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पैरामेडिकल संचालकों की जल्द होगी गिरफ्तारी
Updated Sun, 18 Nov 2018 12:26 AM IST
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पैरामेडिकल संचालकों की जल्द होगी गिरफ्तारी
सैकड़ों विद्यार्थियों का भविष्य अधर में
पांच पर दर्ज हुआ है मुकदमा
अमर उजाला ब्यूरो।
बस्ती। मां वैष्णो पैरा मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों का सपना उस समय टूट गया, जब उन्हें पता चला कि यह कॉलेज फर्जी है। और उनके साथ बड़ी ठगी हुई है। फिलहाल, जिला प्रशासन ने इस कॉलेज को जांच के बाद सीज कर दिया है।
दो वर्ष पूर्व मड़वानगर में स्थापित इस पैरामेडिकल कॉलेज ने जेएनएम, एएनएम, नर्सिग सहित अन्य कोर्सों को कराने का दवा कर पूरे शहर में प्रचार-प्रसार का जाल बिछा दिया। इसी में फंसकर सैकड़ों विद्यार्थियों ने यहां 60 से 80 हजार रुपये देकर दाखिला लिया और उन्हें इस बात का पूर्ण विश्वास था कि यहां से डिग्री पाने के बाद वे किसी लायक हो जाएंगे। लेकिन जब वे यहां से डिग्री प्राप्त कर रजिस्ट्रेशन के लिए स्टेट मेडिकल फैकल्टी ले गए तब उन्हें पता चला कि इस नाम का कोई कॉलेज पंजीकृत नहीं है, लिहाजा आपकी डिग्री का रजिस्ट्रेशन नहीं किया जा सकता। इसके बाद विद्यार्थियों ने जिलाधिकारी कार्यालय से लेकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया, स्थिति को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने इस कॉलेज की जांच के लिए टीम बनाई, जिसके बाद यह साबित हुआ कि यह कॉलेज पूरी तरह से फर्जी है। जिला प्रशासन की ओर से जिसमें संस्था के डायरेक्टर आरसी वर्मा, प्रधानाचार्य डॉ रामसिंह चौधरी, कल्याण सिंह, संग्राम सिंह, हेमंत कुमार मिश्रा के विरुद्ध धोधाधड़ी सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया। फिलहाल, आरोपी पुलिस की पकड़ से फरार चल रहे हैं।
संचालकों की जल्द होगी गिरफ्तारी
सीओ सिटी आलोक सिंह ने कहा कि मामले की विवेचना चल रही है, जल्द ही संचालकों को गिरफ्तार किया जाएगा। कहा कि वो कहीं भी पुलिस उन तक पहुंच जाएगी।
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सैकड़ों विद्यार्थियों का भविष्य अधर में
पांच पर दर्ज हुआ है मुकदमा
अमर उजाला ब्यूरो।
बस्ती। मां वैष्णो पैरा मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों का सपना उस समय टूट गया, जब उन्हें पता चला कि यह कॉलेज फर्जी है। और उनके साथ बड़ी ठगी हुई है। फिलहाल, जिला प्रशासन ने इस कॉलेज को जांच के बाद सीज कर दिया है।
दो वर्ष पूर्व मड़वानगर में स्थापित इस पैरामेडिकल कॉलेज ने जेएनएम, एएनएम, नर्सिग सहित अन्य कोर्सों को कराने का दवा कर पूरे शहर में प्रचार-प्रसार का जाल बिछा दिया। इसी में फंसकर सैकड़ों विद्यार्थियों ने यहां 60 से 80 हजार रुपये देकर दाखिला लिया और उन्हें इस बात का पूर्ण विश्वास था कि यहां से डिग्री पाने के बाद वे किसी लायक हो जाएंगे। लेकिन जब वे यहां से डिग्री प्राप्त कर रजिस्ट्रेशन के लिए स्टेट मेडिकल फैकल्टी ले गए तब उन्हें पता चला कि इस नाम का कोई कॉलेज पंजीकृत नहीं है, लिहाजा आपकी डिग्री का रजिस्ट्रेशन नहीं किया जा सकता। इसके बाद विद्यार्थियों ने जिलाधिकारी कार्यालय से लेकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया, स्थिति को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने इस कॉलेज की जांच के लिए टीम बनाई, जिसके बाद यह साबित हुआ कि यह कॉलेज पूरी तरह से फर्जी है। जिला प्रशासन की ओर से जिसमें संस्था के डायरेक्टर आरसी वर्मा, प्रधानाचार्य डॉ रामसिंह चौधरी, कल्याण सिंह, संग्राम सिंह, हेमंत कुमार मिश्रा के विरुद्ध धोधाधड़ी सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया। फिलहाल, आरोपी पुलिस की पकड़ से फरार चल रहे हैं।
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संचालकों की जल्द होगी गिरफ्तारी
सीओ सिटी आलोक सिंह ने कहा कि मामले की विवेचना चल रही है, जल्द ही संचालकों को गिरफ्तार किया जाएगा। कहा कि वो कहीं भी पुलिस उन तक पहुंच जाएगी।