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प्रमोद का सरेंडर नामंजूर, पुलिस ने उठाया
Updated Tue, 19 Sep 2017 11:39 PM IST
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कोतवाली पर राजनीतिक ड्रामा, शहर में जाम
बस्ती।
कोतवाली से जबरन छात्रनेता को छुड़ाने में भाजपा नेता प्रमोद पांडेय का आत्म समर्पण कोर्ट में तकनीकी कारणों से नामंजूर हो गया। पुलिस ने कोर्ट से निकलते समय गिरफ्तार कर लिया। इससे गुस्साए भाजपाइयों ने कोतवाली घेराव का निर्णय लिया। सतर्क पुलिस ने अघोषित डायवर्जन लागू कर दिया जिससे शहर के लोग हलकान रहे।
भाजपा नेताओं का आरोप है कि पुलिस लगातार कार्यकर्ताओं का उत्पीड़न और अपराधियों जैसा व्यवहार कर रही है। मंगलवार को ही सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता से अभद्रता के आरोपी भाजपा जिला उपाध्यक्ष अश्विनी उपाध्याय को भी गिरफ्तार किया गया। सांसद हरीश द्विवेदी, महादेवा विधायक रवि सोनकर, रुधौली विधायक संजय प्रताप जायसवाल, जिला अध्यक्ष पवन कसौधन समेत भाजपा कार्यकर्ता जत्थे में पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन और कोतवाली में धरने के लिए पहुंच गए। कोतवाली में ही प्रमोद पांडेय को गिरफ्तार करने के बाद रखा गया था। सैकड़ों की संख्या में भाजपा कार्यकर्ताओं के पहुंचने का सिलसिला देखकर पुलिस ने तत्काल कोतवाली रास्ते की नाकाबंदी कर दी। शाम होने के कारण ऑफिस से घर जाने वालों और मार्केट करने वाले कोतवाली रास्ते पर फंस गए। आनन-फानन अस्पताल चौराहे से आने वाले वाहनों को दक्षिण दरवाजा होते हुए भेजा जाने लगा। जिन्हें कंपनी बाग आना था उन्हें सोनूपार का रास्ता दिखा दिया गया। दूसरी तरफ रोडवेज पर पुलिस ने गाड़ियों को खड़ाकर मार्ग अवरुद्ध कर दिया। ट्रैफिक को रोडवेज, दक्षिण दरवाजा होते हुए अस्पताल चौराहे पर निकाला जाने लगा। अचानक रूट डायवर्जन के चलते लोगों की पुलिस से कहासुनी भी होती रही। कोतवाली की ओर आने वालों ने अचानक गलियों से होते हुए गंतव्य को जाना शुरू किया तो गलियां भी जाम हो गईं। गलियों में भीड़ देखकर पुलिस का पहरा वहां भी बैठा दिया गया। गोरखपुर जाने वाली रोडवेज बसें पचपेड़िया मार्ग होते हुए फोरलेन पर निकाली गईं। सबसे ज्यादा दिक्कत मुंडेरवा की तरफ से शहर या कंपनी बाग आने वाले लोगों को हुईं। रूट डायवर्जन देर रात तक लागू रहा।
गिरफ्तारी देने के लिए अड़े सांसद और विधायक
बस्ती।
कोतवाली कांड में सरेंडर करने की योजना फेल होने के बाद पुलिस भाजयुमो के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष प्रमोद पांडेय को गिरफ्तार कर कोतवाली पहुंची। पीछे ही सांसद हरीश द्विवेदी, रुधौली विधायक संजय प्रताप जायसवाल, हर्रैया विधायक प्रतिनिधि और जिलाध्यक्ष पवन कसौधन तमाम कार्यकर्ताओं के साथ कोतवाली गेट पर जा धमके और गेट घेरकर बैठ गए। कुछ देर बाद महादेवा विधायक रवि सोनकर भी पहुंच गए।
