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और पुलिस ने नहीं मानी डॉक्टरों की सलाह

Mon, 02 Feb 2015 12:11 AM IST
बदायूं
बदायूं Updated Mon, 02 Feb 2015 12:11 AM IST
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And the police did not advise doctors
उझानी कोतवाली पुलिस अपनी हरकतों से लगातार बाज नहीं आ रही है। छात्रा को कोतवाली परिसर के क्वार्टर की छत से फेंकने के आरोपी सिपाही गौरव टाइटलर को पहले बचाने की कोशिश की गई। अब पुलिस ने छात्रा के जीवन से ही खिलवाड़ कर दिया। डॉक्टरों की बिना रजामंदी के पुलिस छात्रा को एंबुलेंस से 164 के बयान दर्ज कराने के लिए कोर्ट ले गई। हालांकि डॉक्टरों ने कहा था कि छात्रा को सामान्य होने में कम से कम तीन सप्ताह का समय लगेगा।
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उझानी कोतवाली के सिपाही गौरव टाइटलर ने 15 जनवरी को छात्रा को अपने क्वार्टर की छत से फेंक दिया था। छात्रा की मां ने अपने दो देवरों के खिलाफ हत्या की कोशिश का मुकदमा दर्ज कराया था। छात्रा के होश में आने पर सच्चाई सामने आई और गौरव के खिलाफ हत्या की कोशिश का मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज कर बर्खास्त कर दिया गया। कुछ दिन बाद विवेचक ने छात्रा के 161 के बयान दर्ज किए, जिसके बाद सिपाही पर रेप की धारा के साथ पाक्सो एक्ट पर तरमीम कर दिया गया।
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छात्रा बरेली के एक निजी अस्पताल में इलाज करा रही थी। उसको मंगलवार को जिला अस्पताल में शिफ्ट कराया गया था। छात्रा के मजिस्ट्रेट के सामने 164 के बयान दर्ज होने थे। इसके लिए पुलिस शनिवार को छात्रा को डॉक्टरों से पूछे बगैर कोर्ट ले गई। वहां उसका एंबुलेंस में ही मजिस्ट्रेट संगीता कुमारी ने 164 का बयान दर्ज किया। बाद में उसे अस्पताल में भर्ती करा दिया गया।
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ये बोले डॉक्टर्स
छात्रा का इलाज कर रहे डॉ. आरएस यादव का कहना है कि उसकी हालत अभी भी गंभीर है। हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. रियाज का कहना है कि छात्रा की रीढ़, सिर और कूल्हे की हड्डी में फ्रैक्चर है। सीएमएस डॉ. एके वर्मा ने बताया कि डॉक्टरों ने सलाह दी थी कि छात्रा को हिलने-डुलने भी न दिया जाए। बावजूद इसके पुलिस डॉक्टर्स की सलाह को नजरअंदाज कर और उनसे बात किए बगैर छात्रा को अस्पताल से कोर्ट ले गई।

उधर उझानी कोतवाल/विवेचक देवराज राठी ने बताया कि छात्रा की मां से रजामंदी ले ली गई थी। उसके बाद ही 164 के बयान दर्ज कराने को उसे कोर्ट ले जाया गया था। डॉक्टर्स से राय नहीं ली गई थी। छात्रा की हालत सामान्य है। बयान समय से दर्ज होने जरूरी थे।

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