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Bijnor News: भाजपा नेता की समाधि तोड़े जाने का आरोप

Sun, 21 Jun 2026 12:39 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 21 Jun 2026 12:39 AM IST
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Allegations of demolition of BJP leader's tomb
स्योहारा। क्षेत्र के ग्राम अमीनाबाद निवासी सुभाष ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर कहा कि उनके दिवंगत पिता एवं जनसंघ से लेकर भाजपा तक पार्टी की सेवा करने वाले वरिष्ठ नेता जगदीश सिंह गुजर की समाधि को चकबंदी प्रक्रिया के दौरान ध्वस्त कर दिया गया। न्यायालय से पक्ष में फैसला मिलने के बावजूद समाधि और नलकूप को नुकसान पहुंचाया गया। इससे आहत परिवार ने न्याय न मिलने पर हिंदू धर्म त्यागकर मुस्लिम धर्म अपनाने की चेतावनी दी है।
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उन्होंने बताया कि उनके पिता जगदीश सिंह गुर्जर वर्ष 1968 से जनसंघ, जनता पार्टी और बाद में भाजपा से जुड़े रहे। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान जिला बीस सूत्रीय कार्यकारिणी सदस्य के रूप में भी पार्टी की सेवा की थी। पत्र के अनुसार, जगदीश सिंह की कृषि भूमि मौजा वजीरपुर बी.ए. में स्थित थी। उनकी अंतिम इच्छा थी कि मृत्यु के बाद उनकी समाधि भूमि संख्या 374 पर बनाई जाए। परिवार ने उनकी इच्छा के अनुरूप वहां समाधि और नलकूप का निर्माण कराया था। आरोप है कि बाद में शुरू हुई चकबंदी प्रक्रिया के दौरान कुछ लोगों ने समाधि और नलकूप पर कब्जा करने की नीयत से अधिकारियों से सांठगांठ की।
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इसके विरोध में परिवार ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। करीब तीन वर्ष तक चली कानूनी लड़ाई के बाद न्यायालय ने परिवार के पक्ष में फैसला सुनाते हुए समाधि और नलकूप को मूल जोत संख्या 374 के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में स्थापित करने का आदेश दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि 14 मई 2026 को चकबंदी के बाद खेतों का कब्जा सौंपने की प्रक्रिया के दौरान उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई। बाद में पता चला कि उनकी भूमि संख्या 376 को ग्राम समाज की भूमि में दर्ज कर दिया गया है। वहीं उनकी अन्य भूमि के नए नंबर आवंटित कर दिए गए, लेकिन मौके पर नापजोख कर कब्जा नहीं दिया गया उल्टा उन पर सरकारी भूमि पर खेती करने का आरोप लगाते हुए उनकी फसल नष्ट कर खेत से चकमार्ग निकाल दिया गया। साथ ही उनकी पिता की समाधि को भी तोड़ दिया गया तथा नलकूप और भूमि उन लोगों को सौंप दी गई, जिन्होंने पहले उस पर कब्जा करने का प्रयास किया था।
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उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि परिवार के खिलाफ कई मुकदमे दर्ज करा दिए गए हैं। उन्होंने लेखपाल इरशाद अहमद पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यदि प्रशासन और राजस्व विभाग न्यायालय के आदेशों का सम्मान नहीं कर सकते तथा हिंदू आस्था से जुड़े स्थल सुरक्षित नहीं रह सकते, तो उनका परिवार हिंदू धर्म त्यागकर मुस्लिम धर्म अपनाने को मजबूर होगा।

सभी आरोप निराधार हैं। सरकारी चकरोड की भूमि पर अवैध कब्जा हटाकर अन्य गरीब लोगों को उनका रास्ता व उनका हक दिलाया गया है।- विजय सिंह, नायब तहसीलदार धामपुर
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