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मौके पर पहुंचे एएसपी नरेंद्र सिंह ने गेट से हटने का आग्रह किया लेकिन सांसद ने यह कहकर हटने से इन्कार कर दिया कि या तो प्रमोद को छोड़ा जाए या उन सबको भी गिरफ्तार किया जाए। मनाने की कोशिश बेकार होते देख डीएम अरविंद कुमार सिंह, एसपी संकल्प शर्मा भारी दल-बल के साथ पहुंचे। मान मनौव्वल की कोशिशें भी चलती रहीं लेकिन बुरी तरह से उलझ चुके इस केस में कानूनी पक्ष लिए बिना कोई कुछ भी कहने को तैयार नहीं है। देर रात तक कोई फैसला नहीं हो सका।
गेट पर गांधीगीरी
एक तरफ पुलिस-प्रशासन टस से मस नहीं हो रही थी, दूसरी ओर भाजपाई भी अड़े रहे। इस बीच किसी ने भजन की एक लाइन गुनगुना दी, जिसके बाद तो पूरा माहौल कुछ देर के लिए हल्का-फुल्का हो गया। सांसद की पहल पर जिलाध्यक्ष पवन कसौधन और विधायक संजय जायसवाल महात्मा गांधी की सबसे प्रिय भजन रघुपति राघव राजा राम गाने लगे। उनके स्वर में कुछ पुलिस वाले भी सुर मिलाते दिखे लेकिन जब नारा लगाने की बात आई तो वर्दी वाले खिसक लिए।
प्रमोद का सरेंडर नामंजूर, गिरफ्तार
बस्ती। कोतवाली कांड के मुकदमे में सरेंडर करने पहुंचे भाजयुमो के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष प्रमोद पांडेय को निराशा हाथ लगी। सीजेएम ने संबंधित थाने से अद्यतन रिपोर्ट तलब कर ली। मगर कोर्ट का समय समाप्त होने तक रिपोर्ट नहीं मिली। इससे उन्हें लौटना पड़ा। मगर पहले से मोर्चाबंदी करके खड़ी पुलिस ने उन्हें न्यायालय परिसर से निकलते ही गिरफ्तार कर लिया।
नौ सितंबर को एपीएनपीजी कॉलेज के छात्रसंघ अध्यक्ष आदित्य नारायण तिवारी उर्फ कबीर को कोतवाली से जबरन छुड़ा ले जाने के मामले में पुलिस ने 21 नामजद समेत 201 लोगों के खिलाफ मुकदमा कायम किया। अगली रात में दबिश देकर पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। लेकिन मुख्य आरोपी कबीर के अलावा प्रमोद पांडेय, पुष्कर मिश्र समेत तमाम दिग्गज भाजपाइयों को गिरफ्तार करने का दबाव बढ़ने लगा। रविवार रात में नाटकीय ढंग से पुलिस ने केडीसी के पूर्व अध्यक्ष आलोक पांडेय और विशाल चौधरी को लखनऊ के मॉल में पिक्चर देखते समय गिरफ्तार करके सोमवार को कोर्ट में पेश किया।
उधर, पुलिस की ओर से निराशा हाथ लगने के बाद मंगलवार को प्रमोद पांडेय भी आत्मसमर्पण करने अदालत में जा पहुंचे। न्यायालय में भीड़ और शोरगुल के बीच सीजेएम ने पुलिस की चालानी रिपोर्ट तलब कर ली। समय सीमा बीतने के बावजूद जब अदालत को जरूरी कागजात नहीं मिले तो अगले दिन यानी 20 सितंबर को रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। मायूस होकर प्रमोद समर्थकों सहित कोर्ट से वापस हो गए। पहले से रणनीति बनाकर रास्ते में खड़ी पुलिस ने उन्हें गिरफ़्तार कर लिया। कड़ी सुरक्षा के बीच उन्हें कोतवाली ले जाकर हवालात में डाल दिया गया।
सीजेएम ने मांगी अद्यतन आख्या
आरोपी प्रमोद पांडेय पुत्र शत्रुघभन उर्फ रंगीलाल पांडेय निवासी थरौली थाना लालगंज की तरफ से सीजेएम अदालत में प्रार्थनापत्र दिया गया। जिस पर अभियोजन अधिकारी ने संबंधित एसएचओ (कोतवाल) से यह अद्यतन आख्या तलब की कि आरोपी को किन-किन धाराओं में वांछित किया गया है। आवश्यक रिपोर्ट 20 सितंबर को प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। लेकिन सीमा बीतने के बावजूद रिपोर्ट नहीं मिली।
