{"_id":"5722570a4f1c1b783ba92140","slug":"cbi-and-vigilence-team-was-in-basti-for-three-days","type":"story","status":"publish","title_hn":"तीन दिन से बस्ती में थी सीबीआई,विजिलेंस टीम","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
तीन दिन से बस्ती में थी सीबीआई,विजिलेंस टीम
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 29 Apr 2016 12:01 AM IST
विज्ञापन
आईआरसीटीसी
- फोटो : Demo Pic
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बस्ती। आईआरसीटीसी के साॅफ्टवेयर का क्लोन तैयार कर के रेलवे से पहले तत्काल टिकट निकालकर करोड़ों का चूना लगाने के मामले को लेकर सीबीआई और रेलवे विजिलेंस दोनों की टीमें जांच कर रही थी। सीबीआई और रेलवे की विजिलेंस टीम अलग-अलग तरीके से इस मामले की मानीटरिंग कर रही थी। सूत्रों की मानें तो सबसे पहले रेलवे की विजिलेंस टीम को इस धंधे के मास्टरमाइंड की जानकारी हुई। इसके लिए उसने एक सोशल साइट का इस्तेमाल किया।
सूत्रों की मानें तो रेलवे विजिलेंस की टीम को धंधे के मास्टरमाइड की जानकारी होने के बाद उसने इस जानकारी को सीबीआई से साझा किया। सीबीआई बैंगलोर और सीबीआई लखनऊ की टीम के साथ रेलवे विजिलेंस की टीम तीन दिन से बस्ती में टिकी थी। टीम के लोग उस स्थान को चिह्नित कर उसकी निगरानी कर रहे थे।
सिविल ड्रेस में होने के कारण उनके बारे में किसी को भनक भी नहीं लग पाई। बुधवार की रात में जब टीम के सदस्य पुरानी बस्ती पुलिस के साथ दक्षिण दरवाजा क्षेत्र में दबिश दी तो लोगों को जानकारी हुई। गुफा तरीके संकरे गलियारे वाले इस मकान में दो साल से यह धंधा फल फूल रहा था। धंधे के मास्टरमाइंड अशरफ हमीद की कम उम्र को देखकर किसी को नहीं लगता था कि यह इतना शातिर होगा। हमीद ने आईआरसीटीसी का डुप्लीकेट साफ्टवेयर देश के पांच सौ डिस्ट्रीब्यूटर को बेच रखा था। जिससे डिस्ट्रीब्यूटर्स रेलवे की तत्काल टिकट निकाल रेलवे को चूना लगाते थे। इस साफ्टवेयर का प्रयोग करने वाले धंधे के मास्टरमांइड को कमीशन भी देते थे।
विज्ञापन
30 सेकेंड में निकाल लेते थे टिकट
हैकर की ओर से बेचे गए डुप्लीकेट साफ्टवेयर कमाल का था। रेलवे को जहां तत्काल टिकट निकालने में एक मिनट लगते थे, वहीं डुप्लीकेट साफ्टवेयर से महज 30 सेकेंड में तत्काल टिकट निकल जाता था। ऐसे में रेलवे से पहले ही टिकट निकल जाने के कारण रेलवे को जमकर राजस्व का चूना लगता था।
धंधे में शामिल होंगे बेनकाब
इस धंधे में शामिल लोगों के बारे मेें सीबीआई और रेलवे विजिलेंस की टीम पता कर रही है। हामिद अशरफ से इस बारे में टीम कड़ी पूछताछ कर रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस धंधे में शामिल लोगों के चेहरे से जल्द ही नकाब हट जाएगा।
विज्ञापन
सूत्रों की मानें तो रेलवे विजिलेंस की टीम को धंधे के मास्टरमाइड की जानकारी होने के बाद उसने इस जानकारी को सीबीआई से साझा किया। सीबीआई बैंगलोर और सीबीआई लखनऊ की टीम के साथ रेलवे विजिलेंस की टीम तीन दिन से बस्ती में टिकी थी। टीम के लोग उस स्थान को चिह्नित कर उसकी निगरानी कर रहे थे।
विज्ञापन
सिविल ड्रेस में होने के कारण उनके बारे में किसी को भनक भी नहीं लग पाई। बुधवार की रात में जब टीम के सदस्य पुरानी बस्ती पुलिस के साथ दक्षिण दरवाजा क्षेत्र में दबिश दी तो लोगों को जानकारी हुई। गुफा तरीके संकरे गलियारे वाले इस मकान में दो साल से यह धंधा फल फूल रहा था। धंधे के मास्टरमाइंड अशरफ हमीद की कम उम्र को देखकर किसी को नहीं लगता था कि यह इतना शातिर होगा। हमीद ने आईआरसीटीसी का डुप्लीकेट साफ्टवेयर देश के पांच सौ डिस्ट्रीब्यूटर को बेच रखा था। जिससे डिस्ट्रीब्यूटर्स रेलवे की तत्काल टिकट निकाल रेलवे को चूना लगाते थे। इस साफ्टवेयर का प्रयोग करने वाले धंधे के मास्टरमांइड को कमीशन भी देते थे।
विज्ञापन
30 सेकेंड में निकाल लेते थे टिकट
हैकर की ओर से बेचे गए डुप्लीकेट साफ्टवेयर कमाल का था। रेलवे को जहां तत्काल टिकट निकालने में एक मिनट लगते थे, वहीं डुप्लीकेट साफ्टवेयर से महज 30 सेकेंड में तत्काल टिकट निकल जाता था। ऐसे में रेलवे से पहले ही टिकट निकल जाने के कारण रेलवे को जमकर राजस्व का चूना लगता था।
धंधे में शामिल होंगे बेनकाब
इस धंधे में शामिल लोगों के बारे मेें सीबीआई और रेलवे विजिलेंस की टीम पता कर रही है। हामिद अशरफ से इस बारे में टीम कड़ी पूछताछ कर रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस धंधे में शामिल लोगों के चेहरे से जल्द ही नकाब हट जाएगा।