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14.73 लाख रुपये की लौटपौट करने में फंसे बैंक मैनेजर
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उझानी (बदायूं)। जिला सहकारी बैंक के बचत खाते में जमा स्थानीय सहकारी क्रय-विक्रय समिति के 14.73 लाख कुछ ही दिनों में लौटपौट होने से बैंक मैनेजर और समिति से रिटायर सचिव फंस गए हैं। समिति को ब्याज के रूप में मिली रकम बिना अनुमति के रिटायर सचिव के खाते में डाल दी गई थी। बात खुली तो समिति के खाते में वापस कर दी गई। समिति के सभापति किशनचंद्र शर्मा बैंक मैनेजर के खिलाफ कार्रवाई कराने को अड़ गए हैं, उन्होंने फिलहाल बैंक चेयरमैन को चिट्ठी लिखी है।
धोखाधड़ी से जुड़ा यह पूरा मामला सहकारी क्रय-विक्रय समिति के सभापति किशनचंद्र शर्मा ने मंगलवार को मीडिया के सामने रखा। उन्होंने बताया कि समिति के दो बैंक खाते जिला सहकारी बैंक की उझानी शाखा में खुले हुए हैं। एक खाते में करीब एक करोड़ रुपये एफडी के रूप में जमा हैं और इस पर मिलने वाले ब्याज की रकम समिति के दूसरे खाते में जमा होती है। एक नवंबर को इस दूसरे बचत खाते में रकम 15 लाख रुपये से अधिक हो गई। उसी दिन समिति से सचिव श्याम सिंह सेवानिवृत हुए। इधर बचत खाते में हेराफेरी कर बैंक मैनेजर हजारी लाल ने श्याम सिंह के खाते में 14 लाख 73 हजार 697 रुपये ट्रांसफर कर दिए। ऐसा करने के लिए बैंक मैनेजर को समिति के सभापति समेत संचालक मंडल से अनमुति प्राप्त करनी चाहिए थी लेकिन बिना अनुमति के ही रकम ट्रांसफर की कार्रवाई कर ली गई। इसका फायदा उठाते हुए सेवानिवृत सचिव ने दो लाख रुपये निकाल भी लिए।
इस गोलमाल में बैंक मैनेजर के अलावा कोई और शामिल है या नहीं, यह तो जांच से ही पता लगेगा लेकिन सभापति किशनचंद्र शर्मा ने मैनेजर से संपर्क साधकर बचत खाते में एफडी की ब्याज की रकम को लेकर बात की तो पोल खुल गई। इसके बाद बैंक मैनेजर ने पहले सेवानिवृत सचिव के जरिए दो लाख रुपये जमा करना दर्शाया फिर पूरी पूरी रकम 14 नवंबर को समिति के बचत खाते में ट्रांसफर कर दी। मामला बैंक के चेयरमैन उमेश राठौर के संज्ञान में भी पहुंच चुका है। बैंक मैनेजर बचत खाते से ब्याज की रकम को एफडी खाते में भी 18 नवंबर को समायोजित कर चुके हैं लेकिन सवाल यह भी उठता है कि अगर उन्हें गोलमाल नहीं करना था तो लाखों रुपये सेवानिवृत सचिव के खाते में क्यों ट्रांसफर किए गए। बता दें कि ब्याज की रकम से समिति किसानों की सुविधा और आमदनी बढ़ाने के लिए क्रय-विक्रय से जुड़ा कोई कार्य कर सकती है।
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ब्लॉक क्षेत्र की कई सहकारी समिति के खाते जिला सहकारी बैंक की स्थानीय शाखा में हैं। समितियों से जुड़े किसानों के खातों का लेनदेन भी इसी बैंक से होता है। पांच साल के दौरान कुछेक सचिवों ने किसानों के खातों की रकम को मनमाने ढंग से लेनदेन दर्शाया था। बुटला का एक मामला भी अफसरों के संज्ञान में पहुंचा था। सचिव पर कार्रवाई भी हुई थी। उझानी की एक और समिति भी घपले का शिकार होने से बच गई थी। बताते हैं कि ऐसे मामलों में सचिवों की भूमिका पर संदिग्ध रहती है।
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धोखाधड़ी से जुड़ा यह पूरा मामला सहकारी क्रय-विक्रय समिति के सभापति किशनचंद्र शर्मा ने मंगलवार को मीडिया के सामने रखा। उन्होंने बताया कि समिति के दो बैंक खाते जिला सहकारी बैंक की उझानी शाखा में खुले हुए हैं। एक खाते में करीब एक करोड़ रुपये एफडी के रूप में जमा हैं और इस पर मिलने वाले ब्याज की रकम समिति के दूसरे खाते में जमा होती है। एक नवंबर को इस दूसरे बचत खाते में रकम 15 लाख रुपये से अधिक हो गई। उसी दिन समिति से सचिव श्याम सिंह सेवानिवृत हुए। इधर बचत खाते में हेराफेरी कर बैंक मैनेजर हजारी लाल ने श्याम सिंह के खाते में 14 लाख 73 हजार 697 रुपये ट्रांसफर कर दिए। ऐसा करने के लिए बैंक मैनेजर को समिति के सभापति समेत संचालक मंडल से अनमुति प्राप्त करनी चाहिए थी लेकिन बिना अनुमति के ही रकम ट्रांसफर की कार्रवाई कर ली गई। इसका फायदा उठाते हुए सेवानिवृत सचिव ने दो लाख रुपये निकाल भी लिए।
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इस गोलमाल में बैंक मैनेजर के अलावा कोई और शामिल है या नहीं, यह तो जांच से ही पता लगेगा लेकिन सभापति किशनचंद्र शर्मा ने मैनेजर से संपर्क साधकर बचत खाते में एफडी की ब्याज की रकम को लेकर बात की तो पोल खुल गई। इसके बाद बैंक मैनेजर ने पहले सेवानिवृत सचिव के जरिए दो लाख रुपये जमा करना दर्शाया फिर पूरी पूरी रकम 14 नवंबर को समिति के बचत खाते में ट्रांसफर कर दी। मामला बैंक के चेयरमैन उमेश राठौर के संज्ञान में भी पहुंच चुका है। बैंक मैनेजर बचत खाते से ब्याज की रकम को एफडी खाते में भी 18 नवंबर को समायोजित कर चुके हैं लेकिन सवाल यह भी उठता है कि अगर उन्हें गोलमाल नहीं करना था तो लाखों रुपये सेवानिवृत सचिव के खाते में क्यों ट्रांसफर किए गए। बता दें कि ब्याज की रकम से समिति किसानों की सुविधा और आमदनी बढ़ाने के लिए क्रय-विक्रय से जुड़ा कोई कार्य कर सकती है।
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ब्लॉक क्षेत्र की कई सहकारी समिति के खाते जिला सहकारी बैंक की स्थानीय शाखा में हैं। समितियों से जुड़े किसानों के खातों का लेनदेन भी इसी बैंक से होता है। पांच साल के दौरान कुछेक सचिवों ने किसानों के खातों की रकम को मनमाने ढंग से लेनदेन दर्शाया था। बुटला का एक मामला भी अफसरों के संज्ञान में पहुंचा था। सचिव पर कार्रवाई भी हुई थी। उझानी की एक और समिति भी घपले का शिकार होने से बच गई थी। बताते हैं कि ऐसे मामलों में सचिवों की भूमिका पर संदिग्ध रहती है।