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घर में घुसकर प्रधान पुत्र की गोली मारकर हत्या

Tue, 15 Dec 2015 12:02 AM IST
अमर उजाला, बदायूं
अमर उजाला, बदायूं Updated Tue, 15 Dec 2015 12:02 AM IST
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जगत ब्लाक के गांव कटिया से रामचरन पाल ने प्रधान पद दावेदारी की और रविवार को मतगणना में निर्वाचित घोषित हुए। जीत के बाद गांव पहुंचने पर समर्थकों ने उनका स्वागत किया। बधाई देने वालों का आना-जाना लगा रहा। आरोप है कि रविवार रात 10 बजे पड़ोसी गांव नवादा का नेत्रपाल अपने पुत्रों सुनील, संजीव और शेर सिंह के साथ रामचरन के घर पहुंचा। घर का फाटक खटखटाते हुए आवाज दी। जैसे ही फाटक खुला, सभी हमलावर रामचरन के घर में घुस गए। शोर-शराबा होने पर रामचरन का बेटा वीरपाल (42) भी आ गया। इसी दौरान सुनील ने गोली चला ली। गोली वीरपाल के सीने में लगी। उसकी मौके पर मौत हो गई। दरवाजे पर भी एक गोली मारी गई। इसके बाद सब धमकी देकर भाग गए।
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 रामचरन की ओर से नेत्रपाल समेत उसके पुत्रों सुनील, संजीव और शेर सिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। फॉरेंसिक एक्सपर्ट की टीम ने घटनास्थल पर जांच-पड़ताल की। रिपोर्ट में रामचरन ने नेत्रपाल पक्ष से पुरानी रंजिश होने का जिक्र किया है। रंजिश क्या थी? इसका उल्लेख नहीं किया। क्षेत्र में ऐसी चर्चा है कि पिछले क्षेत्र पंचायत चुनाव को लेकर दोनों पक्षों में ठन गई थी। ये हत्या उसी का नतीजा है। हत्या के बाद से कटिया और नवादा गांव के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। नवनिर्वाचित प्रधान रामचरन और नवादा के नेत्रपाल का अपने अपने गांव में अच्छा रसूख है। हालांकि पुलिस सब कुछ काबू में होने का दावा कर रही है।
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मृतक के पिता की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले में सख्त कार्रवाई की जाएगी। चुनावी रंजिश की बात गलत है। दोनों पक्षों में पुरानी रंजिश चल रही थी।
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-सौमित्र यादव, एसएसपी
बीडीसी चुनाव से बढ़ गई थी दोनों पक्षों में रंजिश
संगीता के निर्विरोध निर्वाचन में रोड़ा बना था रामचरन
अलापुर। रामचरन और नेत्रपाल के बीच रंजिश तो पुरानी है। लेकिन बीडीसी चुनाव में नेत्रपाल की पुत्रवधु और सुनील की पत्नी के निर्विरोध बीडीसी निर्वाचन में जब रामचरन रोड़ा बना, तब रंजिश गहरा गई।

दरअसल, सुनील की पत्नी संगीता गांव से क्षेत्र पंचायत सदस्य पद का चुनाव लड़ी थी। गांव में वह इकलौती प्रत्याशी थी। उसका निर्विरोध निर्वाचन तय माना जा रहा था। रामचरन प्रधान पद की तैयारी कर रहा था। संगीता तो निर्विरोध निर्वाचित होते देखकर रामचरन ने गांव की एक ममता नाम की महिला को चुनाव में खड़ा कर दिया था। यह चुनाव संगीता ने जीता जरूर लेकिन यहां से दोनों पक्षों में खूनी रंजिश के बीज पड़ गए।
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