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महामारी ने परदेस मं रहने वालों का कर दिया बेबस
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ट्रक के सहारे मीलों का सफर तय करते मजदूर।
- फोटो : BASTI
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महामारी ने परदेस में रहने वाले मजदूरों को कर दिया बेबस
बस्ती। मजदूर जिनके हाथों ने ताजमहज से लेकर बड़ी-बड़ी इमारतों को बनाया, आज विपदा की घड़ी बेबस हैं। हम बात कर रहे हैं उन मजदूरों की जो लॉकडाउन में देश के विभिन्न राज्यों से अपने गांव की ओर पलायन कर रहे हैं। कुछ ने तो ट्रकों का सहारा लिया, कुछ ने साइकिल, तो कुछ ऐसे भी जो पैदल ही हिम्मत कर निकल पड़े।
शुक्रवार की दोपहर 12 बजे बड़ेवन राष्ट्रीय राजमार्ग होते हुए मजदूर अपने गंतव्य की ओर बढ़े चले जा रहे थे, इन्हीं मजदूरों में से एक थे खलीलाबाद के रहने वाले सुरेश जो की मुंबई में हाथगाड़ी चलाकर अपने परिवार का जीवन यापन करते थे, बताया कि लॉकडाउन में कारखाने बंद हैं, कोई काम धंधा ही नहीं है। साधन नहीं मिल पाने के कारण पैदल ही घर के लिए निकल पड़े हैं। कहते हैं कि मुंबई से निकले हुए उन्हें नौ दिन हो गया है। दूरी के बारे में जब उनसे पूछा गया, तो वे कुछ बता नहीं पाए। गूगल में सर्च कर जब उन्हें दिखाया गया, तो उनकी आंखों में आंसू भर आए, यह दूरी थी 1625 किमी, इतना सफर पैदल तय करना आसान नहीं है। भोजन आदि के बारे में पूछने पर बताया कि रास्ते में कुछ भले लोग भोजन दे देते थे, जिसके सहारे वे बस्ती तक पहुंच गए। वहीं बिहार के खगड़िया जिले के रहने वाले मोहम्मद तूफान अली और शहजाद बताते हैं कि वे नोएडा में रहकर मजदूरी करते थे, लॉकडाउन के चलते जो जमा पूंजी थी, सब खर्च हो गई, ऐसे में घर जाना ही एक मात्रा रास्ता बचा, वे साइकिल से यात्रा तय कर रहे थे। गूगल में सर्च करने नोएडा से खगड़िया की दूरी 1199 किमी प्रदर्शित की गई। वहीं पैदल ही बिहार के मुजफ्फरपुर जा रहे सोहन ने बताया कि वे तेलंगाना में मजदूरी करते हैं, यात्रा करते हुए शुक्रवार को नौ दिन बीतने वाले हैं, इन्हें कुल 1544 किमी की यात्रा तय करनी है। बताते हैं कि रास्ते में कुछ मालवाहनों ने इन्हें कुछ-कुछ दूरी के लिए लिफ्ट दे दी, जो किसी चमत्कार से कम नहीं।
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बस्ती। मजदूर जिनके हाथों ने ताजमहज से लेकर बड़ी-बड़ी इमारतों को बनाया, आज विपदा की घड़ी बेबस हैं। हम बात कर रहे हैं उन मजदूरों की जो लॉकडाउन में देश के विभिन्न राज्यों से अपने गांव की ओर पलायन कर रहे हैं। कुछ ने तो ट्रकों का सहारा लिया, कुछ ने साइकिल, तो कुछ ऐसे भी जो पैदल ही हिम्मत कर निकल पड़े।
शुक्रवार की दोपहर 12 बजे बड़ेवन राष्ट्रीय राजमार्ग होते हुए मजदूर अपने गंतव्य की ओर बढ़े चले जा रहे थे, इन्हीं मजदूरों में से एक थे खलीलाबाद के रहने वाले सुरेश जो की मुंबई में हाथगाड़ी चलाकर अपने परिवार का जीवन यापन करते थे, बताया कि लॉकडाउन में कारखाने बंद हैं, कोई काम धंधा ही नहीं है। साधन नहीं मिल पाने के कारण पैदल ही घर के लिए निकल पड़े हैं। कहते हैं कि मुंबई से निकले हुए उन्हें नौ दिन हो गया है। दूरी के बारे में जब उनसे पूछा गया, तो वे कुछ बता नहीं पाए। गूगल में सर्च कर जब उन्हें दिखाया गया, तो उनकी आंखों में आंसू भर आए, यह दूरी थी 1625 किमी, इतना सफर पैदल तय करना आसान नहीं है। भोजन आदि के बारे में पूछने पर बताया कि रास्ते में कुछ भले लोग भोजन दे देते थे, जिसके सहारे वे बस्ती तक पहुंच गए। वहीं बिहार के खगड़िया जिले के रहने वाले मोहम्मद तूफान अली और शहजाद बताते हैं कि वे नोएडा में रहकर मजदूरी करते थे, लॉकडाउन के चलते जो जमा पूंजी थी, सब खर्च हो गई, ऐसे में घर जाना ही एक मात्रा रास्ता बचा, वे साइकिल से यात्रा तय कर रहे थे। गूगल में सर्च करने नोएडा से खगड़िया की दूरी 1199 किमी प्रदर्शित की गई। वहीं पैदल ही बिहार के मुजफ्फरपुर जा रहे सोहन ने बताया कि वे तेलंगाना में मजदूरी करते हैं, यात्रा करते हुए शुक्रवार को नौ दिन बीतने वाले हैं, इन्हें कुल 1544 किमी की यात्रा तय करनी है। बताते हैं कि रास्ते में कुछ मालवाहनों ने इन्हें कुछ-कुछ दूरी के लिए लिफ्ट दे दी, जो किसी चमत्कार से कम नहीं।
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