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Basti News: पैगंबर ने इमाम हुसैन की अज़मत को पहचनवाया था
Wed, 26 Jul 2023 11:40 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Wed, 26 Jul 2023 11:40 PM IST
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बस्ती। इमामबाड़ा शाबान मंजिल में सातवीं मोहर्रम को आयोजित मजलिस में मौलाना मो. हैदर खां ने कहा कि आज ही के दिन से कर्बला के मैदान में यज़ीदी फौज ने इमाम हुसैन व उनके घरवालों का पानी बंद कर दिया था। इमाम के घर वाले सातवीं मोहर्रम से प्यासे थे। पैगंबर ने हर मुकाम पर इमाम हुसैन की अज़मत को पहचनवाया था।
पैगंबर साहब जानते थे कि हमारे बाद हमारी उम्मत के कुछ लोग मेरे इस नवासे के खून के प्यासे हो जाएंगे। कर्बला में इमाम को शहीद करने वाले भी कलमा पढ़ते थे। नमाज रोजा करते थे और कुरानपाक की तिलावत भी करते थे, लेकिन उनके दिल में नबी और उनके घरवालों के लिए नफरत भरी हुई थी। उन्होंने कहा कि मक्का शहर की जीत के बाद इस्लाम कबूल करने वालों में से अधिकांश वह थे, जिन्होंने लालच, खौफ व सत्ता की लालसा में कलमा पढ़ा था। मौला अली, इमाम हसन से जंग करने, इमाम हुसैन को शहीद करने में इन लोगों की मुख्य भूमिका थी। यज़ीद नबी की नस्ल को समाप्त कर धर्म की सत्ता अपने हाथ में लेना चाहता था।
पैगंबर साहब ने कहा था कि मेरा हुसैन मुझसे है, और मैं हुसैन से हूं। वह दुनिया को बता रहे थे, कि मेरा नवासा मुझसे है, और मेरा दीन हुसैन की बदौलत सुरक्षित रहेगा। अल्लाह ने जिन पांच हस्तियों की पवित्रता की बात कुरआन में की है, उसमें इमाम हुसैन शामिल हैं। मुबाहले के मैदान में जब पैगंबर को ईसाइयों के मुकाबले अपने दीन को सच्चा साबित करना था, तो पैगंबर अपनी गोद में इमाम हुसैन को लेकर गए थे। दुनिया ने देखा कि शहजादा हुसैन खेलते हुए मस्जिद में आते है, और नमाज में मशगूल पैगंबर की पीठ पर बैठ जाते हैं। पैगंबर ने उस समय तक सजदे से सिर नहीं उठाया, जब तक इमाम हुसैन अपनी मर्जी से उतर नहीं गए। अगर कोई दूसरा ऐसा करता है तो उसकी नमाज बातिल हो जाएगी।
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मौलाना ने कहा कि पैगंबर के इस दुनिया से पर्दा करने के साथ ही सत्ता का लालची गिरोह सक्रिय हो गया। हर तरीके से पैगंबर के घर वालों पर जुल्म ढाए गए। इमाम हुसैन ने दीन के इन गद्दारों को कर्बला के मैदान में अपनी शहादत पेश कर बेनकाब कर दिया। मोहम्मद रफीक, सुहेल बस्तवी आदि ने सोज व सलाम पेश किया। सफदर रजा, जमील अहमद, जीशान रिजवी, शम्स आबिद, शावर, नकी हैदर खां, आले मुस्तफा, जैन, अन्नू आदि मौजूद रहे।
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निकला मेंहदी का जुलूस
नगर बाजार। मोहर्रम की सात तारीख को नगर पंचायत नगर बाजार में मेंहदी का जुलूस अकीदत के साथ निकाला गया। हजरत कासिम के याद में निकाले गए इस जुलूस में सैकड़ों मुस्लिम या अली, या हुसैन की सदा लगाते हुए शामिल हुए। जुलूस राजकोट चौराहे से होते हुए पूरे बाजार का भ्रमण करने के बाद समाप्त हुआ। नगर बाजार जामा मस्जिद के इमाम मौलाना अब्दुल हई ने बताया कि इस्लामी अध्ययन से पता चलता है कि जेहाद का मतलब सिर्फ लड़ाई नहीं ऐसे नियमों और बुराइयों से जंग है, जो इंसान और इंसानियत के खिलाफ हो। कर्बला के जंग के जरिये पैगंबर के नवासे ने पूरी दुनिया को यह पैगाम दिया कि जालिम कितना भी ताकतवर हो उसकी नाइंसाफी को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। कुरैशी ने बताया कि मोहर्रम के सातवें दिन मेंहदी का जुलूस निकाला जाता है, क्योंकि कर्बला के मैदान में हजरत कासिम इसी दिन शहीद हुए थे। वह दूल्हा बने हुए थे।
