गणतंत्र दिवस: 'हर मदरसे में पढ़ाया जाए भारत का संविधान...' मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने की अपील
गणतंत्र दिवस के अवसर पर ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने मदरसा संचालकों से बड़ी अपील की है। उन्होंने कहा कि हर मदरसे में छात्रों को देश का संविधान पढ़ाना चाहिए, जिससे छात्र अपने अधिकारों को जान सकें।
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बरेली में ऑल इंडिया मुस्लिम जमात की ओर से मदरसा जामियातुस सुवालेहात में रविवार को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर कार्यक्रम हुआ। इसमें मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा कि गणतंत्र दिवस देश के लिए जश्न का दिन है। गणतंत्र दिवस अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक के लिए बड़ी नेमत है। संविधान देश की एकता और अखंडता की गारंटी है। जम्हूरियत (लोकतंत्र) देश की आजादी का नतीजा है।
मौलाना ने मुस्लिम संस्थाओं के स्कूल-कॉलेज और मदरसों के जिम्मेदारों से अपील करते हुए कहा कि हर बच्चे को भारतीय संविधान पढ़ाएं ताकि नई पीढ़ी ये जान सकें कि संविधान ने अपने नागरिकों को कौन कौन से अधिकार दिए हैं। किस तरह से हमें आजादी हासिल है। मदरसों के छात्र इस तरह की किताब नहीं पढ़ पाते हैं। मदरसों में संविधान का पढ़ाया जाना बहुत जरूरी है।
विकास के अहम मोड़ पर खड़ा है देश- मिस्बाही
कार्यक्रम में मदरसा जामियातुस सुवालेहात के प्रबंधक मुफ्ती फारूक मिस्बाही ने कहा कि भारत विकास और विश्व नेतृत्व के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। इसलिए इसकी महत्वाकांक्षाओं और घरेलू असंगतियों के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता है। अयोध्या विवाद जैसे नए विवाद धार्मिक समुदायों के हितों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इस्लामीक रिसर्च सेंटर के उप निदेशक आरिफ अंसारी ने कहा कि सामाजिक घर्षण और विभाजन को कम करने के लिए भारत की प्राचीन संस्कृति और परंपराओं, समावेशिता और विविध मान्यताओं के सम्मान पर फिर से जोर देना चाहिए।
'एकता के लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत'
मौलाना मुजाहिद हुसैन कादरी ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को बिना किसी भय या पूर्वाग्रह के अपने चुने हुए धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। बढ़ती विभाजनकारी चुनौती से निपटने के लिए हिंदू-मुस्लिम एकता और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है।
मौलाना गुलाम मुईनुद्दीन हशमती ने कहा कि आज के समय में संयम और सावधानी की जरूरत है। सोशल मीडिया विभाजनकारी विचारों को बढ़ाता है। भड़काऊ बयानबाजी को खारिज किया जाना चाहिए। कार्यक्रम में मुख्य रूप से हाजी शुखवक्त अली खां, नसीर अहमद नूरी, ताहिर हुसैन एडवोकेट, शमशुल हसन, मास्टर रशीद खां, कारी मुस्तकीम अहमद, रोमान अंसारी, हाफिज रजी अहमद, ज़ोहेब अंसारी, मौलाना अबसार हबीबी, अब्दुल हसीब खां, सलीम खां आड़ती, फैसल एडवोकेट, उवैस रज़ा क़ादरी, रिजवान खां आदि लोग उपस्थित रहे।