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Budaun News: 50 शोधार्थियों और प्राध्यापकों ने किए प्रस्तुत किए शोधपत्र
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बदायूं। शहर के आवास विकास स्थित राजकीय स्नातक महाविद्यालय में वनस्पति व प्राणी विज्ञान विभाग की ओर से रिसेंट ट्रेंडस इन प्लांट एंड एनिमल साइंस (आरटीपीएएस-2025) विषय पर दूसरे दिन तकनीकी सत्र आयोजित किया गया। इसमें देश-विदेश से आए लगभग 50 शोधार्थियों और प्राध्यापकों ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। इस दौरान जैव विविधता संरक्षण, पर्यावरणीय प्रबंधन, नैनो टेक्नोलॉजी, पशु विज्ञान और सतत विकास जैसे विषयों पर व्याख्यान प्रस्तुत किए गए।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी के प्राणी विज्ञान विभाग के प्रो. डॉ. अखिलेंद्र कुमार मौर्य ने हाइपोक्सिया यानी ऑक्सीजन की कमी से मस्तिष्क पर होने वाले प्रभावों पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि इस स्थिति में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ने से स्मृति ह्रास और संज्ञानात्मक क्षमता कम हो जाती है।
चीन के लांझोउ विश्वविद्यालय की प्रो. डॉ. मिनहुई बी ने पौधों की स्टोमेटल विनियमन प्रणाली पर शोध प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि जल उपलब्धता और सूखे की स्थिति में पौधे रंध्र क्रियावली और जल संतुलन के बीच तालमेल बनाकर जीवित रहने की क्षमता बनाए रखते हैं। प्रथम तकनीकी सत्र का संचालन पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ की डॉ. अर्चना चौहान ने किया। द्वितीय सत्र का संचालन हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर मध्य प्रदेश की डॉ. आरती गुप्ता ने किया। राजकीय डिग्री कॉलेज की प्राचार्य डॉ. श्रद्धा गुप्ता ने कहा कि शोध का उद्देश्य सदैव मानव समाज और पर्यावरण के हित में होना चाहिए। आयोजन समिति की संयोजक डॉ. प्रियंका सिंह और डॉ. गौरव कुमार सिंह ने अतिथि वक्ताओं का परिचय कराया। समन्वयक डॉ. सचिन कुमार ने सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार जताया।
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काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी के प्राणी विज्ञान विभाग के प्रो. डॉ. अखिलेंद्र कुमार मौर्य ने हाइपोक्सिया यानी ऑक्सीजन की कमी से मस्तिष्क पर होने वाले प्रभावों पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि इस स्थिति में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ने से स्मृति ह्रास और संज्ञानात्मक क्षमता कम हो जाती है।
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चीन के लांझोउ विश्वविद्यालय की प्रो. डॉ. मिनहुई बी ने पौधों की स्टोमेटल विनियमन प्रणाली पर शोध प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि जल उपलब्धता और सूखे की स्थिति में पौधे रंध्र क्रियावली और जल संतुलन के बीच तालमेल बनाकर जीवित रहने की क्षमता बनाए रखते हैं। प्रथम तकनीकी सत्र का संचालन पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ की डॉ. अर्चना चौहान ने किया। द्वितीय सत्र का संचालन हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर मध्य प्रदेश की डॉ. आरती गुप्ता ने किया। राजकीय डिग्री कॉलेज की प्राचार्य डॉ. श्रद्धा गुप्ता ने कहा कि शोध का उद्देश्य सदैव मानव समाज और पर्यावरण के हित में होना चाहिए। आयोजन समिति की संयोजक डॉ. प्रियंका सिंह और डॉ. गौरव कुमार सिंह ने अतिथि वक्ताओं का परिचय कराया। समन्वयक डॉ. सचिन कुमार ने सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार जताया।
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