेंसी मालिक भी इन्हीं माफिया से मिलकर अपना धंधा चला रहे थे।
उज्ज्वला योजना का उठा रहे थे फायदा
केंद्र सरकार ने जिस उद्देश्य से उज्जवला योजना शुरू की थी, उसका फायदा गरीब तो कम लेकिन जिले के माफिया ज्यादा उठा रहे हैं। हकीकत पर गौर करें तो उज्जवला योजना के तहत जिले में करीब ढाई लाख गैस कनेक्शन बांटे गए। ये कनेक्शन उन लोगों को भी मिले थे, जिनके घर में पहले से कनेक्शन था। फिर एक घर में उज्जवला योजना के दो-दो या तीन-तीन कनेक्शन लिए गए। ये लोग सालभर में ज्यादा से ज्यादा दो या तीन सिलिंडर प्रयोग कर पाते हैं। इसका फायदा एजेंसी मालिक और ऐसे गैस रिफिलिंग करने वाले माफिया ही उठा रहे हैं। बताय जा रहा है कि लौड़ा बहेड़ी और बंटू के गोदाम में भी उज्जवला योजना के सिलिंडर प्रयोग हो रहे थे।
सेल्स ऑफिसरों की मिलीभगत से चल रहा था खेल
जिले में अब तक दो प्राइवेट गोदामों से 401 गैस सिलिंडर बरामद हो चुके हैं। उसी दौरान संबंधित सेल्स ऑफिसरों ने आसपास की गैस एजेंसियों के गोदाम सील किए थे। फिर बाद में सील खुलवाकर सिलिंडरों की गिनती कराई गई, जो लगभग पूरी निकली। कहीं पर 10-12 तो कहीं दो-चार सिलिंडर कम निकले। इधर, गैस रीफिलिंग का खेल उजागर हो रहा है और उधर सेल्स ऑफिसर गैस एजेंसियों के मालिकों को बचाने में लगे हैं। इससे उनकी मिलीभगत से भी इंकार नहीं किया जा सकता।
एक गैस माफिया को बचा गए माननीय और विभाग, मंशा पर उठे सवाल
बदायूं। विगत 10 जनवरी को पुलिस ने लौड़ा बहेड़ी में जो मामला पकड़ा था वह दातागंज रेलवे क्रासिंग के मामले से भी बडा था। यहां के गोदाम से पुलिस ने 240 रसोई गैस सिलिंडर बरामद किए थे। पुलिस ने जिस माफिया को पकड़ा था, वह खुद को गोदाम का मालिक और अपने नौकर को किरायेदार बताकर एक माननीय की वजह से छूट गया था। इसमें माफिया का नौकर फंस गया और जेल चला गया। जिला प्रशासन ने माफिया के बयान दर्ज किए थे और उससे जगह का किरायानामा मांगा था, लेकिन इस बात को एक महीना होने जा रहा है लेकिन अब तक माफिया किरायानामा पेश नहीं कर सका है। वहीं पुलिस अधिकारियों ने माफिया को विवेचना में शामिल करने की बात कही थी, ये भी कार्रवाई नहीं हो सकी है। इससे माफिया माननीय की कृपा से खुलेआम घूम रहा है, साथ ही पुलिस और पूर्ति विभाग की मंशा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं कि एक माफिया पर रिपोर्ट दर्ज करा दी गई जबकि दूसरे बड़े माफिया को अभयदान दे दिया गया।
बंटू के घर में गैस सिलिंडर रिफिलिंग का धंधा चल रहा था। वहीं पर सिलिंडर में पानी भरा जाता था। ये हॉकरों से और एजेंसियों के मालिकों से साठगांठ करके सिलिंडर प्राप्त करता था। ग्रामीण क्षेत्र की एजेंसियों के ग्राहक तो ज्यादा हैं नहीं, वह इसी तरह सिलिंडरों से रीफिलिंग करवा रहे हैं लेकिन अब कोई नहीं बच पाएगा।
- रामेंद्र प्रताप सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी
विज्ञापन
पांच फरवरी को एसडीएम सदर पारसनाथ मौर्य और जिला पूर्ति अधिकारी रामेंद्र प्रताप सिंह ने दातागंज रेलवे क्रासिंग के नजदीक लाइन किनारे एक गोदामनुमा घर में छापा मारा था, जहां से 161 रसोई गैस सिलिंडर बरामद हुए थे। यहां से गैस रिफिलिंग का सामान और सिलिंडर सील करने के उपकरण मिले थे। उनमें भारत, इंडियन और एचपी कंपनी के होलोग्राम भी शामिल थे, जिनसे सिलिंडर सील किए जाते थे। इससे माना जा रहा है कि गैस माफिया कैलाश उर्फ बंटू अपने घर में ही एक सिलिंडर के दो बना रहा था। उसकी गैस एजेंसियों के हॉकरों से अच्छी सांठगांठ थी। इससे हॉकर उपभोक्ताओं को सिलिंडर पहुंचाने से पहले बंटू के यहां ले जाते थे। फिर उन सिलिंडरों से गैस निकाली जाती थी। सिलिंडरों से जितनी गैस निकाली जाती थी, तोल कर उतना ही पानी भर दिया जाता था। फिर उन्हीं सिलिंडरों को सील करके उपभोक्ताओं के घर पहुंचा दिया जाता था। एक तरीका ये भी था कि हॉकर एजेंसी से सिलिंडर निकालकर माफिया के गोदाम में पहुंचा देता था। वहां रीफिलिंग किए हुए दूसरे सिलिंडर तैयार मिलते थे। ये गोरखधंधा बंद फाटक के अंदर या रात के अंधेरे में चलता था।
