{"_id":"625078e077d4fd69cd40fbbe","slug":"answer-sought-from-the-municipality-for-not-getting-chlorine-in-the-water-bijnor-news-mrt5837435106","type":"story","status":"publish","title_hn":"पानी में क्लोरीन न मिलने पर पालिका से मांगा जवाब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पानी में क्लोरीन न मिलने पर पालिका से मांगा जवाब
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पानी में क्लोरीन न मिलने पर पालिका से मांगा जवाब
बिजनौर। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शहर में 10 जगहों से पानी के नमूने लिए, जो फेल पाए गए। फेल हुए सभी नमूनों में क्लोरीन नहीं मिला है। जिसके चलते स्वास्थ्य विभाग की ओर से नगरपालिका को इस संबंध में पत्र भेजा गया है। जिसमें क्लोरीन न मिलने को लेकर जवाब मांगा गया है।
डीएम ऑफिस सहित शहर में नौ जगहों से पानी के नमूने स्वास्थ्य विभाग की टीम ने लिए थे। इस दौरान सभी जगहों के नमूने फेल आए। इसमें क्लोरीन नहीं होना बताया गया है, जो पानी के अंदर मौजूद बैक्टीरिया और वायरस को मारता है। इसके साथ ही दो जगह डोजर प्लॉट खराब मिला। पांच जगह डोजर प्लॉट बंद पाया गया, जो टीम के आने के बाद चलाया गया। इसके साथ ही एक ट्यूबवेल बंद पाया गया। एक डोजर प्लॉट में क्लोरीन नहीं पाई गई। इसके साथ ही साल 2021 में शहर में छह जगहों से पानी के नमूने लिए थे। इस दौरान भी पानी में क्लोरीन नहीं पाया गया था। अब पानी में क्लोरीन न मिलने के बाद इसकी जानकारी नगरपालिका से मांगी गई है।
पानी में इसलिए जरूरी है क्लोरीन
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. आरएस वर्मा ने बताया कि पानी का क्लोरीन न होने से उसमें मौजूद वायरस, बैक्टीरिया मनुष्य के अंदर चले जाते हैं। जिसकी वजह से व्यक्ति को उल्टी, दस्त, बच्चों को डायरिया, जाइनडिस, हेपेटाइटिस सी, मयादी बुखार आदि समस्या हो जाती हैं। इसलिए पानी में क्लोरीन जरूर होना चाहिए। एसीएमओ डॉ. शैलेश जैन ने बताया कि पानी के नमूने फेल होने के बाद इसकी जानकारी नगरपालिका को दी गई। जांच के दौरान सभी डोजर प्लॉट बंद मिले। जिला मलेरिया अधिकारी आशुतोष सिंह ने बताया कि 10 दिन बाद फिर से पानी के नमूने लिए जाएंगे। नगरपालिका ईओ विकास कुमार ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग से जांच रिपोर्ट मिलने के बाद कमी को तुरंत दूर किया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
बिजनौर। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शहर में 10 जगहों से पानी के नमूने लिए, जो फेल पाए गए। फेल हुए सभी नमूनों में क्लोरीन नहीं मिला है। जिसके चलते स्वास्थ्य विभाग की ओर से नगरपालिका को इस संबंध में पत्र भेजा गया है। जिसमें क्लोरीन न मिलने को लेकर जवाब मांगा गया है।
डीएम ऑफिस सहित शहर में नौ जगहों से पानी के नमूने स्वास्थ्य विभाग की टीम ने लिए थे। इस दौरान सभी जगहों के नमूने फेल आए। इसमें क्लोरीन नहीं होना बताया गया है, जो पानी के अंदर मौजूद बैक्टीरिया और वायरस को मारता है। इसके साथ ही दो जगह डोजर प्लॉट खराब मिला। पांच जगह डोजर प्लॉट बंद पाया गया, जो टीम के आने के बाद चलाया गया। इसके साथ ही एक ट्यूबवेल बंद पाया गया। एक डोजर प्लॉट में क्लोरीन नहीं पाई गई। इसके साथ ही साल 2021 में शहर में छह जगहों से पानी के नमूने लिए थे। इस दौरान भी पानी में क्लोरीन नहीं पाया गया था। अब पानी में क्लोरीन न मिलने के बाद इसकी जानकारी नगरपालिका से मांगी गई है।
विज्ञापन
पानी में इसलिए जरूरी है क्लोरीन
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. आरएस वर्मा ने बताया कि पानी का क्लोरीन न होने से उसमें मौजूद वायरस, बैक्टीरिया मनुष्य के अंदर चले जाते हैं। जिसकी वजह से व्यक्ति को उल्टी, दस्त, बच्चों को डायरिया, जाइनडिस, हेपेटाइटिस सी, मयादी बुखार आदि समस्या हो जाती हैं। इसलिए पानी में क्लोरीन जरूर होना चाहिए। एसीएमओ डॉ. शैलेश जैन ने बताया कि पानी के नमूने फेल होने के बाद इसकी जानकारी नगरपालिका को दी गई। जांच के दौरान सभी डोजर प्लॉट बंद मिले। जिला मलेरिया अधिकारी आशुतोष सिंह ने बताया कि 10 दिन बाद फिर से पानी के नमूने लिए जाएंगे। नगरपालिका ईओ विकास कुमार ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग से जांच रिपोर्ट मिलने के बाद कमी को तुरंत दूर किया जाएगा।
विज्ञापन