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भरथापुर के कटान रोकने वाले तीन कटर नदी में बहे
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विक्रमजोत क्षेत्र के भरथापुर में बाढ़ के दौरान हुई कटान। संवाद
- फोटो : BASTI
भरथापुर के कटान रोकने वाले तीन कटर नदी में बहे
बस्ती। सरयू नदी के तटवर्ती गांवों से बाढ़ का पानी उतर चुका है। बाढ़ से नुकसान साफ तौर पर देखे जा सकता है। विक्रमजोत क्षेत्र के भरथापुर में कटान रोकने के लिए बनाए गए तीन कटर, गांव का रास्ता नदी में बह गया। वहीं संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा बढ़ गया है।
स्थानीय निवासी जिंतेंद्र सिंह, हेमंत पांडेय, केशव चंद पांडेय, अभिषेक शर्मा आदि ने बताया कि नदी में बहा कुंआ मांगलिक कार्यों के उपयोग किया जाता था। घरों में पानी भरने से गृहस्थी का सारा सामान खराब हो गया है। गांव की सुरक्षा के लिए बनाया गया अस्थायी रिंगबांध बाढ़ में क्षतिग्रस्त हो चुका है।
दुबौलिया प्रतिनिधि के अनुसार, सुविखा बाबू गांव के लोग अभी भी तटबंध पर शरण लिए हुए हैं। अब ग्रामीणों को संक्रमण फैलने का डर सता रहा है। बरदियालोहार ग्राम पंचायत निवासी सूर्य प्रताप चौहान ने बताया कि अब तक स्वास्थ्य विभाग की टीम हमारे यहां नहीं पहुंची। बिजली आपूर्ति भी अभी बहाल नहीं की गई है। अशोकपुर ग्राम पंचायत के शैलेंद्र प्रताप चौहान ने बताया कि पानी उतरने के बाद संक्रमण का खतरा बना हुआ है। स्वास्थ्य विभाग की टीम भी अब तक गांवों में नहीं पहुंची। यही हाल पूरेमोतीराम गांव का भी है। रविवार को नदी का जलस्तर 93.08 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान करीब 35 सेंटीमीटर ऊपर है।
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जिस नाव में सवार थे विधायक, एडीएम व एसडीएम, उसमें हो गया छेद
विक्रमजोत। क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांव माझाकिता अव्वल में रविवार को विधायक अजय सिंह, एडीएम कमलेश चंद्र व एसडीएम हर्रैया गुलाब चंद्र लंच पैकेट व राहत सामग्री लेकर नाव से जा रहे थे। दलपतपुर माझा के पास नाव नीचे से किसी मजबूत चीज से टकरा गई, जिससे उसमें छेद हो गया। नाव में पानी भरता देख विधायक ने सूझबूझ का परिचय दिया। उन्होंने नाविक को नाव नदी के बीच टापू पर ले चलने के लिए कहा और खुद बाल्टी लेकर पानी निकालने लगे। जैसे-तैसे नाव टापू पर पहुंची। तब जाकर सभी ने राहत की सांस ली। विधायक ने बताया कि सभी सुरक्षित हैं। मौके पर नायब तहसीलदार हर्रैया निखिलेश चौधरी व अन्य राजस्व कर्मी मौजूद रहे। संवाद
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बस्ती। सरयू नदी के तटवर्ती गांवों से बाढ़ का पानी उतर चुका है। बाढ़ से नुकसान साफ तौर पर देखे जा सकता है। विक्रमजोत क्षेत्र के भरथापुर में कटान रोकने के लिए बनाए गए तीन कटर, गांव का रास्ता नदी में बह गया। वहीं संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा बढ़ गया है।
स्थानीय निवासी जिंतेंद्र सिंह, हेमंत पांडेय, केशव चंद पांडेय, अभिषेक शर्मा आदि ने बताया कि नदी में बहा कुंआ मांगलिक कार्यों के उपयोग किया जाता था। घरों में पानी भरने से गृहस्थी का सारा सामान खराब हो गया है। गांव की सुरक्षा के लिए बनाया गया अस्थायी रिंगबांध बाढ़ में क्षतिग्रस्त हो चुका है।
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दुबौलिया प्रतिनिधि के अनुसार, सुविखा बाबू गांव के लोग अभी भी तटबंध पर शरण लिए हुए हैं। अब ग्रामीणों को संक्रमण फैलने का डर सता रहा है। बरदियालोहार ग्राम पंचायत निवासी सूर्य प्रताप चौहान ने बताया कि अब तक स्वास्थ्य विभाग की टीम हमारे यहां नहीं पहुंची। बिजली आपूर्ति भी अभी बहाल नहीं की गई है। अशोकपुर ग्राम पंचायत के शैलेंद्र प्रताप चौहान ने बताया कि पानी उतरने के बाद संक्रमण का खतरा बना हुआ है। स्वास्थ्य विभाग की टीम भी अब तक गांवों में नहीं पहुंची। यही हाल पूरेमोतीराम गांव का भी है। रविवार को नदी का जलस्तर 93.08 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान करीब 35 सेंटीमीटर ऊपर है।
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जिस नाव में सवार थे विधायक, एडीएम व एसडीएम, उसमें हो गया छेद
विक्रमजोत। क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांव माझाकिता अव्वल में रविवार को विधायक अजय सिंह, एडीएम कमलेश चंद्र व एसडीएम हर्रैया गुलाब चंद्र लंच पैकेट व राहत सामग्री लेकर नाव से जा रहे थे। दलपतपुर माझा के पास नाव नीचे से किसी मजबूत चीज से टकरा गई, जिससे उसमें छेद हो गया। नाव में पानी भरता देख विधायक ने सूझबूझ का परिचय दिया। उन्होंने नाविक को नाव नदी के बीच टापू पर ले चलने के लिए कहा और खुद बाल्टी लेकर पानी निकालने लगे। जैसे-तैसे नाव टापू पर पहुंची। तब जाकर सभी ने राहत की सांस ली। विधायक ने बताया कि सभी सुरक्षित हैं। मौके पर नायब तहसीलदार हर्रैया निखिलेश चौधरी व अन्य राजस्व कर्मी मौजूद रहे। संवाद