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बस्ती।
कोतवाली से जबरन छात्रनेता को छुड़ाने में भाजपा नेता प्रमोद पांडेय का आत्म समर्पण कोर्ट में तकनीकी कारणों से नामंजूर हो गया। पुलिस ने कोर्ट से निकलते समय गिरफ्तार कर लिया। इससे गुस्साए भाजपाइयों ने कोतवाली घेराव का निर्णय लिया। सतर्क पुलिस ने अघोषित डायवर्जन लागू कर दिया जिससे शहर के लोग हलकान रहे।
भाजपा नेताओं का आरोप है कि पुलिस लगातार कार्यकर्ताओं का उत्पीड़न और अपराधियों जैसा व्यवहार कर रही है। मंगलवार को ही सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता से अभद्रता के आरोपी भाजपा जिला उपाध्यक्ष अश्विनी उपाध्याय को भी गिरफ्तार किया गया। सांसद हरीश द्विवेदी, महादेवा विधायक रवि सोनकर, रुधौली विधायक संजय प्रताप जायसवाल, जिला अध्यक्ष पवन कसौधन समेत भाजपा कार्यकर्ता जत्थे में पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन और कोतवाली में धरने के लिए पहुंच गए। कोतवाली में ही प्रमोद पांडेय को गिरफ्तार करने के बाद रखा गया था। सैकड़ों की संख्या में भाजपा कार्यकर्ताओं के पहुंचने का सिलसिला देखकर पुलिस ने तत्काल कोतवाली रास्ते की नाकाबंदी कर दी। शाम होने के कारण ऑफिस से घर जाने वालों और मार्केट करने वाले कोतवाली रास्ते पर फंस गए। आनन-फानन अस्पताल चौराहे से आने वाले वाहनों को दक्षिण दरवाजा होते हुए भेजा जाने लगा। जिन्हें कंपनी बाग आना था उन्हें सोनूपार का रास्ता दिखा दिया गया। दूसरी तरफ रोडवेज पर पुलिस ने गाड़ियों को खड़ाकर मार्ग अवरुद्ध कर दिया। ट्रैफिक को रोडवेज, दक्षिण दरवाजा होते हुए अस्पताल चौराहे पर निकाला जाने लगा। अचानक रूट डायवर्जन के चलते लोगों की पुलिस से कहासुनी भी होती रही। कोतवाली की ओर आने वालों ने अचानक गलियों से होते हुए गंतव्य को जाना शुरू किया तो गलियां भी जाम हो गईं। गलियों में भीड़ देखकर पुलिस का पहरा वहां भी बैठा दिया गया। गोरखपुर जाने वाली रोडवेज बसें पचपेड़िया मार्ग होते हुए फोरलेन पर निकाली गईं। सबसे ज्यादा दिक्कत मुंडेरवा की तरफ से शहर या कंपनी बाग आने वाले लोगों को हुईं। रूट डायवर्जन देर रात तक लागू रहा।
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गिरफ्तारी देने के लिए अड़े सांसद और विधायक
बस्ती।
कोतवाली कांड में सरेंडर करने की योजना फेल होने के बाद पुलिस भाजयुमो के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष प्रमोद पांडेय को गिरफ्तार कर कोतवाली पहुंची। पीछे ही सांसद हरीश द्विवेदी, रुधौली विधायक संजय प्रताप जायसवाल, हर्रैया विधायक प्रतिनिधि और जिलाध्यक्ष पवन कसौधन तमाम कार्यकर्ताओं के साथ कोतवाली गेट पर जा धमके और गेट घेरकर बैठ गए। कुछ देर बाद महादेवा विधायक रवि सोनकर भी पहुंच गए।
