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माल भुगतान न करने वाले की जमानत अर्जी खारिज
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भदोही। दिसंबर 2016 के एक मामले में जनपद के एक कालीन व्यवसायी से लगभग 19.50 लाख रुपये के कालीन लेकर भुगतान नहीं करने के मामले के आरोपी की जमानत अर्जी सत्र न्यायाधीश जिला जज नसीर अहमद ने खारिज कर दी। नौ जनवरी को आरोपी राशिद की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश ने कहा कि आरोपी ने माल प्राप्ति की रसीद के साथ साथ 5.71 लाख का चेक भी दिया था, जो बाउंस हो गया। ऐसे में मामला गंभीर प्रवृत्ति का हो जाता है और जमानत नहीं दी जा सकती।
मामले के वादी असहाम रग्स के संचालक अनवर अली का भदोही ब्लाक के सरोई में कारोबार है। उन्होंने भदोही कोतवाली में दर्ज मुकदमे में बताया कि घोसिया निवासी राशिद और शाहिद ने दिसंबर 2016 में उनके यहां आकर 19.54 लाख के कालीन बनाने के आर्डर दिए थे जिसकी तैयारी के बाद वे जनवरी 2017 में स्वयं पैक कराकर अपने साधन से नई दिल्ली ले गए थे। बदले में 5.71 लाख का चेक देते हुए बाकी भुगतान नई दिल्ली पहुंच कर करने को कहा था। लेकिन उन्होंने जो चेक दिया था वह बाउंस तो हुआ ही, साथ ही बाकी का भुगतान भी देने से कतराते रहे। इस संबंध में तगादा करते करते थक हार कर अनवर अली ने दोनो के विरुद्ध भदोही कोतवाली में मुकदमा पंजीकृत कराया था। मुकदमा दर्ज होने के बाद दबाव पड़ने पर राशिद ने सरेंडर कर दिया था
नौ जनवरी को उसने सत्र न्यायाधीश न्यायालय में जमानत अर्जी दी, जिस पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश ने कहा कि आरोपी 178 पीस कालीन ले गए। जो चेक दिया, वह बाउंस हो गया। साथ ही बाकी का भुगतान अब तक नहीं हुआ, जिससे मामला गंभीर प्रवृत्ति का लगता है। ऐसे में जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त करने के योग्य है। उल्लेखनीय है कि दोनों आरोपी आपस में भाई हैं और भदोही से कालीन ले जाकर नई दिल्ली में कारोबार करते हैं। इसमें से दूसरा आरोपी अभी पुलिस की पकड़ से बाहर है।
मामले के वादी असहाम रग्स के संचालक अनवर अली का भदोही ब्लाक के सरोई में कारोबार है। उन्होंने भदोही कोतवाली में दर्ज मुकदमे में बताया कि घोसिया निवासी राशिद और शाहिद ने दिसंबर 2016 में उनके यहां आकर 19.54 लाख के कालीन बनाने के आर्डर दिए थे जिसकी तैयारी के बाद वे जनवरी 2017 में स्वयं पैक कराकर अपने साधन से नई दिल्ली ले गए थे। बदले में 5.71 लाख का चेक देते हुए बाकी भुगतान नई दिल्ली पहुंच कर करने को कहा था। लेकिन उन्होंने जो चेक दिया था वह बाउंस तो हुआ ही, साथ ही बाकी का भुगतान भी देने से कतराते रहे। इस संबंध में तगादा करते करते थक हार कर अनवर अली ने दोनो के विरुद्ध भदोही कोतवाली में मुकदमा पंजीकृत कराया था। मुकदमा दर्ज होने के बाद दबाव पड़ने पर राशिद ने सरेंडर कर दिया था
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नौ जनवरी को उसने सत्र न्यायाधीश न्यायालय में जमानत अर्जी दी, जिस पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश ने कहा कि आरोपी 178 पीस कालीन ले गए। जो चेक दिया, वह बाउंस हो गया। साथ ही बाकी का भुगतान अब तक नहीं हुआ, जिससे मामला गंभीर प्रवृत्ति का लगता है। ऐसे में जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त करने के योग्य है। उल्लेखनीय है कि दोनों आरोपी आपस में भाई हैं और भदोही से कालीन ले जाकर नई दिल्ली में कारोबार करते हैं। इसमें से दूसरा आरोपी अभी पुलिस की पकड़ से बाहर है।
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