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महिलाओं ने निकाली कलश यात्रा, कथा शुरू
Updated Thu, 17 Aug 2017 10:04 AM IST
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उझानी (बदायूं)।
महाराजा अग्रसेन श्रवण कुमार अग्रवाल धर्मशाला में बुधवार से श्रीमद्भागवत कथा शुरू हुई। कथावाचक बाल शास्त्री दीपकृष्ण ने धार्मिक कार्यों का महत्व समझाया। उन्होंने नेक काम करने सलाह भी दी। इससे पहले 108 महिलाओं ने कलश यात्रा निकाली।
कलश यात्रा साहूकारा मोहल्ले में अशोक हलवाई के घर से शुरू हुई। बाजारकलां, साहूकारा, बिल्सी रोड बाजार, घंटाघर चौराहा होकर स्टेशन रोड पर कलश यात्रा का दुकानदारों ने स्वागत किया। पीले कपड़े पहनीं महिलाओं ने कलश मनमोहक अंदाज में सजाए थे। कलश यात्रा के साथ कलाकारों ने बैंडबाजों की धुन पर नृत्य किया। राधाकृष्ण बने कलाकारों ने श्रद्धालुओं को भी झूमने को मजबूर कर दिया। कलश यात्रा धर्मशाला पहुंचकर धार्मिक कार्यक्रम के रूप में विसर्जित हुई।
कथा के पहले बालशास्त्री दीपकृष्ण ने महिलाओं और पुरुषों को ज्ञान की गंगा का अहसास कराया। कहा- इंसान को अपने जीवन में ऐसे काम भी करने चाहिए जो धर्म के प्रचार प्रसार के साथ समाज के लिए भी मिसाल बनें। कथा सुनने से जीवन को नई दिशा मिलती है। कलश यात्रा और कथा के दौरान शिखा, सुषमा सक्सेना, नीलम, रूपा, पुनीता वार्ष्णेय, सुमन, कशिश, चंचल, गीता, मंजू, शिल्पी वार्ष्णेय, जूली, गोपाल, राजेंद्र कुमार, संदीप सदीप सक्सेना, गिरधारी लाल, संजय अग्रवाल, विजय गोपाल आदि मौजूद थे।
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महाराजा अग्रसेन श्रवण कुमार अग्रवाल धर्मशाला में बुधवार से श्रीमद्भागवत कथा शुरू हुई। कथावाचक बाल शास्त्री दीपकृष्ण ने धार्मिक कार्यों का महत्व समझाया। उन्होंने नेक काम करने सलाह भी दी। इससे पहले 108 महिलाओं ने कलश यात्रा निकाली।
कलश यात्रा साहूकारा मोहल्ले में अशोक हलवाई के घर से शुरू हुई। बाजारकलां, साहूकारा, बिल्सी रोड बाजार, घंटाघर चौराहा होकर स्टेशन रोड पर कलश यात्रा का दुकानदारों ने स्वागत किया। पीले कपड़े पहनीं महिलाओं ने कलश मनमोहक अंदाज में सजाए थे। कलश यात्रा के साथ कलाकारों ने बैंडबाजों की धुन पर नृत्य किया। राधाकृष्ण बने कलाकारों ने श्रद्धालुओं को भी झूमने को मजबूर कर दिया। कलश यात्रा धर्मशाला पहुंचकर धार्मिक कार्यक्रम के रूप में विसर्जित हुई।
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कथा के पहले बालशास्त्री दीपकृष्ण ने महिलाओं और पुरुषों को ज्ञान की गंगा का अहसास कराया। कहा- इंसान को अपने जीवन में ऐसे काम भी करने चाहिए जो धर्म के प्रचार प्रसार के साथ समाज के लिए भी मिसाल बनें। कथा सुनने से जीवन को नई दिशा मिलती है। कलश यात्रा और कथा के दौरान शिखा, सुषमा सक्सेना, नीलम, रूपा, पुनीता वार्ष्णेय, सुमन, कशिश, चंचल, गीता, मंजू, शिल्पी वार्ष्णेय, जूली, गोपाल, राजेंद्र कुमार, संदीप सदीप सक्सेना, गिरधारी लाल, संजय अग्रवाल, विजय गोपाल आदि मौजूद थे।
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