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Bijnor News: मानदेय की रार... अस्पताल से लौट गए बीमार
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बिजनौर में मेडिकल कॉलेज आउटसोर्सिग कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान इंतजार करते मरीज। संवाद
- फोटो : हांसी के जिला सचिवालय में समाधान शिविर में शिकायते सुनते एसडीएम। स्रोत : प्रशासन
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बिजनौर। मेडिकल कॉलेज में तीन माह का मानदेय नहीं मिलने पर आउटसोर्स कर्मचारियों ने बृहस्पतिवार को धरना प्रदर्शन किया। हड़ताल की वजह से मरीजों के इलाज में परेशानी हुई। अधिकांश मरीज अस्पताल की दहलीज से बिना परामर्श और दवाई लिए ही लौट गए। करीब चार घंटे कर्मचारियों की हड़ताल से अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई।
मेडिकल कॉलेज में वीआरजीआर कंपनी के माध्यम से करीब 135 आउटसोर्स कर्मचारी कार्य कर रहे हैं। इन कर्मचारियों का मई माह से मानदेय नहीं मिला। मानदेय को लेकर पहले भी कर्मचारियों ने हड़ताल की थी लेकिन आश्वासन के बाद धरना समाप्त कर दिया गया था। बृहस्पतिवार तक उनके खातों में पैसा नहीं पहुंचा। रक्षाबंधन से पहले मानदेय नहीं मिलने से परेशान कर्मचारियों ने बृहस्पतिवार सुबह हड़ताल कर दी, जिसका असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा। पर्चा काउंटर बंद रहा।
अधिकांश मरीज बिना दवाई लिए ही वापस चले गए। एक तरफ कर्मचारी धरने पर बैठे थे वहीं दूसरी तरफ मरीज और उनके तीमारदार पर्चा बनने के इंतजार में बैठे नजर आए। मेडिकल कॉलेज प्रशासन के आश्वासन के बाद कर्मचारियों ने दोपहर 12 बजे धरना समाप्त किया। इस मौके पर अनुज सैनी, रोहित, रितिक, साक्षी, रितु, विशाल, हेमंत कुमार, गौरव कुमार, रंजीत, योगेंद्र पाल, विरेंद्र सिंह, सोहित आदि रहे।
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ओपीडी कक्ष में पहुंचाए गए पर्चे : हड़ताल होने से पंजीकरण काउंटर बंद था। ऐसे में मरीजों को परेशानी हुई क्योंकि, बिना पर्चे के चिकित्सक ने मरीजों को देखने से इंकार कर दिया। इसके बाद चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. सुनील मलिक और मैनेजर डॉ. शोभिता ने ओपीडी पर्चे चिकित्सकों के कक्ष में पहुंचा दिए। ऐसे में बृहस्पतिवार को केवल 300 मरीजों के पंजीकरण हुए। हालांकि, कुछ मरीजों को बिना पर्चे के परामर्श दिया गया।
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मेडिकल कॉलेज में वीआरजीआर कंपनी के माध्यम से करीब 135 आउटसोर्स कर्मचारी कार्य कर रहे हैं। इन कर्मचारियों का मई माह से मानदेय नहीं मिला। मानदेय को लेकर पहले भी कर्मचारियों ने हड़ताल की थी लेकिन आश्वासन के बाद धरना समाप्त कर दिया गया था। बृहस्पतिवार तक उनके खातों में पैसा नहीं पहुंचा। रक्षाबंधन से पहले मानदेय नहीं मिलने से परेशान कर्मचारियों ने बृहस्पतिवार सुबह हड़ताल कर दी, जिसका असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा। पर्चा काउंटर बंद रहा।
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अधिकांश मरीज बिना दवाई लिए ही वापस चले गए। एक तरफ कर्मचारी धरने पर बैठे थे वहीं दूसरी तरफ मरीज और उनके तीमारदार पर्चा बनने के इंतजार में बैठे नजर आए। मेडिकल कॉलेज प्रशासन के आश्वासन के बाद कर्मचारियों ने दोपहर 12 बजे धरना समाप्त किया। इस मौके पर अनुज सैनी, रोहित, रितिक, साक्षी, रितु, विशाल, हेमंत कुमार, गौरव कुमार, रंजीत, योगेंद्र पाल, विरेंद्र सिंह, सोहित आदि रहे।
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ओपीडी कक्ष में पहुंचाए गए पर्चे : हड़ताल होने से पंजीकरण काउंटर बंद था। ऐसे में मरीजों को परेशानी हुई क्योंकि, बिना पर्चे के चिकित्सक ने मरीजों को देखने से इंकार कर दिया। इसके बाद चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. सुनील मलिक और मैनेजर डॉ. शोभिता ने ओपीडी पर्चे चिकित्सकों के कक्ष में पहुंचा दिए। ऐसे में बृहस्पतिवार को केवल 300 मरीजों के पंजीकरण हुए। हालांकि, कुछ मरीजों को बिना पर्चे के परामर्श दिया गया।