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‘सूर्य के प्रकाश में भी अंधकार ही दिखता है उल्लू को’

Tue, 20 Sep 2022 12:03 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 20 Sep 2022 12:03 AM IST
सार

जिस सहनशील भगवान ने भृगु के चरण प्रहार को अपने वक्षस्थल पर धारण कर लिया, उनको पूतना का उद्धार करने के लिए क्रोध धारण करना पड़ा। संवादफोटो- 41भागवत श्रवण मात्र से ही हो जाता है मनुष्य का बेड़ा पारबदायूं। रस्तोगी धर्मशाला में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दौरान पं. श्याम मिलन शास्त्री ने कहा कि भागवत श्रवण मात्र से ही मनुष्य का बेड़ा पार हो जाता है, बस जरूरत इस बात की है कि इसे ध्यान से सुनकर अपने जीवन में उतारा जाए।

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cultural
बिल्सी के जेपी जैन स्कूल में भागवत कथा सुनाते स्वामी रामचंद्राचार्य जी महाराज। संवाद - फोटो : BADAUN

विस्तार

बिल्सी। जेपी जैन स्कूल में सिद्धपीठ श्रीबालाजी धाम के तत्वावधान में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन स्वामी रामचंद्राचार्य महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण के बचपन की घटनाओं एवं पूतना के उद्धार की लीला का वर्णन किया।
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उन्होंने कहा कि जब पूतना भगवान को कपटपूर्ण ढंग से मारने के लिए आई तो उसकी माया का प्रभाव यशोदा और रोहिणी पर तो पड़ा किंतु भगवान कृष्ण पर उसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा। जिस सहनशील भगवान ने भृगु के चरण प्रहार को अपने वक्षस्थल पर धारण कर लिया, उनको पूतना का उद्धार करने के लिए क्रोध धारण करना पड़ा। पूतना भगवान का दिव्य और श्यामल सलोना रूप देखकर भी अपनी दुष्टता को नहीं छोड़ पाई क्योंकि उल्लू को सूर्य के प्रकाश में भी अंधकार ही दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण भगवान जैसा कौन दयालु है। हमें उनकी शरणागति करनी चाहिए। इस मौके पर महंत मटरूमल शर्मा, शांतिदेवी, संजीव शर्मा, मुकेश गुप्ता, प्रवीण वार्ष्णेय, गिरीश गिरि आदि मौजूद रहे। संवाद
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फोटो- 41
भागवत श्रवण मात्र से ही हो जाता है मनुष्य का बेड़ा पार
बदायूं। रस्तोगी धर्मशाला में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दौरान पं. श्याम मिलन शास्त्री ने कहा कि भागवत श्रवण मात्र से ही मनुष्य का बेड़ा पार हो जाता है, बस जरूरत इस बात की है कि इसे ध्यान से सुनकर अपने जीवन में उतारा जाए।
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सोमवार को कथा के चौथे दिन कथावाचक पं.शास्त्री ने कहा कि भागवत श्रवण भी बड़े पुण्य कामों से ही मिलता है। प्रत्येक मनुष्य को इसका लाभ उठाते हुए जीवन में भी उतारना चाहिए। इस मौके पर बच्चों ने श्री राधा-कृष्ण की मनमोहक झांकियों को प्रस्तुत किया। शाम छह बजे से शुरू हुई इस कथा का देर रात तक लोगों ने आनंद लिया। संवाद
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