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...तो क्या भाषणों तक ही सीमित रहता है मजदूर का दर्द
Updated Wed, 02 May 2018 12:17 AM IST
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...तो क्या भाषणों तक ही सीमित रहता है मजदूर का दर्द
कार्यक्रम करने के बाद मजूदरों की नहीं ली जाती है सुध, शासन की योजनाओं का भी नहीं दिया जाता लाभ
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं।
सारी दुनिया का बोझ हम उठाते हैं...कुली फिल्म का यह गीत कभी-कभी सुनने को मिलता है, लेकिन मजदूर दिवस यानि की एक मई को यह गीत हर उस शख्स की जुबान पर होता है जो कड़ी धूप, लू और बरसात में मेहनत करके अपने परिवार का पालन पोषण करता है। सरकारों को भी मजदूर दिवस पर उनकी याद आती है। नेता लच्छेदार भाषण देकर उनके प्रति झूठी सहानुभूति भी दिखाते हैं। मगर, मजदूरों पर होने वाले जुल्म के समय शायद उन सभी की आंखें बंद होतीं हैं।
एक मई को मजदूर दिवस पर अनेक कार्यक्रम हुए। जहां पर भी कार्यक्रम आयोजित हुए वहां पर वक्ताओं ने मजदूरों के हितों की दुहाई दी। जताने का प्रयास किया कि वहीं उनके सबसे बड़े हितैषी हैं। हालांकि कुछ वक्ताओं ने मजदूरों के लिए चलाई जा रहीं सरकारी योजनाओं का बखान भी किया, लेकिन शायद उन वक्ताओं ने यह जानने की कोशिश नहीं कितने मजदूरों को उनका हक मिल रहा है। क्या सिर्फ उनके लिए योजनाएं ही बनतीं हैं या फिर धरातल पर उनका लाभ मजदूरों को मिल रहा है। शेखूपुर निवासी राजमिस्त्रत्त्ी बलवीर सिंह ने कहा कि वह वर्षों से मजदूरी करते हैं लेकिन कभी उन्हें न सम्मान दिया और न ही शासन की योजनाओं को उन्हें लाभ मिला है। उन्हें तो अपने काम से काम है। पूरे दिन काम करने के बाद शाम को घर लौटते हैं तो बच्चों के बीच पहुंचकर थकान दूर होती है और रात को आराम से सो जाते हैं।
उनौला निवासी मजदूर नन्हें ने कहा कि मजूदर दिवस के बारे में उन्हें कुछ नहीं पता है। आज भी नहीं पता कि कौन से दिवस है। बोले-वह यह जानते हैं कि मजदूरी करेंगे तभी परिवार का पालन पोषण होगा। कहा कि समाज में बहुत से ऐसे लोग भी हैं जो मजदूरों का दर्द तक नहीं समझते हैं और उनकी दिन भर की दिहाड़ी तक को अगले दिन तक के लिए रोक लेते हैं। इसी तरह कुछ और मजदूरों ने अपनी बात को दोहराया। कहा कि यह सब बेकार की बातें हैं कि आज मजदूर दिवस है। बोले-वह तब समझें कि एक दिन बिना काम के उन्हें दिहाड़ी दे दी जाए। उन्हें तो रोज की तरह ही गर्मी में पसीना बहाना है।
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फोटो-49,50
चतुर्थ श्रेणी कर्मियों को दिए उपहार
बदायूं। टिथोनस इंटरनेशनल स्कूल में मई दिवस पर सभी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और वाहनों के चालकों व हेल्पर को उपहार देकर शुभकामनाएं दीं।
विद्यालय के संरक्षक अजीत गुप्ता ने कहा कि किसी भी संस्थान में सहयोगी स्टाफ की बेहद महत्वपूर्ण भूमिका होती है। वह संस्थान की रीढ़ की हड्डी होते हैं। प्रधानाचार्य डॉ. श्यामेश ने कहा कि समाज में प्रत्येक वर्ग की भूमिका महत्वपूर्ण है। समाज निर्माण में यदि मजदूर वर्ग की भूमिका को हटा दिया जाए तो स्वस्थ समाज की कल्पना ही असंभव है। इसलिए हमें अपने सहयोगी स्टाफ की कठिनाइयों को ध्यान में रखकर उनकी मदद करनी चाहिए।
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पुरानी पेेंशन बहाली की मांग
बदायूं। उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने प्रांतीय मजदूर दिवस पर कर्मचारियों के लिए सरकार से पुरानी पेंशन की बहाली की मांग की। आंबेडकर पार्क में हुए कार्यक्रम में वक्ताओं ने भूतपूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय हेमवती बहुगणा द्वारा कर्मचारी समाज को दी गई उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। शैलेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि नवीन पेंशन योजना को तत्काल समाप्त कर पुरानी पेंशन योजना को बहाल किया जाए। नवीन पेंशन योजना से कर्मचारियों को कोई लाभ नहीं है। रैली निकालकर सभा का समापन किया गया। इस मौके पर मदनलाल सैनी, प्रेमप्रकाश पांडेय, अशोक कुमार, सरोज कुमारी यादव, सोमपाल सिंह, सतीश कुमार, हरिप्रसन्न शर्मा, प्रदीप कुमार सक्सेना मौजूद रहे।