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पैगंबर साहब जानते थे कि हमारे बाद हमारी उम्मत के कुछ लोग मेरे इस नवासे के खून के प्यासे हो जाएंगे। कर्बला में इमाम को शहीद करने वाले भी कलमा पढ़ते थे। नमाज रोजा करते थे और कुरानपाक की तिलावत भी करते थे, लेकिन उनके दिल में नबी और उनके घरवालों के लिए नफरत भरी हुई थी। उन्होंने कहा कि मक्का शहर की जीत के बाद इस्लाम कबूल करने वालों में से अधिकांश वह थे, जिन्होंने लालच, खौफ व सत्ता की लालसा में कलमा पढ़ा था। मौला अली, इमाम हसन से जंग करने, इमाम हुसैन को शहीद करने में इन लोगों की मुख्य भूमिका थी। यज़ीद नबी की नस्ल को समाप्त कर धर्म की सत्ता अपने हाथ में लेना चाहता था।
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पैगंबर साहब ने कहा था कि मेरा हुसैन मुझसे है, और मैं हुसैन से हूं। वह दुनिया को बता रहे थे, कि मेरा नवासा मुझसे है, और मेरा दीन हुसैन की बदौलत सुरक्षित रहेगा। अल्लाह ने जिन पांच हस्तियों की पवित्रता की बात कुरआन में की है, उसमें इमाम हुसैन शामिल हैं। मुबाहले के मैदान में जब पैगंबर को ईसाइयों के मुकाबले अपने दीन को सच्चा साबित करना था, तो पैगंबर अपनी गोद में इमाम हुसैन को लेकर गए थे। दुनिया ने देखा कि शहजादा हुसैन खेलते हुए मस्जिद में आते है, और नमाज में मशगूल पैगंबर की पीठ पर बैठ जाते हैं। पैगंबर ने उस समय तक सजदे से सिर नहीं उठाया, जब तक इमाम हुसैन अपनी मर्जी से उतर नहीं गए। अगर कोई दूसरा ऐसा करता है तो उसकी नमाज बातिल हो जाएगी।
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मौलाना ने कहा कि पैगंबर के इस दुनिया से पर्दा करने के साथ ही सत्ता का लालची गिरोह सक्रिय हो गया। हर तरीके से पैगंबर के घर वालों पर जुल्म ढाए गए। इमाम हुसैन ने दीन के इन गद्दारों को कर्बला के मैदान में अपनी शहादत पेश कर बेनकाब कर दिया। मोहम्मद रफीक, सुहेल बस्तवी आदि ने सोज व सलाम पेश किया। सफदर रजा, जमील अहमद, जीशान रिजवी, शम्स आबिद, शावर, नकी हैदर खां, आले मुस्तफा, जैन, अन्नू आदि मौजूद रहे।
निकला मेंहदी का जुलूस
नगर बाजार। मोहर्रम की सात तारीख को नगर पंचायत नगर बाजार में मेंहदी का जुलूस अकीदत के साथ निकाला गया। हजरत कासिम के याद में निकाले गए इस जुलूस में सैकड़ों मुस्लिम या अली, या हुसैन की सदा लगाते हुए शामिल हुए। जुलूस राजकोट चौराहे से होते हुए पूरे बाजार का भ्रमण करने के बाद समाप्त हुआ। नगर बाजार जामा मस्जिद के इमाम मौलाना अब्दुल हई ने बताया कि इस्लामी अध्ययन से पता चलता है कि जेहाद का मतलब सिर्फ लड़ाई नहीं ऐसे नियमों और बुराइयों से जंग है, जो इंसान और इंसानियत के खिलाफ हो। कर्बला के जंग के जरिये पैगंबर के नवासे ने पूरी दुनिया को यह पैगाम दिया कि जालिम कितना भी ताकतवर हो उसकी नाइंसाफी को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। कुरैशी ने बताया कि मोहर्रम के सातवें दिन मेंहदी का जुलूस निकाला जाता है, क्योंकि कर्बला के मैदान में हजरत कासिम इसी दिन शहीद हुए थे। वह दूल्हा बने हुए थे।