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विद्युत निगम और पुलिस का करिश्मा

Fri, 07 Oct 2016 12:29 AM IST
अमर उजाला/ब्यूरो
अमर उजाला/ब्यूरो Updated Fri, 07 Oct 2016 12:29 AM IST
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बिजनौर में  विद्युत निगम की टीम ने चेकिंग से करीब साढ़े तीन साल पहले मर चुके व्यक्ति के खिलाफ ही बिजली चोरी की रिपोर्ट दर्ज करा दी। पुलिस विवेचना में आईओ ने भी आरोपी बनाए गए मृतक का बयान दर्ज दिखाकर चार्जशीट अदालत में दाखिल कर दी। यह मामला पकड़ में आने पर स्पेशल जज आलोक पाराशर ने चेकिंग टीम के सदस्यों और विवेचक से 14 अक्तूबर को स्पष्टीकरण मांगा है। अदालत के आदेश की प्रति एसपी व निगम के उच्चाधिकारियों को भेजी गई है।
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डीएम के निर्देश पर 18 जनवरी 2016 को विद्युत निगम की चेकिंग टीम के सदस्य एसडीओ अशोक कुमार, राहुल गौतम व प्रियदर्शी गौतम, जेई सुधीर कुमार, कुलदीप कुमार, देवेंद्र यादव, पीएस राणा, ब्रह्मपाल सिंह व दीपक कुमार की टीम ने नजीबाबाद में चेकिंग अभियान चलाया था। बिजली चोरी मिलने पर कुछ उपभोक्ताओं के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। बिजली चोरी में रफीक पुत्र मुन्ना निवासी मोहल्ला बांसफोड़ान का नाम भी शामिल किया गया था। चोरी की रिपोर्ट दर्ज होने के बाद इसकी विवेचना थाना नजीबाबाद के दरोगा वीरेंद्र सिंह द्वारा की गई। उन्होंने 22 मार्च 2016 को विवेचना के दौरान यह अंकित किया कि थाने पर नामजद आरोपी रफीक उपस्थित हुआ और उसका बयान लिखा गया। 
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 दरोगा ने विवेचना में लिखा कि रफीक ने जुर्म करने से इंकार किया और अदालत में सफाई पेश करने की बात कही। रफीक पर नोटिस तामील करने का भी उल्लेख कर चार्जशीट कोर्ट में पेश कर दी। कोर्ट द्वारा पेशी के लिए रफीक का समन जाने पर परिवार वाले दंग रह गए। उन्होंने कोर्ट को अवगत कराया कि रफीक की मृत्यु 27 मई 2012 को हो चुकी है। मृत्यु के बारे में नजीबाबाद थाने को जांच भेजी गई, तो नजीबाबाद पुलिस ने मृत्यु प्रमाण पत्र के साथ रिपोर्ट दी कि रफीक की मृत्यु 27 मई 2012 को हो गई है। कोर्ट ने इस मामले में माना कि रफीक की मृत्यु चेकिंग की दिनांक से करीब साढ़े तीन साल पहले हो गई थी।
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 ऐसे में वह बिजली चोरी कैसे कर सकता है। कोर्ट ने अपने आदेश में लिखा है कि तथ्यों से स्पष्ट है कि निगम के अधिकारियों व कर्मचारियों ने मृत व्यक्ति को जीवित दिखाकर उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई और विवेचक द्वारा भी मृत व्यक्ति को जीवित दिखाकर उसके बयान दर्ज दिखाकर न्यायालय को           गुमराह करने के उद्देश्य   से चार्जशीट दाखिल की। 

कोर्ट ने अपने नोटिस में कहा है कि चेकिंग टीम और आईओ न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर यह स्पष्ट करें कि उनके द्वारा मृतक रफीक के विरुद्ध क्यों व किन परिस्थितियों में मुकदमा पंजीकृत कराया गया। साथ ही आईओ वीरेंद्र सिंह द्वारा किन परिस्थितियों में मृतक के बयान दर्ज दर्शाकर चार्जशीट न्यायालय में पेश की गई।
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