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...नहीं चाहते कि गांव आए निर्भया का आरोपी
इस्लामनगर( बदायूं)
Updated Fri, 04 Dec 2015 11:16 PM IST
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तीन साल पहले 16 दिसंबर 2012 को दिल्ली के वसंत बिहार इलाके में युवती से गैंगरेप के बाद उसकी नृशंस हत्या के मामले में जब इस्लामनगर थाने के एक गांव का नाबालिग आरोपी गिरफ्तार हुआ, तब गांव के लोग दंग रह गए। पूरे विश्व में यह मामला निर्भया कांड के रूप में चर्चित हुआ। इस मामले ने इस्लामनगर के नाम पर जो कलंक लगाया उसे लोग आज भी नहीं भूले हैं। इस आरोपी की सजा 22 दिसंबर को पूरी हो रही है। इन दिनों यह दिल्ली के एक बाल सुधार गृह में है। आरोपी की रिहाई के बाद उसे निगरानी में रखने की चर्चाओं के बीच जब गांव वालों से बात की गई तो वह उसे गांव में रखने पर राजी नहीं हैं।
मामले में इस आरोपी की जब गिरफ्तारी हुई थी तब वह नाबालिग था। दिल्ली पुलिस ने गांव के प्राइमरी स्कूल में उसके शैक्षिक अभिलेखों की पड़ताल भी की थी। नाबालिग होने की वजह से आरोपी के खिलाफ जुविनाइल कोर्ट में केस चला था। उसे तीन साल के लिए बाल सुधार गृह भेज दिया गया। 22 दिसंबर को उसकी सजा पूरी होनी है। कानूनन इसके बाद उसे रिहा कर दिया जाएगा।
आरोपी की मां ने बताया कि वह करीब 10 साल पहले दिल्ली चला गया था। परिवार में उसका पिता मंदबुद्धि है। दो छोटी बहनें और तीन भाई हैं। कुछ साल पहले तक वह दिल्ली से खर्च को रुपये भेजता रहा। पिछले पांच साल से न तो वह गांव आया और न ही कोई संपर्क किया। रुपये भेजना भी बंद कर दिए। जब दिल्ली में उसकी गिरफ्तारी हुई तब उसको पता लगा। तीन साल से वह बाल सुधार गृह में है, लेकिन उसने कभी उससे मुलाकात नहीं की। गांव के 90 वर्ष के बुजुर्ग फूल चंद्र का कहना है कि ऐसे व्यक्ति को वह गांव में रहने देने पर राजी नहीं हैं। ललतेश, अनिल, राजेश, अन्नू कटेरिया का भी यही कहना है। इनका कहना है कि जहां वह 10 साल से रह रहा था। वहीं रहे, उसे वह लोग अब गांव में बर्दाश्त नहीं करेंगे।
मामले में इस आरोपी की जब गिरफ्तारी हुई थी तब वह नाबालिग था। दिल्ली पुलिस ने गांव के प्राइमरी स्कूल में उसके शैक्षिक अभिलेखों की पड़ताल भी की थी। नाबालिग होने की वजह से आरोपी के खिलाफ जुविनाइल कोर्ट में केस चला था। उसे तीन साल के लिए बाल सुधार गृह भेज दिया गया। 22 दिसंबर को उसकी सजा पूरी होनी है। कानूनन इसके बाद उसे रिहा कर दिया जाएगा।
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आरोपी की मां ने बताया कि वह करीब 10 साल पहले दिल्ली चला गया था। परिवार में उसका पिता मंदबुद्धि है। दो छोटी बहनें और तीन भाई हैं। कुछ साल पहले तक वह दिल्ली से खर्च को रुपये भेजता रहा। पिछले पांच साल से न तो वह गांव आया और न ही कोई संपर्क किया। रुपये भेजना भी बंद कर दिए। जब दिल्ली में उसकी गिरफ्तारी हुई तब उसको पता लगा। तीन साल से वह बाल सुधार गृह में है, लेकिन उसने कभी उससे मुलाकात नहीं की। गांव के 90 वर्ष के बुजुर्ग फूल चंद्र का कहना है कि ऐसे व्यक्ति को वह गांव में रहने देने पर राजी नहीं हैं। ललतेश, अनिल, राजेश, अन्नू कटेरिया का भी यही कहना है। इनका कहना है कि जहां वह 10 साल से रह रहा था। वहीं रहे, उसे वह लोग अब गांव में बर्दाश्त नहीं करेंगे।
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