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श्रमिकों की योजनाओं पर प्रकाश डाला
बदायूं। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से राजकीय मेडिकल कॉलेज में श्रमिक गोष्ठी का आयोजन किया गया। अध्यक्षता प्राधिकरण के सचिव राकेश कुमार तिवारी ने की। श्रम प्रवर्तन अधिकारी केके सिंह ने श्रमिकों की योजनाओं पर प्रकाश डाला। कहा कि जिन श्रमिकों ने अपना पंजीकरण नहीं कराया है, वह पंजीयन करा लें। तभी वह शासकीय योजनाओं का लाभ पा सकते हैं। कॉलेज के प्राचार्य डॉ.आरपी सिंह, डॉ.मंजीत सिंह, तहसीलदाल राजेंद्र प्रसाद चौधरी ने विचार व्यक्त किए।
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स्वयं सेविकाओं ने मनाया मजदूर दिवस
बदायूं। गिंदो देवी महिला महाविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना प्रथम इकाई की ओर से मजदूर दिवस मनाया गया।
कार्यक्रम अधिकारी सरला चक्रवर्ती ने बताया कि आज के दिन शिकागो शहर में मजदूरों ने एक लंबा आंदोलन किया था। 12 घंटे के काम को आठ घंटे में पूरा कर दिया था। तभी से एक मई को मजदूर दिवस मनाया जाता है। प्राचार्य डॉ. साधना अग्रवाल ने कहा कि किसी भी देश व समाज के निर्माण में मजदूरों का महत्वपूर्ण योगदान होता है। श्रमिक देश की धरोहर होते है। डॉ गार्गी बुलबुल ने कहा कि हम केवल पैसा कमाने के लिए काम नहीं करते है।
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‘देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं श्रमिक’
बदायूं। ऐस (पीजी) इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलोजी में सोमवार को अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस मनाया गया। इस मौके पर कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. मनोज अग्रवाल व निदेशक रचित गोयल ने कहा किसी देश का विकास उसमें रहने वाले किसानों और श्रमिकों पर निर्भर करता है। अंत में महाविद्यालय के चतुर्थ श्रेणी श्रमिकों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर प्रवक्ता अफसार अहमद, डॉ. रूमाना असलम, डॉ. नेहा शर्मा, डॉ. योगेश चौधरी मौजूद रहेे।
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कार्यक्रम करने के बाद मजूदरों की नहीं ली जाती है सुध, शासन की योजनाओं का भी नहीं दिया जाता लाभ
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं।
सारी दुनिया का बोझ हम उठाते हैं...कुली फिल्म का यह गीत कभी-कभी सुनने को मिलता है, लेकिन मजदूर दिवस यानि की एक मई को यह गीत हर उस शख्स की जुबान पर होता है जो कड़ी धूप, लू और बरसात में मेहनत करके अपने परिवार का पालन पोषण करता है। सरकारों को भी मजदूर दिवस पर उनकी याद आती है। नेता लच्छेदार भाषण देकर उनके प्रति झूठी सहानुभूति भी दिखाते हैं। मगर, मजदूरों पर होने वाले जुल्म के समय शायद उन सभी की आंखें बंद होतीं हैं।
एक मई को मजदूर दिवस पर अनेक कार्यक्रम हुए। जहां पर भी कार्यक्रम आयोजित हुए वहां पर वक्ताओं ने मजदूरों के हितों की दुहाई दी। जताने का प्रयास किया कि वहीं उनके सबसे बड़े हितैषी हैं। हालांकि कुछ वक्ताओं ने मजदूरों के लिए चलाई जा रहीं सरकारी योजनाओं का बखान भी किया, लेकिन शायद उन वक्ताओं ने यह जानने की कोशिश नहीं कितने मजदूरों को उनका हक मिल रहा है। क्या सिर्फ उनके लिए योजनाएं ही बनतीं हैं या फिर धरातल पर उनका लाभ मजदूरों को मिल रहा है। शेखूपुर निवासी राजमिस्त्रत्त्ी बलवीर सिंह ने कहा कि वह वर्षों से मजदूरी करते हैं लेकिन कभी उन्हें न सम्मान दिया और न ही शासन की योजनाओं को उन्हें लाभ मिला है। उन्हें तो अपने काम से काम है। पूरे दिन काम करने के बाद शाम को घर लौटते हैं तो बच्चों के बीच पहुंचकर थकान दूर होती है और रात को आराम से सो जाते हैं।
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उनौला निवासी मजदूर नन्हें ने कहा कि मजूदर दिवस के बारे में उन्हें कुछ नहीं पता है। आज भी नहीं पता कि कौन से दिवस है। बोले-वह यह जानते हैं कि मजदूरी करेंगे तभी परिवार का पालन पोषण होगा। कहा कि समाज में बहुत से ऐसे लोग भी हैं जो मजदूरों का दर्द तक नहीं समझते हैं और उनकी दिन भर की दिहाड़ी तक को अगले दिन तक के लिए रोक लेते हैं। इसी तरह कुछ और मजदूरों ने अपनी बात को दोहराया। कहा कि यह सब बेकार की बातें हैं कि आज मजदूर दिवस है। बोले-वह तब समझें कि एक दिन बिना काम के उन्हें दिहाड़ी दे दी जाए। उन्हें तो रोज की तरह ही गर्मी में पसीना बहाना है।