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मौके पर पहुंचे एएसपी नरेंद्र सिंह ने गेट से हटने का आग्रह किया लेकिन सांसद ने यह कहकर हटने से इन्कार कर दिया कि या तो प्रमोद को छोड़ा जाए या उन सबको भी गिरफ्तार किया जाए। मनाने की कोशिश बेकार होते देख डीएम अरविंद कुमार सिंह, एसपी संकल्प शर्मा भारी दल-बल के साथ पहुंचे। मान मनौव्वल की कोशिशें भी चलती रहीं लेकिन बुरी तरह से उलझ चुके इस केस में कानूनी पक्ष लिए बिना कोई कुछ भी कहने को तैयार नहीं है। देर रात तक कोई फैसला नहीं हो सका।
गेट पर गांधीगीरी
एक तरफ पुलिस-प्रशासन टस से मस नहीं हो रही थी, दूसरी ओर भाजपाई भी अड़े रहे। इस बीच किसी ने भजन की एक लाइन गुनगुना दी, जिसके बाद तो पूरा माहौल कुछ देर के लिए हल्का-फुल्का हो गया। सांसद की पहल पर जिलाध्यक्ष पवन कसौधन और विधायक संजय जायसवाल महात्मा गांधी की सबसे प्रिय भजन रघुपति राघव राजा राम गाने लगे। उनके स्वर में कुछ पुलिस वाले भी सुर मिलाते दिखे लेकिन जब नारा लगाने की बात आई तो वर्दी वाले खिसक लिए।
प्रमोद का सरेंडर नामंजूर, गिरफ्तार
बस्ती। कोतवाली कांड के मुकदमे में सरेंडर करने पहुंचे भाजयुमो के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष प्रमोद पांडेय को निराशा हाथ लगी। सीजेएम ने संबंधित थाने से अद्यतन रिपोर्ट तलब कर ली। मगर कोर्ट का समय समाप्त होने तक रिपोर्ट नहीं मिली। इससे उन्हें लौटना पड़ा। मगर पहले से मोर्चाबंदी करके खड़ी पुलिस ने उन्हें न्यायालय परिसर से निकलते ही गिरफ्तार कर लिया।
नौ सितंबर को एपीएनपीजी कॉलेज के छात्रसंघ अध्यक्ष आदित्य नारायण तिवारी उर्फ कबीर को कोतवाली से जबरन छुड़ा ले जाने के मामले में पुलिस ने 21 नामजद समेत 201 लोगों के खिलाफ मुकदमा कायम किया। अगली रात में दबिश देकर पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। लेकिन मुख्य आरोपी कबीर के अलावा प्रमोद पांडेय, पुष्कर मिश्र समेत तमाम दिग्गज भाजपाइयों को गिरफ्तार करने का दबाव बढ़ने लगा। रविवार रात में नाटकीय ढंग से पुलिस ने केडीसी के पूर्व अध्यक्ष आलोक पांडेय और विशाल चौधरी को लखनऊ के मॉल में पिक्चर देखते समय गिरफ्तार करके सोमवार को कोर्ट में पेश किया।
उधर, पुलिस की ओर से निराशा हाथ लगने के बाद मंगलवार को प्रमोद पांडेय भी आत्मसमर्पण करने अदालत में जा पहुंचे। न्यायालय में भीड़ और शोरगुल के बीच सीजेएम ने पुलिस की चालानी रिपोर्ट तलब कर ली। समय सीमा बीतने के बावजूद जब अदालत को जरूरी कागजात नहीं मिले तो अगले दिन यानी 20 सितंबर को रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। मायूस होकर प्रमोद समर्थकों सहित कोर्ट से वापस हो गए। पहले से रणनीति बनाकर रास्ते में खड़ी पुलिस ने उन्हें गिरफ़्तार कर लिया। कड़ी सुरक्षा के बीच उन्हें कोतवाली ले जाकर हवालात में डाल दिया गया।
सीजेएम ने मांगी अद्यतन आख्या
आरोपी प्रमोद पांडेय पुत्र शत्रुघभन उर्फ रंगीलाल पांडेय निवासी थरौली थाना लालगंज की तरफ से सीजेएम अदालत में प्रार्थनापत्र दिया गया। जिस पर अभियोजन अधिकारी ने संबंधित एसएचओ (कोतवाल) से यह अद्यतन आख्या तलब की कि आरोपी को किन-किन धाराओं में वांछित किया गया है। आवश्यक रिपोर्ट 20 सितंबर को प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। लेकिन सीमा बीतने के बावजूद रिपोर्ट नहीं मिली।