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सीलिंग की कब्जाई जमीन पर विकास कार्य कराने में फंस सकते हैं कई अफसर
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प्रतीकात्मक ।
- फोटो : प्रतीकात्मक ।
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पीडब्ल्यूडी, पावर कॉरपोरेशन और नगर निगम के अफसर भी विजिलेंस जांच के घेरे में
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बरेली। सिविल लाइंस में सीलिंग की 16 हजार वर्ग मीटर जमीन पर अवैध कब्जे के मामले में पीडब्ल्यूडी, पावर कॉरपोरेशन और नगर निगम के अफसरों पर भी शिकंजा कस सकता है। इन विभागों ने अवैध कब्जे वाली जमीन होने के बावजूद वहां सड़क निर्माण समेत तमाम विकास कार्य कराए हैं। विजिलेंस अफसरों का कहना है कि अगर शासन ने इस मामले में सख्ती दिखाई तो इन विभागों के अफसर भी कार्रवाई के लपेटे में आ जाएंगे।
सीलिंग एक्ट लागू होने के बाद सिविल लाइंस में जंक्शन तिराहे से कचहरी की ओर मालगोदाम रोड पर कोठी नंबर 166 की करीब 16 हजार वर्ग मीटर भी इसके दायरे में आ गई थी। इसके बाद यह जमीन खुर्द-बुर्द होनी शुरू हो गई। धीरे-धीरे पूरी जमीन पर कब्जे हो गए तो वर्ष 1990 में शासन में शिकायत हुई। मामले की जांच विजिलेंस को सौंपी गई। तीस साल तक चली जांच के बाद विजिलेंस ने 500 पन्ने की रिपोर्ट तैयार की, जो पांच महीने पहले मुख्यालय को भेजी जा चुकी है। इसमें प्रशासन के सीलिंग अधिकारी, नगर निगम के तत्कालीन उप प्रशासक और बीडीए के करीब 20 अफसरों को दोषी माना गया। सीलिंग की इस जमीन पर 50-60 लोग काबिज बताए गए। विजिलेंस अफसरों का कहना है कि जमीन पर अवैध कब्जे होने के बावजूद यहां लगातार विकास कार्य होते रहे। पीडब्ल्यूडी ने सड़क बनाई, बिजली विभाग ने कनेक्शन बांटे, नगर निगम ने भी सौंदर्यीकरण समेत कई कार्य कराए। ऐसे में अगर शासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया तो इन विभागों के कई अफसर भी कार्रवाई के घेरे में आ जाएंगे।
सीलिंग एक्ट लागू होने के बाद सिविल लाइंस में जंक्शन तिराहे से कचहरी की ओर मालगोदाम रोड पर कोठी नंबर 166 की करीब 16 हजार वर्ग मीटर भी इसके दायरे में आ गई थी। इसके बाद यह जमीन खुर्द-बुर्द होनी शुरू हो गई। धीरे-धीरे पूरी जमीन पर कब्जे हो गए तो वर्ष 1990 में शासन में शिकायत हुई। मामले की जांच विजिलेंस को सौंपी गई। तीस साल तक चली जांच के बाद विजिलेंस ने 500 पन्ने की रिपोर्ट तैयार की, जो पांच महीने पहले मुख्यालय को भेजी जा चुकी है। इसमें प्रशासन के सीलिंग अधिकारी, नगर निगम के तत्कालीन उप प्रशासक और बीडीए के करीब 20 अफसरों को दोषी माना गया। सीलिंग की इस जमीन पर 50-60 लोग काबिज बताए गए। विजिलेंस अफसरों का कहना है कि जमीन पर अवैध कब्जे होने के बावजूद यहां लगातार विकास कार्य होते रहे। पीडब्ल्यूडी ने सड़क बनाई, बिजली विभाग ने कनेक्शन बांटे, नगर निगम ने भी सौंदर्यीकरण समेत कई कार्य कराए। ऐसे में अगर शासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया तो इन विभागों के कई अफसर भी कार्रवाई के घेरे में आ जाएंगे।
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