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चतुर्थ श्रेणी कर्मियों को दिए उपहार
बदायूं। टिथोनस इंटरनेशनल स्कूल में मई दिवस पर सभी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और वाहनों के चालकों व हेल्पर को उपहार देकर शुभकामनाएं दीं।
विद्यालय के संरक्षक अजीत गुप्ता ने कहा कि किसी भी संस्थान में सहयोगी स्टाफ की बेहद महत्वपूर्ण भूमिका होती है। वह संस्थान की रीढ़ की हड्डी होते हैं। प्रधानाचार्य डॉ. श्यामेश ने कहा कि समाज में प्रत्येक वर्ग की भूमिका महत्वपूर्ण है। समाज निर्माण में यदि मजदूर वर्ग की भूमिका को हटा दिया जाए तो स्वस्थ समाज की कल्पना ही असंभव है। इसलिए हमें अपने सहयोगी स्टाफ की कठिनाइयों को ध्यान में रखकर उनकी मदद करनी चाहिए।
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पुरानी पेेंशन बहाली की मांग
बदायूं। उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने प्रांतीय मजदूर दिवस पर कर्मचारियों के लिए सरकार से पुरानी पेंशन की बहाली की मांग की। आंबेडकर पार्क में हुए कार्यक्रम में वक्ताओं ने भूतपूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय हेमवती बहुगणा द्वारा कर्मचारी समाज को दी गई उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। शैलेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि नवीन पेंशन योजना को तत्काल समाप्त कर पुरानी पेंशन योजना को बहाल किया जाए। नवीन पेंशन योजना से कर्मचारियों को कोई लाभ नहीं है। रैली निकालकर सभा का समापन किया गया। इस मौके पर मदनलाल सैनी, प्रेमप्रकाश पांडेय, अशोक कुमार, सरोज कुमारी यादव, सोमपाल सिंह, सतीश कुमार, हरिप्रसन्न शर्मा, प्रदीप कुमार सक्सेना मौजूद रहे।
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श्रमिकों की योजनाओं पर प्रकाश डाला
बदायूं। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से राजकीय मेडिकल कॉलेज में श्रमिक गोष्ठी का आयोजन किया गया। अध्यक्षता प्राधिकरण के सचिव राकेश कुमार तिवारी ने की। श्रम प्रवर्तन अधिकारी केके सिंह ने श्रमिकों की योजनाओं पर प्रकाश डाला। कहा कि जिन श्रमिकों ने अपना पंजीकरण नहीं कराया है, वह पंजीयन करा लें। तभी वह शासकीय योजनाओं का लाभ पा सकते हैं। कॉलेज के प्राचार्य डॉ.आरपी सिंह, डॉ.मंजीत सिंह, तहसीलदाल राजेंद्र प्रसाद चौधरी ने विचार व्यक्त किए।
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स्वयं सेविकाओं ने मनाया मजदूर दिवस
बदायूं। गिंदो देवी महिला महाविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना प्रथम इकाई की ओर से मजदूर दिवस मनाया गया।
कार्यक्रम अधिकारी सरला चक्रवर्ती ने बताया कि आज के दिन शिकागो शहर में मजदूरों ने एक लंबा आंदोलन किया था। 12 घंटे के काम को आठ घंटे में पूरा कर दिया था। तभी से एक मई को मजदूर दिवस मनाया जाता है। प्राचार्य डॉ. साधना अग्रवाल ने कहा कि किसी भी देश व समाज के निर्माण में मजदूरों का महत्वपूर्ण योगदान होता है। श्रमिक देश की धरोहर होते है। डॉ गार्गी बुलबुल ने कहा कि हम केवल पैसा कमाने के लिए काम नहीं करते है।
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‘देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं श्रमिक’
बदायूं। ऐस (पीजी) इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलोजी में सोमवार को अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस मनाया गया। इस मौके पर कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. मनोज अग्रवाल व निदेशक रचित गोयल ने कहा किसी देश का विकास उसमें रहने वाले किसानों और श्रमिकों पर निर्भर करता है। अंत में महाविद्यालय के चतुर्थ श्रेणी श्रमिकों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर प्रवक्ता अफसार अहमद, डॉ. रूमाना असलम, डॉ. नेहा शर्मा, डॉ. योगेश चौधरी मौजूद रहेे।