विज्ञापन
कंपनी के पैक सिलिंडरों से जो गैस निकाली जाती थी उसको दूसरे सिलिंडरों में भरकर या तो ऑटो या अन्य वाहनों में रीफिलिंग कर दी जाती थी। या फिर उन सिलिंडरों को ही सप्लाई कर दिया जाता था। इस तरह माफिया को एक सिलिंडर पर मोटी कमाई हो रही थी। वह पानी को भी गैस के दाम में बेच रहा था। माफिया ने इस गोरखधंधे को अपना व्यवसाय बना लिया था। अब उसकी पोल खुल चुकी है। पुलिस उसे तलाश कर रही है।
विज्ञापन
कई घरों में आई थीं सिलिंडर में पानी भरा होने की शिकायतें
कैलाश और लौड़ा बहेड़ी वाले गैस माफिया की कारगुजारी का ही नतीजा था कि उपभोक्ताओं को सिलिंडरों में पानी भरा होने की शिकायतें आती थी। ऐसे में सिलिंडरों में वजन तो रहता था लेकिन पानी भरा होने के कारण जलता नहीं था। एजेंसी पर शिायत लेकर जाने वाले उपभोक्ताओं की कोई सुनवाई नहीं होती थी, क्योंकि एजेंसी मालिक भी इन्हीं माफिया से मिलकर अपना धंधा चला रहे थे।
उज्ज्वला योजना का उठा रहे थे फायदा
केंद्र सरकार ने जिस उद्देश्य से उज्जवला योजना शुरू की थी, उसका फायदा गरीब तो कम लेकिन जिले के माफिया ज्यादा उठा रहे हैं। हकीकत पर गौर करें तो उज्जवला योजना के तहत जिले में करीब ढाई लाख गैस कनेक्शन बांटे गए। ये कनेक्शन उन लोगों को भी मिले थे, जिनके घर में पहले से कनेक्शन था। फिर एक घर में उज्जवला योजना के दो-दो या तीन-तीन कनेक्शन लिए गए। ये लोग सालभर में ज्यादा से ज्यादा दो या तीन सिलिंडर प्रयोग कर पाते हैं। इसका फायदा एजेंसी मालिक और ऐसे गैस रिफिलिंग करने वाले माफिया ही उठा रहे हैं। बताय जा रहा है कि लौड़ा बहेड़ी और बंटू के गोदाम में भी उज्जवला योजना के सिलिंडर प्रयोग हो रहे थे।
सेल्स ऑफिसरों की मिलीभगत से चल रहा था खेल
जिले में अब तक दो प्राइवेट गोदामों से 401 गैस सिलिंडर बरामद हो चुके हैं। उसी दौरान संबंधित सेल्स ऑफिसरों ने आसपास की गैस एजेंसियों के गोदाम सील किए थे। फिर बाद में सील खुलवाकर सिलिंडरों की गिनती कराई गई, जो लगभग पूरी निकली। कहीं पर 10-12 तो कहीं दो-चार सिलिंडर कम निकले। इधर, गैस रीफिलिंग का खेल उजागर हो रहा है और उधर सेल्स ऑफिसर गैस एजेंसियों के मालिकों को बचाने में लगे हैं। इससे उनकी मिलीभगत से भी इंकार नहीं किया जा सकता।
एक गैस माफिया को बचा गए माननीय और विभाग, मंशा पर उठे सवाल
बदायूं। विगत 10 जनवरी को पुलिस ने लौड़ा बहेड़ी में जो मामला पकड़ा था वह दातागंज रेलवे क्रासिंग के मामले से भी बडा था। यहां के गोदाम से पुलिस ने 240 रसोई गैस सिलिंडर बरामद किए थे। पुलिस ने जिस माफिया को पकड़ा था, वह खुद को गोदाम का मालिक और अपने नौकर को किरायेदार बताकर एक माननीय की वजह से छूट गया था। इसमें माफिया का नौकर फंस गया और जेल चला गया। जिला प्रशासन ने माफिया के बयान दर्ज किए थे और उससे जगह का किरायानामा मांगा था, लेकिन इस बात को एक महीना होने जा रहा है लेकिन अब तक माफिया किरायानामा पेश नहीं कर सका है। वहीं पुलिस अधिकारियों ने माफिया को विवेचना में शामिल करने की बात कही थी, ये भी कार्रवाई नहीं हो सकी है। इससे माफिया माननीय की कृपा से खुलेआम घूम रहा है, साथ ही पुलिस और पूर्ति विभाग की मंशा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं कि एक माफिया पर रिपोर्ट दर्ज करा दी गई जबकि दूसरे बड़े माफिया को अभयदान दे दिया गया।
बंटू के घर में गैस सिलिंडर रिफिलिंग का धंधा चल रहा था। वहीं पर सिलिंडर में पानी भरा जाता था। ये हॉकरों से और एजेंसियों के मालिकों से साठगांठ करके सिलिंडर प्राप्त करता था। ग्रामीण क्षेत्र की एजेंसियों के ग्राहक तो ज्यादा हैं नहीं, वह इसी तरह सिलिंडरों से रीफिलिंग करवा रहे हैं लेकिन अब कोई नहीं बच पाएगा।
- रामेंद्र प्रताप सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी