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मझारा में धर्मस्थल को लेकर बवाल, दो घायल
ब्यूरो, अमर उजाला बदायूं
Updated Sat, 25 Jul 2015 12:33 AM IST
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मझारा गांव में एक पक्ष के लोगों ने पिछले महीने ग्रामसभा की जमीन पर झोपड़ी डाल ली थी। इस झोपड़ी में धार्मिक आयोजन का गांव के लोगों ने विरोध किया था। इस पर दोनों पक्षों में टकराव हो गया। कई दिन तक यहां तनाव बना रहा। गुरुवार को मुरादाबाद का आशिफ अली गांव पहुंचा। रात में झोपड़ी की जगह पर निर्माण कराया जाने लगा। दूसरे पक्ष के लोगों ने विरोध किया, तो निर्माण करा रहे लोगों ने पथराव कर दिया। अर्जुन (20) पुत्र रामरक्षपाल को चाकू मारकर घायल कर दिया गया। एक अन्य व्यक्ति भी पथराव में घायल हुआ। खबर मिलने पर रात में ही पुलिस गांव पहुंची। किसी तरह स्थिति पर काबू किया गया। मामले में आशिफ अली, रहीश अहमद, इशरार, मोहम्मद हसन, नसीर, मोहम्मद सेन, अमीर अहमद के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। एहतियातन गांव में पुलिस तैनात कर दी गई है। एसपी सिटी अनिल यादव, सीओ उझानी हरवंश यादव ने गांव पहुंच कर स्थिति का जायजा लिया। एसपी सिटी का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है। रिपोर्ट दर्ज हो गई है। आरोपियों को तलाश की जा रही है।
मुरादाबाद का आशिक अली है सूत्रधार
मूसाझाग। मझारा में इस बवाल का सूत्रधार मुरादाबाद का आशिक अली है। आशिक अली ने प्रधान इशरार अहमद के साथ मिलकर पिछले दिनों ग्रामसभा की जमीन पर छोपड़ी बना ली थी। बाद में इसी छोपड़ी में धार्मिक आयोजन होने लगे। पिछले महीने भी यहां नई परंपरा डालने को लेकर दो पक्षों में टकराव हुआ था। तब पुलिस-प्रशासन ने समझौता करा दिया था। चेतावनी दी थी कि गांव में कोई नई परंपरा शुरू नहीं होने दी जाएगी। इसके बाद भी लोग नहीं माने।
कहीं फिजां खराब न कर दे मझारा
बदायूं। पुलिस की लापरवाही एक बार फिर सामने आई है। अनदेखी के चलते ग्रामसभा की जमीन पर धर्मस्थल बना लिया गया। ग्रामीणों ने विरोध किया, तो पूरे मामले में लीपापोती कर दी गई। सख्त कार्रवाई न होने की वजह से दूसरे पक्ष ने रातों-रात धर्मस्थल का निर्माण कराने की कोशिश की। अब मामला काफी तूल पकड़ चुका है। लोगों ने आशंका जताई है कि अगर पुलिस अब भी लापरवाही बरतती रही, तो मझारा का विवाद जिले की फिजां में जहर घोल सकता है।
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मुरादाबाद का आशिक अली है सूत्रधार
मूसाझाग। मझारा में इस बवाल का सूत्रधार मुरादाबाद का आशिक अली है। आशिक अली ने प्रधान इशरार अहमद के साथ मिलकर पिछले दिनों ग्रामसभा की जमीन पर छोपड़ी बना ली थी। बाद में इसी छोपड़ी में धार्मिक आयोजन होने लगे। पिछले महीने भी यहां नई परंपरा डालने को लेकर दो पक्षों में टकराव हुआ था। तब पुलिस-प्रशासन ने समझौता करा दिया था। चेतावनी दी थी कि गांव में कोई नई परंपरा शुरू नहीं होने दी जाएगी। इसके बाद भी लोग नहीं माने।
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कहीं फिजां खराब न कर दे मझारा
बदायूं। पुलिस की लापरवाही एक बार फिर सामने आई है। अनदेखी के चलते ग्रामसभा की जमीन पर धर्मस्थल बना लिया गया। ग्रामीणों ने विरोध किया, तो पूरे मामले में लीपापोती कर दी गई। सख्त कार्रवाई न होने की वजह से दूसरे पक्ष ने रातों-रात धर्मस्थल का निर्माण कराने की कोशिश की। अब मामला काफी तूल पकड़ चुका है। लोगों ने आशंका जताई है कि अगर पुलिस अब भी लापरवाही बरतती रही, तो मझारा का विवाद जिले की फिजां में जहर घोल सकता है।
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