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Basti News: दुआ करें न लगे आग... अस्पताल में इंतजाम न मदद के लिए राहर

Thu, 21 Nov 2024 12:14 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 21 Nov 2024 12:14 AM IST
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Pray that there is no fire... No arrangements in the hospital, no way for help.
शहर के एक अस्पताल के भीतर मानक से अधिक भर्ती मरीज,अ​ग्निकांड हुआ तो मचेगी अफरातफरी- संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
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बस्ती। शहरी क्षेत्र में संचालित अधिकतर निजी अस्पतालों में आफत के समय भयावह स्थिति से इन्कार नहीं किया जा सकता है। यदि इन अस्पतालों के अंदर आगजनी जैसी घटनाएं हुईं तो मरीज- तीमारदार और स्टॉफ भागकर भी जान नहीं बचा सकते हैं। अधिकतर निजी अस्पतालों के पास दो रास्ते ढूंढने पर भी नहीं मिल रहे हैं।
केवल प्रवेश के लिए लग्जरी शीशा जड़ित दरवाजे देखे जा रहे हैं। आपदा के समय निकलने का पृथक रास्ता अधिकतर अस्पतालों में नहीं है। जिन अस्पताल संचालकों के पास बहुमंजिला इमारत है, वहां भी डेकोरेशन के सिवाय सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। विद्युत चालित मशीन और ऑक्सीजन पाइप लाइन से सुसज्जित आईसीयू वार्ड तक बनाए गए हैं, लेकिन शाॅर्ट सर्किट एवं अन्य कारणों से आग लगने पर बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। दिखावे के लिए केवल गिनती के कुछ अग्निशमन सिलिंडर दीवारों पर टांग दिए गए हैं।
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इसके अलावा भगदड़ के समय यदि अस्पताल भवन से अचानक बाहर होना पड़े तो प्रवेश द्वार ही विकल्प है। यहां तक कि कई निजी अस्पतालों के पास परिसर और पार्किंग के लिए खाली जगह भी नहीं है। कुछ अस्पतालों में भवन के पीछे की तरफ निकासी का दरवाजा है, तो बाहर निकलने के रास्ता नहीं है। भवन की नींव के ठीक बाद तालाब या गड्ढे हैं। ऐसे में आपदा के समय इन अस्पतालों में भी भागकर जान बचाने की गुंजाइश कम है।
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धंधेबाजों ने मानक को दरकिनार कर गली- मोहल्लों में किराए के मकान में भी अस्पताल खोल लिए हैं। हैरत की बात यह है कि इस तरह के अस्पतालों का स्वास्थ्य विभाग से पंजीकरण भी हुआ है। ऐसे में पंजीकरण के समय अग्निशमन समेत अन्य विभागों से मिलने वाली एनओसी पर सवालिया निशान लगा है।
क्षमता से अधिक जुट रही मरीजों की भीड़ ःनिजी अस्पतालों में क्षमता से अधिक मरीजों की भीड़ जुट रही है। छोटे- छोटे केबिन में ओपीडी संचालित हो रही है, और संकरे बरामदे में ठसाठस मरीज भरे रहते हैं। पचपेड़िया मार्ग पर स्थित एक निजी अस्पताल में सेमरियांवा से आए मुबारक अली कहते हैं कि 20 से 25 मरीजों की क्षमता वाले ओपीडी में 150 से अधिक मरीज देखे जा रहे हैं। अल्लाह न करें कोई हादसा हो, लेकिन यदि आपदा के समय भगदड़ मची तो इस भीड़ में कुछ लोग कुचल भी सकते हैं। वहीं रामफेर ने कहा कि निजी अस्पताल में मरीज देखने और भर्ती करने का मानक होना चाहिए। यह बस और ट्रेन नहीं है कि यात्रियों की तरह मरीज ठूंसकर भर लिए जाएं। पचपेड़िया मार्ग : निजी अस्पतालों की भरमार, निकासी द्वार नहीं पचपेड़िया मार्ग पर डेढ़ सौ कदम चलने के बाद ही निजी अस्पतालों की भरमार है। मुख्य मार्ग के किनारे इन अस्पतालों के पास आलीशान भवन हैं, लेकिन इनकी चौड़ाई 30 से 40 फीट तक ही है। इसमें भी परिसर, पार्किंग की जगह नहीं है। पंजीकरण काउंटर, दवाखाना, जांच सेंटर फ्रंट पर ही खोल लिए गए हैं, जिससे प्रवेश द्वार की चौड़ाई घटकर 12 से 15 फीट हो गई है। अस्पताल भवन के पीछे सटकर मकान बने हैं। यानी निकासी के लिए कोई चालू रास्ता नहीं है। अलबत्ता कायदे- कानून से बचने के लिए लोगों ने अपनी ही जमीन पर दरवाजा खोल रखा है। यहां अस्पताल कर्मियों ने बताया कि इस मार्ग पर संचालित अस्पतालों में प्रतिदिन 600 से अधिक मरीज पहुंचते हैं। दिन में तो सड़क तक वाहनों की पार्किंग होती है। जाम तक लग जाता है। यदि आपदा के समय भगदड़ मची तो जान सुरक्षित करने के बजाय और आफत आ जाएगी। पांच से छह मरीजों की क्षमता वाले वार्डों में 10 से 15 यानी दोगुने से भी अधिक मरीज भर्ती किए जा रहे हैं।

तीमारदार सुभाष ने कहा कि अब अस्पताल खोलने वालों को सिर्फ रुपये कमाने से मतलब है। मरीज और तीमारदार की सुरक्षा से उनका वास्ता नहीं है।
फायर फाईटिंग का प्रशिक्षण भी नहीं ःनिजी अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टर, स्टॉफ और कर्मचारियों को फायर फाईटिंग का प्रशिक्षण भी नहीं दिया जाता है। सफाई कर्मचारी छोटू, वार्ड ब्वाॅय अमित आदि ने बताया कि उन्हें अस्पताल की तरफ से कभी भी फायर फाईटिंग एवं अन्य आपदा से बचाव का कोई प्रशिक्षण नहीं दिलाया गया है।
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