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30 फुट गहरे कुएं में गिरा मजदूर 12 घंटे बाद सकुशल निकाला
अमर उजाला ब्यूरो वजीरगंज (बदायूं)।
Updated Thu, 08 Jun 2017 11:44 PM IST
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रेस्क्यू
- फोटो : अमर उजाला
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लहरा गांव में मिट्टी निकालते वक्त सुबह हुआ था हादसा, सेना के रेस्क्यू ऑपरेशन में मिली सफलता
कुएं से ईंट निकालते वक्त मिट्टी की ढांग गिरने से किसान 30 फुट गहरे कुएं में जा गिरा। जिससे गांव में हड़कंप मच गया। जानकारी पर एसडीएम, सीओ और वजीरगंज पुलिस मौके पर पहुंची और जेसीबी बुलाकर मजदूर की जान बचाने को रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। शाम तक सफलता न मिलने पर बरेली से सेना की रेस्क्यू टीम को बुलाया गया, जिसने कुछ ही घंटे में मिट्टी में दबे मजदूर को बाहर निकाल दिया। मजदूर की हालत ठीक बताई जा रही है। मजदूर करीब 12 घंटे तक कुएं में दबा रहा।
थाना आंवला के गुुलैली गांव निवासी 45 वर्षीय सत्यपाल ठेकेदारी करता था। दो दिन पहले उसने तीन हजार रुपये में वजीरगंज के लहरा लाड़पुर निवासी लल्ला मियां के कुएं से ईंट निकालने का ठेका लिया था। बृहस्पतिवार सुबह करीब आठ बजे वह अपने गांव के छत्रपाल और छोटेलाल के साथ कुएं से ईंट निकाल रहा था, तभी अचानक मिट्टी की ढांग ढहने से सत्यपाल 30 फुट गहराई में मिट्टी के नीचे जा दबा। छत्रपाल और छोटेलाल इस हादसे में बाल-बाल बच गए। गांव वालों को इस घटना का पता चला तो खलबली मच गई। हर कोई मौके पर दौड़ पड़ा और भीड़ लग गई। जानकारी पर एसडीएम आरडी राम, सीओ और वजीरगंज एसओ गौरव सिंह जेसीबी लेकर घटनास्थल पर पहुंचे और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू करा दिया। कोशिशों के बाद भी जब सफलता नहीं मिली तो प्रशासनिक अधिकारियों ने बरेली के आर्मी अफसरों से बातचीत कर सहायता ली। देर शाम आर्मी के जवानों ने रेस्क्यू ऑपरेशन कर 30 फुट गहराई में दबे सत्यपाल को सही सलामत निकाल लिया।
आर्मी के जवानों को सब ने सराहा
प्रशासनिक स्तर पर सत्यपाल को निकालने के लिए जेसीबी से लेकर तमाम उपाय किए गए लेकिन प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों को किसी तरह की सफलता नहीं मिली। गांव वाले भी सुबह से मजदूर को बचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे थे। काफी कोशिश के बाद जब आर्मी की रेस्क्यू टीम गांव पहुंची तो सभी में उम्मीद जागी की सत्यपाल को सकुशल निकाल लिया जाएगा। कुछ ही घंटे में रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान आर्मी के जवानों ने सत्यपाल को सकुशन निकाल लिया।
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पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही से हुई देरी
सुबह नौ बजे हादसे की जानकारी के बाद दोपहर तक जब कोई सफलता नहीं मिली फिर भी प्रशासन जेसीबी की मदद से मिट्टी से निकलवाता रहा। स्थानीय लोगों का कहना था कि दोपहर में अगर आर्मी अफसरों से बात की गई होती तो काफी समय पहले ही सत्यपाल को निकाल लिया जाता।
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कुएं से ईंट निकालते वक्त मिट्टी की ढांग गिरने से किसान 30 फुट गहरे कुएं में जा गिरा। जिससे गांव में हड़कंप मच गया। जानकारी पर एसडीएम, सीओ और वजीरगंज पुलिस मौके पर पहुंची और जेसीबी बुलाकर मजदूर की जान बचाने को रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। शाम तक सफलता न मिलने पर बरेली से सेना की रेस्क्यू टीम को बुलाया गया, जिसने कुछ ही घंटे में मिट्टी में दबे मजदूर को बाहर निकाल दिया। मजदूर की हालत ठीक बताई जा रही है। मजदूर करीब 12 घंटे तक कुएं में दबा रहा।
थाना आंवला के गुुलैली गांव निवासी 45 वर्षीय सत्यपाल ठेकेदारी करता था। दो दिन पहले उसने तीन हजार रुपये में वजीरगंज के लहरा लाड़पुर निवासी लल्ला मियां के कुएं से ईंट निकालने का ठेका लिया था। बृहस्पतिवार सुबह करीब आठ बजे वह अपने गांव के छत्रपाल और छोटेलाल के साथ कुएं से ईंट निकाल रहा था, तभी अचानक मिट्टी की ढांग ढहने से सत्यपाल 30 फुट गहराई में मिट्टी के नीचे जा दबा। छत्रपाल और छोटेलाल इस हादसे में बाल-बाल बच गए। गांव वालों को इस घटना का पता चला तो खलबली मच गई। हर कोई मौके पर दौड़ पड़ा और भीड़ लग गई। जानकारी पर एसडीएम आरडी राम, सीओ और वजीरगंज एसओ गौरव सिंह जेसीबी लेकर घटनास्थल पर पहुंचे और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू करा दिया। कोशिशों के बाद भी जब सफलता नहीं मिली तो प्रशासनिक अधिकारियों ने बरेली के आर्मी अफसरों से बातचीत कर सहायता ली। देर शाम आर्मी के जवानों ने रेस्क्यू ऑपरेशन कर 30 फुट गहराई में दबे सत्यपाल को सही सलामत निकाल लिया।
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आर्मी के जवानों को सब ने सराहा
प्रशासनिक स्तर पर सत्यपाल को निकालने के लिए जेसीबी से लेकर तमाम उपाय किए गए लेकिन प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों को किसी तरह की सफलता नहीं मिली। गांव वाले भी सुबह से मजदूर को बचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे थे। काफी कोशिश के बाद जब आर्मी की रेस्क्यू टीम गांव पहुंची तो सभी में उम्मीद जागी की सत्यपाल को सकुशल निकाल लिया जाएगा। कुछ ही घंटे में रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान आर्मी के जवानों ने सत्यपाल को सकुशन निकाल लिया।
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पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही से हुई देरी
सुबह नौ बजे हादसे की जानकारी के बाद दोपहर तक जब कोई सफलता नहीं मिली फिर भी प्रशासन जेसीबी की मदद से मिट्टी से निकलवाता रहा। स्थानीय लोगों का कहना था कि दोपहर में अगर आर्मी अफसरों से बात की गई होती तो काफी समय पहले ही सत्यपाल को निकाल लिया जाता।